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निमोनिया, अपने परिवार और बच्चों की ऐसे करें सुरक्षा

निमोनिया कई कारणों से होता है जिनमें प्रमुख हैं बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या अन्य कुछ परजीवी। इनके अलावा जानकारों के अनुसार कुछ रसायनों और फेफड़ों पर लगी चोट के कारण भी निमोनिया होता है। 

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rishi jaiswal

Oct 05, 2016

pneumonia

pneumonia diseases


ग्वालियर। सर्दी में अकसर बच्चों को निमोनिया होने का डर रहता है। यह कोई छोटी-मोटी बीमारी नहीं है। निमोनिया फेफड़ों में असाधारण तौर पर सूजन आने के कारण होता है। इसमें फेफड़ों में पानी भी भर जाता है।

आमतौर पर निमोनिया कई कारणों से होता है जिनमें प्रमुख हैं बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या अन्य कुछ परजीवी। इनके अलावा जानकारों के अनुसार कुछ रसायनों और फेफड़ों पर लगी चोट के कारण भी निमोनिया होता है। सामान्यत: बैक्टीरिया जनित निमोनिया दो से चार सप्ताह में ठीक हो सकता है। वही इसके विपरीत वायरल जनित निमोनिया ठीक होने में अधिक समय लेता है।

मूलत: निमोनिया का पता इस बात से अधिक लगाया जाता है कि पहली बार बीमारी का पता चलने के समय रोगी कितना बीमार था। विशेषज्ञों के मुताबिक निमोनिया के मरीज को सादा भोजन करना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए। इसके अलावा मरीज को तेल, मसालेदार और बाहर के खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।

निमोनिया के लक्षण
निमोनिया में कई रोगी खून भी थूकते हैं। इसके अलावा चमड़ी के रंग का नीला पडऩा, मतली, उल्टी, व्यवहार परिवर्तन, थकान, भूख न लगना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द भी होता है। छाती में दर्द, तेज बुखार, जो 103 से 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। सर्दी लग कर शरीर ठंडा पड़ जाना, सिर दर्द, सूखी खांसी, खांसने पर कम मात्रा में ललाई युक्त कफ आना।
छोटे या नवजात बच्चों में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देता है। बच्चे देखने में बीमार लगें तो उन्हें निमोनिया हो सकता है।



यह हैं उपचार
1. सबसे पहले डॉक्टर को दिखा कर अपना इलाज शुरु करवाएं। रोगी को गर्म कमरे में आराम से लिटाए। खुली हवा और आक्सीजन पूरी मात्रा में मिलनी चाहिए। गर्म पेय जैसे, चाय, गर्म पानी, गर्म, फलों का रस आदि पिलाते रहें।
2. छाती में दर्द होने पर पानी को गर्म कर उसमें लौंग, तुलसी के पत्ते डाल ढक कर रखना चाहिए। तुलसी के पांच हरे पत्ते, पीपल के 2 छोटे पतते आधा कप पानी में पीसकर थेाड़ी थोड़ी सी मिश्री मिला कर दोनों समय पीने से संक्रामक कीटाणु से बचाव होता है।
3 . तुलसी के पांच हरे पत्ते, पांच काली मिर्च, तीन ग्राम मिश्री साथ पीस लें और गोली बना लें। एक-एक गोली सुबह-शाम पानी से लें।
4 . नीम के चार छोटे पत्ते, पीपल के दो छोटे पत्ते पीस कर गोली बनाएं और सुबह-शाम एक एक गोली पानी से लें।
5 . सुबह तुलसी के 3 पत्ते पीस कर पानी से लें तो हर तरह के कीटाणुओं से रक्षा होगी।
6. अडुसा के 5 नग, तुलसी के 3 पत्ते, नीम के तीन पत्ते पीस कर एक कप पानी में उबाल कर आधा कप पानी रहते पर छान लें व मिश्री मिला कर गुनगुना कर दोनों समय पी लें।
7. बच्चों को निमोनिया में दूध थोड़ी केसर मिला कर दिन में 2 बार पिलाएं।
8. 25 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन की पांच कलियों को गर्म करके उस तेल से बच्चे की मालिश करें।



निमोनिया यानि फेफड़ों का संक्रमण
निमोनिया मूलत: फेफड़ो में संक्रमण होने से होता है।
पहले से बीमार लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से ही कमजोर होती है इसलिए स्वस्थ लोगों के मुकाबले उन्हें निमोनिया होने की संभावना अधिक होती है।




निमोनिया के घरेलू उपचार
1. हल्दी, काली मिर्च, मेथी और अदरक जैसे प्रतिदिन उपयोग में आने वाले खाद्य प्रदार्थ फेफड़ों के लिए फायदेमंद होते हैं। 2. तिल के बीज भी निमोनिया के उपचार में सहायक होते हैं। 300 मिलीलीटर पानी में 15 ग्राम तिल के बीज, एक चुटकी साधारण नमक, एक चम्मच अलसी और एक चम्मच शहद मिलकर प्रतिदिन उपयोग करने से फेफड़ों से कफ बाहर निकलता है।
3. ताजा अदरक का रस लेने या अदरक को चूसने से भी निमोनिया में आराम मिलता है।
4. थोड़े से गुनगुने पानी के साथ शहद लेना भी लाभदायक रहता है।
5. गर्म तारपीन तेल का और कपूर के मिश्रण से छाती पर मालिश करने से निमोनिया से राहत मिलती है।
6. रोगी का कमरा स्वच्छ, और गर्म होना चाहिए। कमरे में सूर्य की रोशनी अवश्य आनी चाहिए।
7. रोगी के शरीर को गर्म रखें, विशेषकर छाती और पैरों को।
8. तुलसी भी निमोनिया में बहुत उपयोगी है। तुलसी के कुछ ताजे पत्तों का रस, एक चुटकी काली मिर्च में मिलकर रख लें और हर छह घंटे के बाद दें।