ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग एवं प्रशासन क्षेत्र में तेंदुओं की जान बचाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं कर रहा है। पिछले 4 वर्षों से तेंदुआ देखे जाने की जानकारी ग्रामीण देते रहे हैं, लेकिन वन विभाग को पकडऩे में सफलता नहीं मिली। पिछले साल दो शावकों की मृत्यु भी क्षेत्र में हुई थी और अब करंट लगने से तेंदुए की मौत हुई है। उमाशंकर ने बताया कि तेंदुए को लेने संबंधित विभाग की टीम पहुंच गई है।
बैक वॉटर के पानी से जंगली जानवरों का खतरा बढ़ा
सरदार सरोवर बांध के पूर्ण रूप से भरने के बाद बैक वॉटर का पानी ग्राम कडमाल नाले में आने के कारण वहां पर मगरमच्छ देखने की जानकारी भी सामने आई है। ग्राम बाजरी खेड़ा के निवासी विक्रम गिरी गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने गत दिवस कडमाल नाले के अंतिम छोर पर बैक वाटर के पानी में एक मगरमच्छ को देखा था।
सरदार सरोवर बांध के पूर्ण रूप से भरने के बाद बैक वॉटर का पानी ग्राम कडमाल नाले में आने के कारण वहां पर मगरमच्छ देखने की जानकारी भी सामने आई है। ग्राम बाजरी खेड़ा के निवासी विक्रम गिरी गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने गत दिवस कडमाल नाले के अंतिम छोर पर बैक वाटर के पानी में एक मगरमच्छ को देखा था।
विसरा रिपोर्ट आगे भेजी जाएगी
&तेंदुए की मौत किस वजह से हुई है। इसके बारे में अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता। अभी तेंदुए का पोस्टमार्टम कर उसकी विसरा जांच रिपोर्ट आगे भेजी जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। – संतोष पाराशर, वन परिक्षेत्र अधिकारी, कुक्षी
&तेंदुए की मौत किस वजह से हुई है। इसके बारे में अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता। अभी तेंदुए का पोस्टमार्टम कर उसकी विसरा जांच रिपोर्ट आगे भेजी जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। – संतोष पाराशर, वन परिक्षेत्र अधिकारी, कुक्षी
बैक वॉटर से मछली पकड़ रहे शौकीन
निसरपुर का उरी बाघनी नदी पर बना नवनिर्मित पुल मछली पकडऩे वाले शौकीनों की सैरगाह बन गया है। सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर पुल के लेवल के नजदीक लबालब होने से सुबह 6 से कई लोग मछलियां पकड़तेे हैं। कई मछली खाने के लिए तो कई लोग पकडक़र बेचकर कमाई कर रहे हैं। गजेंद्र मंडलोई ने बताया कि उनके सामने एक व्यक्ति ने 2 से 3 किलो की मछली पकड़ी और कुक्षी के एक शौकीन ने हाथों-हाथ साढ़े तीन सौ रुपए में खरीद ली।
निसरपुर का उरी बाघनी नदी पर बना नवनिर्मित पुल मछली पकडऩे वाले शौकीनों की सैरगाह बन गया है। सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर पुल के लेवल के नजदीक लबालब होने से सुबह 6 से कई लोग मछलियां पकड़तेे हैं। कई मछली खाने के लिए तो कई लोग पकडक़र बेचकर कमाई कर रहे हैं। गजेंद्र मंडलोई ने बताया कि उनके सामने एक व्यक्ति ने 2 से 3 किलो की मछली पकड़ी और कुक्षी के एक शौकीन ने हाथों-हाथ साढ़े तीन सौ रुपए में खरीद ली।