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मंत्री बोलेः मुझे जूते मारें, डंडे मारें, मैं निकम्मा हूं…

मंत्री ने खुद को निकम्मा तक कह दिया। लोगों का गुस्सा शांत करने उन्होंने खुद पर जूते, लाठी, पत्थर फेंकने तक की बात कही. हालांकि आखिर में बोले कि चाहे कुछ हो जाए, शहर के हित में जो होगा वह जरूर करूंगा।  

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ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर

ग्वालियर. ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. किला गेट क्षेत्र में मकानों दुकानों को तोड़ने के बाद नाराज लोगों को मनाने डैमेज कंट्रोल के लिए पहुंचे मंत्री तोमर ने खुद को निकम्मा तक कह दिया। लोगों का गुस्सा शांत करने उन्होंने खुद पर जूते, लाठी, पत्थर फेंकने तक की बात कही. हालांकि आखिर में बोले कि चाहे कुछ हो जाए, शहर के हित में जो होगा वह जरूर करूंगा।

हजीरा स्थित किला गेट क्षेत्र में सड़क निर्माण में बाधा बन रहे मकानों को रविवार को अचानक तोड़ा जाने लगा। लोगों ने विरोध किया लेकिन पुलिस के सामने चुप हो गए। जेसीबी चली तो कांग्रेस नेता पहुंचे उन्हें पकड़कर नजरबंद कर दिया गया। जिनके मकान-दुकान टूटे उनमें नेताओं के प्रति जबरदस्त नाराजगी थी। सोमवार सुबह अचानक क्षेत्रीय विधायक और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर यहां डैमेज कंट्रोल के लिए पहुंचे। लोगों का गुस्सा शांत करने उन्होंने भाषण दिया और खुद पर जूते, लाठी, पत्थर फेंकने तक की बात कह दी।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने कहा, सबको नहीं बुला रहा हूं, संतुष्ट करने के लिए। अगर आप असंतुष्ट हैं। यदि आप समझते हैं कि मैं निकम्मा हूं तो आपके किसी काम का नहीं हूं। आपके साथ अन्याय किया है तो मैं क्षत्रिय बालक हूं। आप कहें तो आज ही पद से इस्तीफ देकर कुर्सी से बाहर हो जाऊंगा। अगर आपको विश्वास नहीं है। मुझे कुछ नहीं कहना। ना ही मुझे तोड़फोड़ पर कुछ कहना। आपको लाठी चलानी है, लाठी चलाएं, मुझे जूते मारने हैं, जूते मारिए, पत्थर फेंकना, पत्थर फेंकिए लेकिन कह देता हूं वह काम जरूर करूंगा जो आने वाली पीढ़ियों और ग्वालियर का भला होगा।

अगर आपको मुझे पर भरोसा नहीं है, नेताओं की तरह मुझे भी गिनना चाहते हैं तो मुझे कोई तकलीफ नहीं होगी। ये मेरा कोई चुनावी भाषण नहीं है। मैं आपकी बात सुनूंगा। आपको गाली देना है गाली दीजिए। जो करना है, करिए। आपके कुछ साथी मेरे पास आए। इससे पहले भी सिर रखकर कहा था कि प्रशासन कार्रवाई करेगा और आप लोगों ने मेरी बात की कोई तबज्जो नहीं दी। पिछले डेढ साल से काम रुका था और प्रशासन ने मुझे से कहा आप काम करने नहीं दे रहे हो। मैं तो आपका सेवक हूं इसीलिए आपके पास आया हूं। मैं चाहता हूं कि कोई बीच का रास्ता निकाला जाए। आप मेरे साथ चलो। जिला प्रशासन को लेकर बैठकर बात करते हैं। बीच का रास्ता निकालते हैं जिससे आपको न्याय मिल सके। विकास के काम भी प्रभावित न हो। इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं कहना। मैंने प्रशासन से कहा है आप जो सहमति देंगे लिखकर, उसके हिसाब से कार्रवाई होगी।

ऊर्जा मंत्री से पूछा सवाल, तब आप कहां थे
ऊर्जा मंत्री के सामने लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा हम तो बर्बाद हो गए। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। निगम प्रशासन ने बिना बताया तोड़फोड़ शुरू कर दी। हमें समय तक नहीं दिया। जब आपके पास गए तो आप कहां चले गए थे और जब कार्रवाई हो गई तो आप आज आ गए हो। आप पर विश्वास कैसे करें।