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शिवपुरी में “दस्तक” तो दी लेकिन भूले फिर से सुध लेना, बच्चों की हालत गंभीर

बच्चों को खून चढ़वाने के बाद मॉनीटरिंग भूले जिम्मेदार

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dastak abhiyan in shivpuri

शिवपुरी में "दस्तक" तो दी लेकिन भूले फिर से सुध लेना, बच्चों की हालत गंभीर

शिवपुरी। ‘दस्तक’ अभियान के तहत घर-घर दस्तक देकर तलाशे गए ख्ूान की कमी के गंभीर बच्चों को अस्पताल में लाकर ब्लड चढ़वाने के बाद जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। पखवाड़ा बीतने के बाद न तो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने और न ही महिला बाल विकास विभाग के नुमाइंदों ने इन बच्चों की कोई सुध ली है। हालात यह हैं कि ये बच्चे फिर से उसी स्थिति की ओर जा रहे हैं जिस स्थिति में यह पहले थे।

दरअसल दस्तक अभियान के तहत चिह्नित किए गए अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने के बाद और एनीमिया के गंभीर बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के उपरांत प्रत्येक सात दिन में उनका फॉलोअप किया जाना था। इसी क्रम में दस्तक अभियान के तहत 14 जुलाई को खून की कमी के 23 गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल लाकर उनका ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराया गया था। इन बच्चों को ब्लड चढ़वाने के बाद प्रत्येक सात दिन में इनका फॉलोअप किया जाना था, ताकि इनकी स्थिति पर नजर रखी जा सके। दो माह बाद फिर से एचबी टेस्ट किया जाना है। जिम्मेदार दस्तक अभियान के प्रति कितने संजीदा हैं यह जानने के लिए पत्रिका ने आदिवासी बस्ती महल सराय पहुंच कर उन बच्चों के परिजनों से बात कर यह जानने की भी कोशिश की कि, बच्चों को ब्लड चढ़वाने के बाद क्या कोई डॉक्टर, नर्स अथवा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनके यहां बच्चे की स्थिति देखने आई है। इस पर परिजनों का कहना था कि खून चढ़वाने के बाद यहां कोई भी बच्चों को देखने नहीं आया।

यहां उल्लेख करना होगा कि 14 जुलाई को पोहरी, नरवर, शिवपुरी, सतनवाड़ा, कोलारस से खून की कमी के जिन 23 गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उन बच्चों के नाम विभाग ने सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया था। इस संबंध में विभाग के सूत्रों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया था ताकि उन बच्चों की पहचान उजागर न हो सके।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई
फॉलोअप तो आशा कार्यकर्ता को करना है और सभी जगह पर वह अनिवार्य रूप से यह कार्य कर रही होंगी। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो मैं दिखवाता हूं, लापरवाही बरतने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एएल शर्मा, सीएमएचओ

खून चढ़ाने के बाद कोई नहीं आया
मेरे बेटे कपिल को खून चढ़ाने के लिए ले गए थे, खून चढ़ा दिया इसके बाद कोई भी देखने के लिए नहीं आया।
सपना आदिवासी, बच्चे की मां ( अपने एनेमिक बेटे के साथ सपना।)

मेरे बेटे को रविवार को खून चढ़ा था

मेरे बेटे को पिछले रविवार को अस्पताल में खून चढ़ाया गया था, वहां से हम लौट कर आए उसके बाद कोई देखने नहीं आया।
प्रेमवती, बच्चे की मां ( अपने बीमार बेटे के साथ प्रेमवती।)

अभी तक न आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आई न नर्स
मेरे मेरी बेटी अनूपी के बेटे रामसिंह और बेटी नूरी को अस्पताल वाले खून चढ़ाने के लिए ले गए थे, उस दिन के बाद न तो कोई नर्स देखने आई और न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।
हीरनदेही, बच्चों की नानी ( बीमार बच्ची के साथ उसकी नानी)