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बुंदेलखंड की शान सतखंडा महल में पर्यटन से आएगी जान

Veer Singh Palace 400 साल पुराना वीर सिंह पैलेस बनेगा प्रमुख पर्यटन स्थल केमीकल ट्रीटमेंट करवाने की तैयारीलाइटिंग से मिल रही अलग पहचान

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भूपेन्द्र सिंह
बुन्‍देलखंड की शान माने जाने वाले ऐतिहासिक महत्व और स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूना वीर सिंह पैलेस के दिन फिरने वाले हैं। स्‍मार्ट सिटी परियोजना के तहत यहां कराई गई लाइटिंग ने इसकी शोभा में चार चांद लगा दिए हैं। इससे इसका वैभवऔर भी निखर गया है। इससे अब रात्रि में यह बेहद आकर्षक और हाइवे से दूर से ही नजर आता हैं। सैलानियों की बरबस ही नजर इस पर पडती है तो इसे देखने के प्रति उनकी जिज्ञासा जाग उठाती है। अब सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इसकी सार-संभाल करने की योजना बना रही है। अब यह पर्यटन सर्किट में शामिल होने से पर्यटकों के आकर्षण का केन्‍द्र बन सकेगा।
विकसित हो रहा पर्यटन सर्किट
बड़ी संख्‍या में पर्यटक पीतांबरा पीठ के दर्शन करने आते हैं या झांसी का किला। यह किया दतिया से 30 किलोमीटर दूर है। झांसी किले से करीब 15 किलोमीटर दूर ओरछा में रामराजा का मंदिर है। यह भी पर्यटन की दृष्टि से बेहद चर्चित और प्रसिद्ध है। सरकार अब इस योजना पर काम कर रही है कि वीर सिंह पैलेस और अन्य सभी स्थलों से संपर्क सड़क और यातायात को बेहतर और सुगम किया जाए तो यहां पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है। इसी दिशा में प्रयास भी होने लगे हैं।
फिल्‍मी हस्तियों के आने से हो रहा खास
वीर सिंह पैलेस अथवा सतखंडा महल ग्वालियर झांसी नेशनल हाईवे संख्‍या 44 से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर है। लाला के ताल की तलहटी में स्थिति वीर सिंह पैलेस के पास ही प्राचीन विजय काली माता का मंदिर है। पास ही प्राचीन टाउन हॉल है। यहां सेराजगढ़ चौराहा और पास ही पीतांबरा पीठ का सिद्ध मंदिर है। यहां बगलामुखी देवी, स्वामी जी और मां दुर्गावती माई विराजमान है। पीताम्बरा पीठ में राजनीति व फिल्मी जगत की प्रमुख हस्तियां आती रहती है। यहां से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर उनाव बालाजी मंदिर है। बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पीतांबरा पीठ आते हैं। यहां से उनाव बालाजी भी जाते हैं। पीतांबरा पीठ से करीब 60 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध रतनगढ़ देवी का मंदिर है यहां हर दीपावली की दोज पर लक्खी मेला लगता है जिसमें करीब 20 से 25 लाख लोग आते है।
जैन तीर्थ सोनागिरी भी नजदीक
वीर सिंह पैलेस के करीब 10 किलोमीटर दूरी पर ही सिद्ध क्षेत्र सोनागिर है। यहां दिगंबर जैन का प्राचीन मंदिर सहित करीब एक हजार मंदिर बताए जाते है। यहां पर्यटक स्थल के रूप में विख्यात है। अब यहां फिल्मों तथा वेब सीरीज की शूटिंग भी होने लगी है।
सात खंडों वाला सतखंडा महल
दतिया में विजय काली माता मंदिर के पास बेहद खूबसूरत वीर सिंह पैलेस को लगभग चार शताब्‍दी पहले सन 1618 में बुंदेली राजा वीर सिंह जूदेव ने बनवाया था। जानकारों के मुताबिक इसके निर्माण में तब 35 लाख रुपए खर्च हुए थे और 9 साल में बनकर तैयार हुआ था। यह बुंदेलखंड कि सबसे खूबसूरत इमारतों में शुमार है। वीर सिंह पैलेस को शहर व आसपास के क्षेत्र में सतखंडा महल के नाम से भी जाना जाता है। यह महल सात खंड में बना हुआ है। दो खंड जमीन के नीचे और पांच जमीन के ऊपर हैं। महल का अंदर का हर खंड स्वास्तिक आकार में बना हुआ है। महल की एक और विशेषता यह भी है कि इसके निर्माण में लोहे एवं लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। शहर की घनी आबादी के बीच स्थित इस महल को देखने प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक आते हैं। वर्तमान में इस महल के रखरखाव एवं देखरेख का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास है।
गामा पहलवान का अखाड़ा
उत्तर भारत में मुहावरे के रूप में लिया जाने वाला गामा पहलवान शब्द का भी इस महल से सीधा सम्बन्ध है। ऊपर वाली मंजिल पर जीवनभर अजेय रहे रूस्‍तम ऐ हिन्‍द गामा पहलवान का अखाड़ा भी है। गामा पहलवान मूल रूप से पटियाला का रहने वाले थे। आजादी के पहले दतिया के महाराजा भवानी सिंह ने उन्हें दतिया बुलाया था। यह गामा पहलवान का ननिहाल था। बचपन में ही यहां आकर कुश्तियां लड़ी। वीर सिंह पैलेस में बने अखाड़े में भी उन्होंने दावपेंच आजमाए। खास बात रही कि उन्होंने एक विदेशी पहलवान को हराया था और वे विश्व विजेता पहलवान माने गए। इतिहासकार विनोद मिश्र का कहना है की गामा पहलवान वीर सिंह पहले से बने अखाड़े में कुश्ती लड़ने जाते थे लेकिन अखाड़ा इससे पूर्व बन गया था।
कलक्टर ने लिखा पत्र
वीर सिंह पैलेस का संधारण और केमिकल ट्रीटमेंट कराए जाने के लिए कलेक्टर एवं जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद दतिया के अध्यक्ष संजय कुमार ने वीर सिंह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को कार्यालय भोपाल को पत्र भी लिखा है।