
खेती की मॉर्डन तकनीक, उपकरण व बीज के 200 स्टॉल,खेती की मॉर्डन तकनीक, उपकरण व बीज के 200 स्टॉल
ग्वालियर . हमें अपने परंपरागत जीवन मूल्यों, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, भूमि स्वास्थ्य सुरक्षा, श्री अन्न के रूप में प्रतिष्ठित मोटे अनाजों के उपयोग पर बल दिया गया था। उसी दिशा में लौटना होगा। क्योंकि हमारे अन्नदाता किसान की भलाई में ही देश की भलाई हैं। यह बात राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय किसान मेला एवं अंत राष्ट्रीय कृषि तकनीकी प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कही। चार दिवसीय किसान मेले में कृषि में आधुनिक प्रयोगों के आधार पर हो रहे परिर्वतनों, कृषि उपकरणों, उन्नत बीजों व तकनीकी संबंधी 200 से अधिक प्रदर्शनियों का हजारों किसानों, विद्यार्थियों व नागरिकों ने आज अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि श्री अन्न हमारी विरासत है उसकी प्रतिष्ठा पुन: स्थापित हो रही है। भारतीय दर्शन जो कहता है कि प्रकृति हमारी पोषक है किंतु वह हमारी हवस को पूरा नहीं कर सकती। इसी सबक के अनुरूप हमें प्रकृति के साथ खिलवाड़ के दुष्प्रभावों से बचते हुए अपनी कृषि करनी होगी जिससे अन्न दाता किसान और देश के आम व्यक्ति के जीवन में बदलाव भी हो। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा श्री अन्न भराव व जलभराव किया गया तथा लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार निदेशक, अटारी जोधपुर डॉ. जेपी मिश्रा तथा बेस्ट एकडमिशियन पुरस्कार डॉ. इंदर सिंह तोमर, अधिष्ठाता, उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर को प्रदान किया गया। कार्यक्रम में आयुक्त एवं चंबल संभाग मप्र दीपक सिंह, फार्मटेक प्रतिनिधि के रूप में जसवंत वामनिया, रिषभ शाह भी मंचासीन रहे।
किसानों को सही दिशा में प्रयास करने होंगेकार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष बद्रीनारायण चौधरी ने कहा कि हरित क्रांति के कारण हमारे उत्पादन में वृद्धि तो हुई परंतु उस कारण रासायनिक उर्वरकों व पेस्टीसाइड के उपयोग का किसान अधिक आदी हो कर इनका अंधाधुंध प्रयोग कर रहा है। जिससे हमारी जीवन पर खराब प्रभाव पड रहा है। उन्होंने कहा कि शोध की दिशा क्या हो इसका हमें बारीकी से विचार करना होगा। मिट्टी हमारी मां है, इसकी जीवंतता को बनाए रखने के लिए कृषि वैज्ञानिकों सहित किसानों को सही दिशा में प्रयास करने होगें।
परिपूर्ण ज्ञान प्राप्त होता है मेलों से
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे किसान मेलों से हमें परिपूर्ण ज्ञान प्राप्त होता है। हमारा देश तिलहन के क्षेत्र में अभी भी काफी पिछडा हुआ है। कुसुम, सरसों तथा मूंगफली का इस क्षेत्र में उत्पादन बढाने की काफी संभावना है। इसके लिए कृषकों तथा व्यवसायी वर्ग को साथ आना होगा। कार्यक्रम के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने कहा कि कृषि आय भोजन एवं जीडीपी का उच्च कोटि का स्त्रोत है। वैदिक काल से देखे तो कृषि ही धन है, कृषि ही मेधा, कृषि ही हम सबके जीवन का आधार है। कृषि जो प्रकृति पर निर्भर करती है उसमें जल मिट्टी व मौसम परिवर्तन मुख्य भूमिका रखते हैं।
16 राज्यों से आए कृषक
मेले में 16 राज्यों से आए हुए कृषक उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह, कंपनियों वं अन्य किसान हितग्राही संस्थाओं के द्वारा 200 तकनीकी प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसके साथ ही छोटे-छोटे कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित मिलेट्स उत्पाद, प्राकृतिक खेती, ऑर्गनिक फार्मिंग, कृषि संरक्षण, ड्रोन तकनीक का सजीव प्रसारण, खाद्यान्न प्रसंस्करण आदि विषयों को भी इस प्रदर्शनी में शामिल किया गया है। झाबुआ जिले के कलाकारों द्वारा नृत्य प्रदर्शन किया गया।
Published on:
04 Feb 2024 02:11 am
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
