गाज़ियाबाद

खजूर के पेड़ को हैंडपंप बताकर करा लिया रिबोर, जांच होने पर उखाड़ दिया पेड़

भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार मुक्त के दावों की पोल खुलती दिख रही है। जहां पर तत्कालीन प्रधान ने गांव में खजूर के पेड़ को हैंडपंप बताकर कागजों में उसको रिबोर करा दिया। इतना ही नहीं गांव में स्वच्छता के नाम पर डस्टबिन रखने के लिए 96 हजार रुपये का खर्च दर्शा दिया।

गाज़ियाबादOct 22, 2021 / 03:09 pm

Nitish Pandey

गाजियाबाद. उत्तर प्रदेश के गाजियबाद जिले मुरादनगर ब्लॉक के गांव जलालपुर-राधुनाथपुर का मामला है। जहां पर वर्ष 2016-17 में ग्राम प्रधान द्वारा हैंडपंप रिबोर कराना दर्शाया गया और फिर खाते से रुपये उड़ा लिए गए। हैरानी की बात ग्राम प्रधान ने जहां हैंडपंप रिबोर कराया दर्शाया है। जांच में वहां हैंडपंप की जगह पर खजूर का पेड़ मिला।
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गांव को स्वच्छ बनाने के नाम पर भी हुआ खेल

खजूर को हैंडपंप दिखाकर रिबोरिंग की रकम खाते से हड़प ली गई। इतना ही नहीं गांव को स्वच्छ बनाने के नाम पर खेल कर दिया गया। गांव में 6 स्थानों पर डस्टबिन लगाने के नाम पर 96 हजार रुपये का खर्च दिखाकर रकम निकाल ली गई। जांच पूरी होने के बाद डीएम ने तत्कालीन प्रधान को नोटिस जारी सरकारी फंड को खर्च करने के सुबूत समेत स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब ना देने पर प्रधान पर कार्रवाई कर रिकवरी भी की जा सकती है।
ये है मामला

गांव जलालपुर-रघुनाथपुर में तत्कालीन प्रधान सुनीता के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2016-17 में गांव में कराए गए विकास कार्य के संबंध में स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। इसके आधार पर प्रशासन ने दो-दो अधिकारियों से दो बार जांच कराई। इन अधिकारियों ने कई बिंदुओं पर जांच की। इसमें यह पाया गया कि कागजों में 13 हैंडपंप रिबोर का भुगतान दिखाया गया, इनमें 10 हैंडपंप का कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया गया। इसमें भी जिस हैंडपंप का कागजों में कार्य दिखाया गया है वहां खजूर का पेड़ मिला। हालांकि जांच पूरी होने के बाद अब यहां से खजूर का पेड़ भी उखाड़ दिया गया।
जमकर हुआ है सरकारी का बंदरबांट

जांच के दौरान कहीं नाली के निर्माण के दस्तावेज नहीं मिले तो कहीं निर्माण कार्य मिला ही नहीं। गांव में डस्टबिन लगाने पर 96 हजार का खर्च दर्शाया गया, लेकिन मौके पर महज छह डस्टबिन मिले। इसके अलावा शमशान घाट के चारदीवारी की मरम्मत, तालाब की सफाई, आरसीसी रोड का निर्माण, पुलिया का निर्माण इन सभी में सरकारी फंड का गबन पाया गया।
2019 में हुई थी शिकायत

तत्कालीन प्रधान के कार्यकाल में हुए कार्यों की जांच लगभग तीन वर्ष में पूरी हुई है। प्रारंभिक जांच जनवरी 2019 से शुरू की गई थी और जुलाई 2019 में पूरी हुई। गांव के निवासी विपिन, मुकेश, उदयवीर सिंह, ललित कुमार ने इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद जांच शुरू हुई थी। जुलाई 2019 में जांच के बाद संबंधित प्रधान और सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब और साक्ष्य मांगे गए थे।
तीन साल में पूरी हुई जांच

दस्तावेजों और साक्ष्य की जांच अगस्त 2019 में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी को सौंपी गई थी। डेढ़ साल बाद अधिकारी ने किसी अन्य जांच अधिकारी को नामित करने के लिए पत्र लिखा। इसके बाद जांच अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग और सहकारिता विभाग के सहायक उपायुक्त एवं सहायक निबंधक को सौंपी गई। यह जांच जुलाई 2021 में पूरी हुई है। इसके बाद प्रक्रिया चलती रही और हाल ही में डीएम की ओर से प्रधान को नोटिस जारी किया गया है।
उचित जवाब नहीं मिलने पर होगी कार्रवाई

इस बारे में जब जिला पंचायत राज अधिकारी राकेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया और निर्माण कार्यों के दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं। 15 दिन में साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए तो डीएम द्वारा कमेटी गठित करके गबन हुई धनराशि और रिकवरी के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद कार्रवाई होगी।
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