
मैनपुर. मुख्यालय मैनपुर के आदिवासी वनांचल पहाड़ी क्षेत्र से तस्करों द्वारा लगातार किए जा रहे तस्करी के चलते तोता विलुप्ति के कगार पर हैं। वन्य जीवों के तस्करी पर पूरी तरह से प्रतिबंध होने के बावजूद भी मैनपुर, कुल्हाड़ीघाट, इंदागांव, उदंती, सीतानदी टाईगर रिजर्व क्षेत्र के जंगलों से तोता की तस्करी बड़े पैमाने पर होने लगी है।
इन दिनों तोता सहित विभिन्न प्रजाती के पक्षियों की तस्करी गांवों से होकर प्रदेश के कई मैदानी इलाकों के अलावा शहरो तक हो रही है, लोगों के शौक के कारण ही छत्तीसगढ़ राज्य की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना आज विलुप्ति के कगार पर है। जहां इसी शौक के चलते जंगलों से रंग बिरंगे पक्षियों की तस्करी निरंतर हो रही है। साथ ही अब पहले की अपेक्षा क्षेत्र के जंगलों से पक्षियो के शिकार के चलते विभिन्न सुरीली आवाज लिए चहकने वाली पक्षियां विलुप्त के कगार पर पहुंच चूूकी है।
वहीं वन विभाग की उडऩदस्ता टीम ने कुछ वर्ष पहले क्षेत्रो मे बस्ता और बटेर बेचने के खिलाफ कही कहीं कार्यवाही की थी, परन्तु छोटे वन्य जीव गुप चुक तरीके से जंगलों से शहरों तक पहुंच रहे है और एक गिरोह के रूप में लोग इसकी तस्करी को अंजाम दे रहे है। विभाग वनांचल क्षेत्रो मे दर्जनो तोता बेचने खरीदने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही कर पा रही है। पेड़ों से पक्षियो को निकालने के लिए तस्कर सीधे पक्षियों के घोसले में नशीले पदार्थ रखकर या फंदे के सहारा लिया जा रहा है।
तोते की बड़ी तस्करी का जखीरा गांवों से लेकर शहरों तक हो रही है। जहां बांस के छोटे-छोटे टोकरियों में रखकर इन्हे लगातार बाहर भिजवाया जा रहा है। मांग अधिक होने के कारण तोता की कीमत ग्रामीण क्षेत्रों में पांच सौ रुपए व शहरो में हजारों रुपए तक पहुंच गई है। पहाड़ी व जंगली क्षेत्रों मे रहने वाले ग्रामीणो ने बताया कि क्षेत्र से फरवरी से अपै्रल माह में बड़ी तादात पर तोता, करण सुआ, मंझाली व छोटे सुआ (तोता) की तस्करी की जाती है जो वनो में कम, लोगो के घरों में पिंजरे में ज्यादा दिखते हैं। अभी तोता निकलना प्रारंभ हुआ है ऐसे में इसकी तस्करी पर तत्काल लगाम लगाये जाने की जरूरत है।
Published on:
13 Feb 2022 11:40 pm
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