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Fifa 2018 : क्या 2010 का जलवा इस वर्ल्ड कप में भी दोहरा पाएगी स्पेन

इनिएस्ता सर्गियो रामोस, जेरार्ड पीके एवं सर्गियो बुस्क्वेट्स का यह आखिरी विश्व कप भी हो सकता है। ऐसे में वे अपने अनुभव का इस्तेमाल करके स्पेन को खिताब तक पहुंचाना चाहेंगे।

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Fifa world cup 2018 : Is spain going to repeat its charm again.

Fifa 2018 : क्या 2010 का जलवा इस वर्ल्ड कप में भी दोहरा पाएगी स्पेन

नई दिल्ली, 3 जून
आंद्रेस इनिएस्ता एवं सर्गियो रामोस जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी में स्पेन 2014 फीफा विश्व कप की कड़वी यादों को भुलाते हुए 14 जून से रूस में होने वाले बहुप्रतिष्ठित टूर्नामेंट में दूसरी बार खिताब पर कब्जा करना चाहेगा।
ब्राजील में हुए पिछले विश्व कप में मौजूदा चैम्पियन के रूप में उतरी स्पेन को निराशा हाथ लगी थी और टीम ग्रुप स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई थी। टीम को शुरुआती मैच में ही नीदरलैंड्स के हाथों 5-0 से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी और वह इस कड़वी हार से उबर नहीं सकी थी।
दूसरे एकतरफा मुकाबले में चिली ने स्पेन को 2-0 से हराया। तीसरे मैच में जरूर स्पेन ने आस्ट्रेलिया को 3-0 से मात दी लेकिन यह जीत उसे नॉकआउट स्तर तक नहीं पहुंचा पाई।

स्पेन को करना पड़ा था लंबा इंतजार जीत का स्वाद चखने के लिए

स्पेन ने पहली बार 1934 फीफा विश्व कप में हिस्सा लिया था और विश्व विजेता बनने के लिए उसे 76 वर्षो का लंबा इंतजार करना पड़ा। 2010 विश्व कप में भाग लेने वाली स्पेन की टीम को टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे महान टीमों में गिना जाता है। यह वही समय था जब स्पेनिश कोच पेप गार्डियोला के मागदर्शन में एफसी बार्सिलोना फुटबाल खेलने के अपने अनोखे तरीके टिकी-टाका से यूरोप के शीर्ष क्लबों को परेशानी किए हुई थी।
बार्सिलोना के अलावा रियल मेड्रिड एवं एटलेटिको मेड्रिड की टीम भी बेहद मजबूत थी जिससे स्पेन की राष्ट्रीय टीम को बहुत लाभ हुआ। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका में हुए विश्व कप में टीम की शुरुआत खराब रही थी और उसे पहले मैच में स्विट्जरलैंड के खिलाफ 1-0 से अप्रत्याशित हार झेलनी पड़ी थी।पहले मैच में सीख लेते हुए टूर्नामेंट के बाकी मुकाबलों में स्पेन ने अपने प्रदर्शन के स्तर को गिरने नहीं दिया और ग्रुप स्तर में पहला पायदान हासिल करते हुए नॉकआउट में प्रवेश किया। नॉकआउट स्तर के मुकाबलों में स्पेन ने गेंद पर गजब का नियंत्रण दिखाया और सभी मैचों में जीत दर्ज की।


फाइनल मुकाबले में भी स्पेन ने अपने तरीके में बदलाव नहीं किया और अतिरिक्त समय में आंद्रेस इनिएस्ता ने एतिहासिक गोल दागकर पहली बार स्पेन को खिताब दिलाया।

इनिएस्ता आगामी विश्व कप में भी टीम के अहम खिलाड़ी होंगे। इनिएस्ता के अलावा सर्गियो रामोस, जेरार्ड पीके एवं सर्गियो बुस्क्वेट्स का यह आखिरी विश्व कप भी हो सकता है। ऐसे में वे अपने अनुभव का इस्तेमाल करके स्पेन को खिताब तक पहुंचाना चाहेंगे।

स्पेन के पास है मजबूत टीम,कर सकती है कप अपने नाम

इस विश्व कप में स्पेन की सबसे बड़ी ताकत युवा एंव अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण है। स्पेन के पास हर पोजीशन पर खेलने के विश्वस्तरीय खिलाड़ी मौजूद हैं और टीम अभी भी गेंद पर नियंत्रण बनाकर खेलना पसंद करती है। नए कोच जुलेन लोप्तेगुई ने अपने कार्यकाल में अब तक स्पेन के खेलने के तरीके में कुछ खास बदलाव लाने का प्रयास नहीं किया है। क्वालीफाइंग राउंड में टीम का प्रदर्शन शानदार रहा।

स्पेन ने क्वालीफाइंग राउंड के दस में से नौ मुकाबलों में जीत दर्ज की जबकि एक मैच ड्रॉ रहा। कोच ने मार्को असेंसियो एवं साउल निगुएज जैस खिलाड़ियों को भी टीम में शामिल किया है और आगामी प्रतियोगिता में प्रशंसकों की नजरें इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों पर होंगी।
विश्व कप में स्पेन को पुर्तगाल, मोरक्को एवं ईरान के साथ ग्रुप बी में रखा गया है और दर्शक रोनाल्डो बनाम स्पेन के डिफेंस के बीच होने वाले मुकाबले को देखने के लिए उत्सुक होंगे।

स्पेन की टीम 14 जून से रूस में शुरू होने वाले विश्व कप में अपना पहला मैच 15 जून को पुर्तगाल के खिलाफ खेलेगी।

टीम :

गोलकीपर : डेविड डि गिया, पेपे रियना, केपा अरीर्जाब्लागा।

डिफेंडर : जॉर्डी आल्बा, नाचो मोनरियल, अल्वारो ऑडरियोजोला, नाचो फनार्डीज, दानी कार्वाह्लो, जेरार्ड पीके, सर्गियो रामोस, सेजार अजपिलिकुएटा।

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मिडफील्डर : सर्गियो बुस्क्वेट्स, इस्को, थियागो अल्कांत्रा, डेविड सिल्वा, आंद्रेस इनिएस्ता, साउल निगुएज, कोके।

फारवर्ड : मार्को असेंसियो, इयागो, डिएगो कोस्टा, रोर्डिगो मोरेनो, लुकस वाजक्वेज।