
National Chambal Century Beauty from Thousands of alligators
कभी खूंखार डाकुओं के आंतक से जूझने वाली तीन राज्यों मध्यप्रदेश,राजस्थान और उत्तर प्रदेश मे फैली नेशनल चंबल सेंचुरी इस समय घडियाल के हजारों नौनिहालों से गुलजार हो गई है। वन्य जीव प्रेमियों के लिए बडी खुशी चंबल नदी से आई है जहां, हजारों की तादात में घाडियाल के बच्चे प्रजनन के बाद जन्मे हैं । घडियाल के बच्चों की किलकारियों ने चंबल सेंचुरी के अफसरों को खुश कर दिया गया है। 2100 स्क्वायर मीटर में फैले नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी में 1975 से घड़ियालों का संरक्षण करना शुरू हो गया था। चंबल सेंचुरी के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताते है कि जितनी तादात में घडियाल के बच्चे चंबल में नजर आ रहे हैं, उसे दुर्लभ प्रजाति के घड़ियालों की तादात में इजाफा करने के लिये पर्याप्त समझा जा रही है । उनका कहना है कि चंबल नदी में इतनी बड़ी तादात में घाडियाल के बच्चे चंबल के पानी में नजर आ रहे हैं जो सेंचुरी अफसरो को गदगद कर रहा है। फिलहाल अभी पूरी तरह से गणना नही हो पाई है लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही यह गणना पूरी कर ली जायेगी।
पांच से सात हजार घड़ियाल के बच्चे
राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के अफसरो की माने तीन राज्यों में पसरी चंबल नदी में एक अनुमान के मुताबिक 5000 से लेकर 7000 के आसपास घडियाल के छोटे छोटे बच्चे पानी मे तैरते हुए दिखलाई दे रहे है । बाह से लेकर इटावा तक करीब 70 किलोमीटर के दायरे मे इतनी बडी तादात मे इससे पहले घडियाल के बच्चों को प्रजनन के बाद नही देखा गया है। इन बच्चों की रखवाली के लिए चंबल सेंचुरी की ओर से रखे गये घडियाल रक्षक सेवक गांव वालो की मदद से बच्चों की निगरानी करने मे लगे हुए हैं। गांव वालो का कहना है कि उनके लिए चंबल नदी ही चिडियाघर है क्यो कि इतनी बडी तादात मे घडियाल के बच्चे दिखलाई दे रहे हैं। साथ ही घाडियालों को भी पास से देखने का मौका मिल रहा है।
अन्य जंगली जानवर पहुंचाते थे नुकसान
इससे पहले जब चंबल मे उत्तर प्रदेश के हिस्से में घडियाल का प्रजनन नही हुआ करता था। तब विभाग के अफसर राजस्थान से घडियाल के अंडे लेकर आते थे। जब बच्चे हो जाते तो उन बच्चो को चंबल मे ला कर छोडा जाता था। चंबल नदी में प्रजनन के बाद नजर आ रहे घडियाल के मासूम बच्चों को सियार जैसे जानवर भी नुकसान पहुंचाने लगे हुए हैं। चंबल नदी के किनारे इस तरह के वाक्ये देखे जा रहे है। जहां पर दर्जन भर के आसपास घडियाल के छोटे छोटे बच्चे मरे हुए नजर आ रहे हैं, जिनको लेकर गांव वालो का संदेह है कि चंबल मे पाये जाने वाले सियारो का घाडियाल के अंडे और बच्चे दोनों निवाला बन रहे हैं। अगर इस संख्या को पूरी की पूरी चंबल मे आंके तो यह यह एक बडी तादात हो सकती है।
प्रदूषण से होने लगी थी मौत
नेशनल चंबल सेचुरी में साल 2007 से फरवरी 2008 तक जिस तेजी के साथ किसी अनजान बीमारी के कारण एक के बाद एक करके करीब अधिक तादात में घडियालों की मौत हुई थी उसने समूचे विश्व समुदाय को चिंतित कर दिया था। ऐसा प्रतीत होने लगा था कि कहीं इस प्रजाति के घडियाल किसी किताब का हिस्सा न बनकर रह जाएं। घडियालों के बचाव के लिए तमाम अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं आगे आई और फ्रांस, अमेरिका सहित तमाम देशों के वन्य जीव विशेषज्ञों ने घडियालों की मौत की वजह तलाशने के लिए तमाम शोध कर डाले। घडियालों की हैरतअंगेज तरीके से हुई मौतों में जहां वैज्ञानिकों के एक समुदाय ने इसे लीवर क्लोसिस बीमारी को एक वजह माना तो वहीं दूसरी ओर अन्य वैज्ञानिकों के समूह ने चंबल के पानी में प्रदूषण की वजह से घडियालों की मौत को कारण माना। वहीं दबी जुबां से घडियालों की मौत के लिए अवैध शिकार एवं घडियालों की भूख को भी जिम्मेदार माना गया।
Updated on:
10 Jun 2022 10:56 am
Published on:
10 Jun 2022 10:54 am
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