
सरकार ज्यादा से ज्यादा कॉलेजों में यह प्रॉजेक्ट शुरू करना चाहती है। कॉलेजों में 10 मिनट के कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम को क्लियर करने के बाद लाइसेंस मिल जाएगा।
नई दिल्ली। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने शनिवार को कहा कि दिल्ली के छात्रों को अब उनके कॉलेज कैंपस से लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा। क्योंकि सरकार ने कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और निदेशकों को लाइसेंस जारी करने का अधिकार दे दिया है। गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि युवा हैं और दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं? आप जल्द ही अपने कॉलेज से लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही पायलट प्रॉजेक्ट शुरू करने को लेकर दूसरा नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर कैलाश गहलोत ने बताया कि कॉलेजों के प्रिंसिपल, डायरेक्टर्स को अधिकृत किया जाएगा और वे स्टूडेंट्स के लिए लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस प्रोसेस को कंडक्ट करवाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। दिल्ली सरकार की 7 यूनिवर्सिटी व इंस्टिट्यूशन के अलावा डीयू के 88 कॉलेजों, आईपी यूनिवर्सिटी के करीब 34 इंस्टिट्यूशन, 9 पॉलिटेक्निक व आईटीआई को इस पॉलिसी के दायरे में लाया जा रहा है। सरकार ज्यादा से ज्यादा कॉलेजों में यह प्रॉजेक्ट शुरू करना चाहती है। कॉलेजों में 10 मिनट के कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम को क्लियर करने के बाद लाइसेंस मिल जाएगा।
कॉलेज से जारी किए गए लर्नर लाइसेंस की वैधता छह महीने के लिए होगी। इस पहल से दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई के लगभग दो लाख छात्रों को लाभ मिलेगा। सरकार की यह पॉलिसी डीयू के सभी कॉलेजों के लिए होगी और जो भी कॉलेज इस प्रॉजेक्ट से जुड़ना चाहेंगे, वहां पर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम करेगा। आईपी और डीयू के कॉलेजों में स्टूडेंट्स की संख्या हजारों में है। स्टूडेंट्स अपने कॉलेजों में आसानी से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकेंगे। फिलहाल लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए परिवहन विभाग के दफ्तर में जाकर कागजी कार्यवाही करनी पड़ती है और औपचारिक ऑनलाइन टेस्ट देने के बाद ही लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस हासिल होता है।
कुछ साल पहले डीयू के दौलतराम कॉलेज में लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस कैंपस में ही बनाने को लेकर प्रयोग हुआ था। उस समय करीब 400 स्टूडेंट्स ने एक दिन में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए थे। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने एक सॉफ्टवेयर डिवेलप किया है, जिसके जरिए कॉलेजों में ही स्टूडेंट्स लर्निंग लाइसेंस बनवा सकेंगे। अब हर कॉलेज में कंप्यूटर लैब होती है और कंप्यूटर एक्सपर्ट होते हैं। उन्हें ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सॉफ्टवेयर के बारे में बताया जाएगा और उसके बाद वे टेस्ट कंडक्ट करवा सकेंगे।
कॉलेजों के स्टाफ को ट्रेनिंग की जाएगी। कॉलेजों और टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूशन के डायरेक्टर्स और प्रिंसिपल्स को अधिकार दिए जाएंगे कि वे लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए होने वाले ऑनलाइन टेस्ट को आयोजित करवाएं। टेस्ट में पास होने वाले स्टूडेंट्स को लाइसेंस दे दिए जाएं।
Published on:
04 Aug 2018 06:57 pm
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