
कम अकों के बावजूद भी अब डॉक्टर, इंजिनियर और वैज्ञानिक बना जा सकता है। अब तक यही कहा जाता रहा है की भारत में युवाओं की संख्या की तुलना में मेडिकल कॉलेजों में सीटें कम हैं, लेकिन अब बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों की सीटें भरने के लिए एंट्रेंस टेस्ट में बेहद कम अंक लाने वालों को भी दाखिला दिया जा रहा है। NEET में भौतिकी (Physics) में 5 फीसदी, रसायन शास्त्र (chemistry) में 10 फीसदी से कम अंक लाने वालों को भी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि जीव विज्ञान (Biology) में मात्र 20 फीसदी अंक लाने वाले छात्रों-छात्राओं को भी मेडिकल कॉलेजों दाखिला दिया जा रहा है।
खबर है की NEET में चयन के लिए पर्सेंटाइल सिस्टम लागू होने की वजह से कम अंक वाले छात्रों को भी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने में आसानी हो रही है। इस साल भी NEET में 20 फीसदी से भी कम अंक लाने वालों को भी दाखिला दिया जा सकता है।
NEET क्वालिफाई करने के लिए इतने चाहिए न्यूनतम अंक
NEET ने प्रवेश परीक्षा में नंबरों की होड़ खत्म करने के लिए पर्सेंटाइल सिस्टम लागू किया है। यह प्रक्रिया यह अंकों पर आधारित न होकर अनुपात पर आधारित है। साल 2016 में NEET ने पर्सेंटाइल सिस्टम लागू किया था। इसके तहत सामान्य श्रेणी के स्टूडेंट्स के लिए कट ऑफ 50 फीसदी और रिजर्व वर्ग के लिए 40 फीसदी था। अब इसी वजह से NEET में 18 से 20 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने का पूरा मौका मिल रहा है।
महज 20 फीसदी पर दाखिला
गौरतलब है की 2015 तक सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स को NEET में 50 फीसदी अंक लाने जरूरी होते थे। इसमें 720 अंक की प्रवेश परीक्षा में 360 अंक लाने जरूरी होते थे। लेकिन अब पर्सेंटाइल सिस्टम लागू होने के बाद पास होने के लिए 50 पर्सेंटाइल लाने होते हैं। इसका मतलब 720 के पेपर में महज 145 अंक यानी 20 फीसदी अंक लाने होते हैं जो उनके लिए बहुत आसान हो चुका है। ऐसे ही आरक्षित वर्ग में पर्सेंटाइल रूल के तहत 720 में से महज 118 अंक यानी 16.3 प्रतिशत अंक लाने पर पर ही मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जा रहा है।
ऐसे समझें पर्सेंटाइल सिस्टम
अब NEET के पर्सेंटाइल सिस्टम में ज्यादा अंक लाने के आधार पर सलेक्शन नहीं किया जाता है। पर्सेंटाइल अनुपात प्रक्रिया है जिसमें चयन की नई प्रक्रिया अपनाई गई है। जैसे की 50 पर्सेंटाइल वालों का सलेक्शन होने पर नीचे से सबसे कम अंक पाने वाले आधे छात्रों के अलावा बाकी परीक्षार्थी पास माने जाते हैं। इसका मतलब 90 पर्सेंटाइल का मतलब होता है की नीचे से सबसे कम अंक लाने वाले परीक्षार्थियों के अलावा बाकी बचे परीक्षार्थी हैं।
Published on:
15 Apr 2018 04:48 pm
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