नई दिल्ली।
केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के लिए प्याज एक बार फिर से मुसीबत
खड़ी कर सकता है। महाराष्ट्र के लासलगांव स्थित देश की सबसे बड़ी प्याज की मंडी मे
प्याज का थोक भाव 4900 रूपए प्रति क्विंटल (100 किलो) तक पहुंच गया है। एक दिन में
कीमत 400 रूपए प्रति क्विंटल तक बढ़ गई।
प्याक का थोक भाव करीब 50 रूपए
प्रति किलो चल रहा है, जिसके चलते देश के कई हिस्सों में इसका खुदरा भाव 65-70 रूपए
प्रति किलो के पार जा सकता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में प्याज लासलगांव मंडी
से ही आता है। महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में प्याज की सर्वाधिक पैदावर होती है।
हालांकि, महाराष्ट्र की तरह, कम बारिश के कारण कर्नाटक मे भी सूखे के हालात हैं।
इन दो राज्यों के अलावा प्याज गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिल
नाडु और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है। कुछ दिनों तक 20 रूपए प्रति किलो तक बिकने
वाला प्याज पिछले दो हफ्तों मे अचानक महंगा हो गया है। वर्तमान में देश के कई
हिस्सों में प्याज 50-60 रूपए प्रति किलो बिक रहा है।
बेंगलूरू की मंडी मे
तो प्याज के थोक भाव 500 रूपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। प्याज की तेजी से
बढ़ती कीमतो से परेशा केंद्र सरकार विदेश से 10 हजार मैट्रिक टन प्याज का आयात
करेगी। सरकार ने इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। प्याज पाकिस्तान और चीन से आयात
किया जा सकता है।
बढ़ती कीमतों के पीछे जानकारों का कहना है कि गुजरात,
राजस्थान और मध्य प्रदेश में फसल कटाई में देरी के कारण ऎसा हुआ है। साथ ही, इस साल
कम हुई बारिश के कारण भी प्याज की पैदावर कम हुई है। पिछले दो सालों में प्याज की
कीमत 50 रूपए प्रति किलो को चार बार पार कर चुकी है। उपभोक्ताओ को राहत पहुंचाने के
लिए दिल्ली सरकार सरकारी दुकानों से प्याज बेच रही है।
देश के कुछ हिस्सों
को छोड़ दें तो बाकि हिस्सों में सामान्य से भी कम बारिश हुई है।