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भिलाई बचाने में तो दुर्ग निगम लुटाने में अव्वल

प्रदेश के नगरीय निकायों पर आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया कहावत शतप्रतिशत फिट बैठ रही है। नगरीय निकाय आय के स्रोत को बढ़ा नहीं पा रहे हैं।

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Satya Narayan Shukla

Jul 08, 2016

Bhilai in topped save Durg corporation pending

Bhilai in topped save Durg corporation pending

ताराचंद सिन्हा.भिलाई .
प्रदेश के नगरीय निकायों पर आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया कहावत शतप्रतिशत फिट बैठ रही है। नगरीय निकाय आय के स्रोत को बढ़ा नहीं पा रहे हैं। लेकिन खर्च आय से अधिक खर्च कर रहे हंै। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की स्थापना व्यय की रिपोर्ट पर गौर करें तो 5 नगर पालिक निगम, 13 नगर पालिका पलिका परिषद और 21 नगर पंचायतों की आर्थिक स्थिति खराब है।


दुर्ग निगम पहले स्थान पर

121 फीसदी स्थापना व्यय के साथ नगर पालिक निगम दुर्ग पहले स्थान पर है। तो 98.24 फीसदी स्थापना व्यय के साथ राजनांदगांव दूसरे नंबर पर है। संभाग के दोनों निगम आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वे अपने आय के स्रोत से हर माह अधिकारी कर्मचारियों का वेतन का भुगतान करने के लिए राजस्व भी नहीं जुटा पा रहे हैं। वेतन भुगतान के लिए इन्हें शासन का मुंह ताकना पड़ रहा है। नगर पालिक निगम राजनांदगांव ने अब तक मई के वेतन का भुगतान नहीं किया है।


वेतन का भुगतान नहीं हो पाया

नगर पालिक निगम दुर्ग आय की तुलना में खर्च के मामले में प्रदेश का नंबर-1 नगर पालिक निगम है। इनका स्थापना व्यय 121 फीसदी है। जो आय की तुलना में लगभग दो गुणा है। 98.24 फीसदी स्थापना व्यय के साथ नगर पालिक निगम राजनांदगांव दूसरे नंबर है। यहां प्रतिमाह अधिकारी कर्मचारियों के वेतन, र्इंधन खर्च, टेलीफोन, बिजली का बिल सहित अन्य पर हर माह 1.60 करोड़ रुपए खर्च होता है। जबकि इनकी औसत मासिक आय लगभग एक करोड़ है। मतलब यहां निगम प्रशासन प्रतिमाह 60 लाख रुपए अधिक खर्च कर रहा है। अब तक अधिकारी कर्मचारियों के मई का वेतन का भुगतान भी नहीं हो पाया है।


बैकों का कर्ज बढ़ रहा

96.99 फीसदी स्थापना व्यय के साथ नगर पालिक निगम धमतरी है। यहां प्रतिमाह लगभग एक करोड़ खर्च हो रहा है। आय 50 फीसदी है। राजस्व में वृद्धि नहीं होने से बैकों का कर्जदार बढ़ रहा है।अधिकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है। जिन निकायों का स्थापना व्यय 64 फीसदी से अधिक है।वे शहर के विकास में अपनी भागीदारी नहीं निभा पा रहे हैं।विकास कार्यों में होने वाले कुल खर्च का 80 फीसदी शासन और 20 फीसदी निगम की भागीदारी होती है।


3 नंबर पर आय जुटाने के मामले में भिलाई निगम

प्रदेश के मात्र दो नगर पालिक निगम का स्थापना व्यय 64 फीसदी से कम है। मतलब दोनों निगम आर्थिक रूप से सक्षम निगम है। यहां आय अधिक और खर्च कम है। 33.26 फीसदी कोरबा और 33.17 फीसदी बीरगांव निगम का स्थापना व्यय है। खर्च के मामले में नगर पालिक निगम भिलाई 60 फीसदी स्थापना व्यय के साथ तीसरे नंबर पर है। 70 स्थापना व्यय के साथ रायपुर निगम चौथे नंबर पर है।


नहीं दिया ध्यान

चाहे तो नगर पालिक निगम दुर्ग आय के स्रोत को बढ़ाकर स्थापना व्यय को कम कर सकती है। लेकिन अब तक ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया। शहर में कई व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स है। जिनका वर्षों से किराया रिवाइज नहीं हुआ है। कई ऐसे मकान मालिक है। जो निगम को टैक्स नहीं देता। ऐसे कई स्रोत है। जिससे निगम राजस्व प्राप्त कर स्थापना व्यय को कम कर सकती है।


बढ़ रहा स्थापना व्यय

नगर पालिक निगम राजनांदगांव महापौर मधुसुदन यादव का कहना है कि अधिकारी, कर्मचारियों की नियुक्ति, उनके वेतन में हर साल 14 फीसदी की वृद्धि हो रही है। बिजली का बिल, वाहन का ईंधन खर्च, और मेंटनेंस, कम्प्यूटर, इंटरनेट, एयर कंडीनशर का खर्च बढ़ रहा है। पांच साल में खर्च दो गुणा से अधिक हो गया है। लेकिन उस अनुपात में निगम को राजस्व नहीं मिल रही है।


आय की तुलना में अधिक खर्च

वहीं शासन पांच साल पहले जिस दर से चूंगीक्षतिपूर्ति, मुद्रांक शुल्क देता था। आज भी उसी दर से ही चूंगीक्षतिपूर्ति, मुद्रांक और आबकारी शुल्क दे रही है। इस वजह से आय की तुलना में अधिक खर्च हो रहा है। खर्च बढऩे की कारण स्थापना व्यय का प्रतिशत बढ़ता ही जा रहा है।

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