घटना के वक्त सभी ग्रामीण अपने अपने काम में लगे हुए थे। इस बीच एक खलिहान से धुआं उठता देख जब ग्रामीण वहां जमा हुए तो किसी की भी नजर बच्चों पर नहीं पड़ी। आग बुझाने के क्रम में ग्रामीणों ने देखा कि अंदर दो बच्चे भी हैं। यह खलिहान गांव के ही बुदन किस्कू का बताया जा रहा है। बच्चों को जलता देख कर गांव के लोगों ने आग बुझाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन जब तक आग पर काबू पाया जाता, दोनों बच्चे जल कर मर चुके थे। ग्रामीणों की माने तो दोनों बच्चे खलिहान में भूसे से बने ढाको मे खेल रहे थे।
मृतक बच्चों की पहचान 8 वर्षीय संजीव टुडू एवं 6 वर्षीय पाउल किस्कू के तौर पर हुई है, संजू टुडू के पिता मुन्ना टुडू नहीं हैं। पिछले वर्ष महुबना मेले के दिन उनकी हत्या कर दी गई थी। उसके घर में सिर्फ मृतक की मां एवं दादी हैं। दादी अपने पोते की लाश से लिपट कर रोती दहाड़ मार रही थीं। जबकि मां का भी रो-रो कर बुरा हाल है। जबकि पाउल के पिता बुदन किस्कू रविवार को मजदूरी की तलाश में परदेस गए हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद बुधन किस्कू वापस लौट रहे हैं। पंचायत की मुखिया सहित कई लोग मौके पर पहुंचकर मृतक परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। रामगढ़ थाना पुलिस को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। पंचायत की मुखिया लक्ष्मी देहरीन ने तत्काल मृतक के परिजन को कंबल एवं स्थानीय जनवितरण दुकानदार से चावल दिलाया है।