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छात्रों को पढ़ानाव उन्हे बेहतर बनाना शिक्षक का प्रथम दायित्व

मेरी शाला, मेरी जिम्मेदारी कार्यक्रम के अंतर्गत पाठशालाओं को किया जाएगा विकसित कमिश्नर ने शालेय स्वच्छता, समस्या एवं समाधान कार्यशाला को किया संबोधित

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The teacher's first obligation to educate and improve students

The teacher's first obligation to educate and improve students

डिंडोरी. मेरी शाला मेरी जिम्मेदारी कार्यक्रम के अंतर्गत पाठशालाओं को विकसित किया जायेगा। जिससे कि वह अपने उत्तरदायित्वों में सामूहिक रूप से भागीदारी कर सके। यह हमारे समुदाय की जिम्मेदारी है कि बदलते परिवेश के आधार पर बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सामूहिक उत्तरदायित्व, स्वच्छता के संबंध में बताया जाए। छात्र-छात्राओं को पढाना और उन्हें बेहतर नागरिक बनाना शिक्षक का प्रथम दायित्व है। इसके लिए जरूरी है कि पाठशालाओं में छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्वक शिक्षा दें। उक्त बातें कमिश्नर जबलपुर संभाग राजेश बहुगुणा गुरूवार को कलेक्ट्रेेट सभाकक्ष में शालेय स्वच्छता, समस्या एवं समाधान पर आधारित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर कलेक्टर बी. कार्तिकेयन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिलीप कुमार यादव, एसडीएम डिंडोरी प्रीति यादव, संयुक्त कलेक्टर अवधेश सिंह, डिप्टी कलेक्टर अक्षय मरकाम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आर.के. मेहरा, सहायक आयुक्त डॉ. अमर सिंह उईके, जिला समन्वयक सर्वशिक्षा अभियान राघवेन्द्र मिश्रा सहित जिला एवं जनपद स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। कमिश्नर श्री बहुगुणा ने कहा कि पाठशालाओं में छात्र-छात्राओं के पृथक-पृथक शौचालय होने चाहिए और इन शौचालयों की रोजाना साफ-सफाई भी होनी चाहिए। जिससे शालेय स्वच्छता के प्रति छात्र-छात्राओं में हम उदाहरण पेश कर सकें। छात्र-छात्राओं को मध्यान्ह भोजन करने के पूर्व व शौंच से आने के बाद साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित करें। इससे छात्र-छात्राएं स्वच्छता के प्रति जागरूक होंगे। पाठशालाओं में भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि पाठशालाओं में रोजाना मेनू के आधार पर भोजन बनाया जाए। शिक्षक और छात्र-छात्राएं साथ में बैठकर नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन करें। इससे मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता का भी परीक्षण होगा और छात्र-छात्राओं में आत्म सम्मान की भावना जागृत होगी। उन्होने कहा कि पाठशालाओं में बनाये गए शौचालयों का नियमित रूप से उपयोग किया जाए, इन शौचालयों में अन्य सामाग्री न रखी जाए। कार्यशाला में बताया गया कि पानी की उपलब्धता नहीं होने के कारण शौचालयों का उपयोग करने में कठिनाई होती है। कमिश्नर ने कहा कि पीएचई विभाग नल जल प्रदाय योजना के अंतर्गत स्कूलों और आंगनबाडी केन्द्रों में नल कनेक्शन प्रदान करें। जिससे शौचालय में उपयोग के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके। उन्होंने इसके लिए विभागीय अधिकारियों को विस्तृत कार्य योजना बनाने को कहा। छात्र-छात्राओं में सामूहिक जिम्मेदारी विकसित करने के लिए पाठषालाओं में जल का संरक्षण, पौधरोपण, साफ-सफाई एवं स्वच्छता के बारे में बताया जाए। उन्होंने वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से वर्षा के जल को संग्रह करने को कहा, जिससे बाद में इस जल का उपयोग किया जा सके। पाठशालाओं में छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या बढाई जाए और उन्हें बेहतर शिक्षा दी जाए। पांचवी एवं आठवी की कक्षाओं की आगामी वर्ष में बोर्ड परीक्षा होंगी। सभी शिक्षक छात्र-छात्राओं की पढाई पर विशंष ध्यान दें। व्यवहारिक ज्ञान दें और उनमें तर्कक्षमता विकसित करें। कमिश्नर ने कहा कि पाठशालाओं में साईकिल वितरण, गणवेश वितरण, पाठ्य-पुस्तक वितरण का कार्य समय पर पूरा करें। शिक्षक एवं पालकों की नियमित रूप से मीटिंग रखें और पाठशाला को बेहतर बनाने के लिए चर्चा करें।