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छह माह में ही टूट रहे सात जन्मों के रिश्ते

पति पत्नी के रिश्तों की डोर कमजोर होती जा रही है। सात जन्म साथ रहने की कसम खाने वाले छह माह में ही अलग हो रहे हैं। शादी के छह माह बाद ही अब तलाक की नौबत आने लगी हैं। यही कारण है कि पिछले दो साल और तीन माह के दौरान पारिवारिक न्यायालय में 1700 के आसपास प्रकरण पहुंचे।

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छह माह में ही टूट रहे सात जन्मों के रिश्ते Relationships of seven births are breaking in just six months

-दो साल तीन माह में पारिवारिक कोर्ट पहुंचे अलगाव के 1700 प्रकरण

-इन मामलों में दहेज और भरण पोषण के प्रकरण अत्यधिक

-आपसी समझाइश से जोड़ी जा रही रिश्तों की डोर, 2000प्रकरणों का निस्तारण

-अविश्वास, एकल परिवार और आधुनिकता बनी प्यार की मिठास में कड़वाहट

धौलपुर.पति पत्नी के रिश्तों की डोर कमजोर होती जा रही है। सात जन्म साथ रहने की कसम खाने वाले छह माह में ही अलग हो रहे हैं। शादी के छह माह बाद ही अब तलाक की नौबत आने लगी हैं। यही कारण है कि पिछले दो साल और तीन माह के दौरान पारिवारिक न्यायालय में 1700 के आसपास प्रकरण पहुंचे। इसमें भरण पोषण के अलावा सबसे ज्यादा प्रकरण तलाक के हैं।बदलते परिवेश के साथ अब शादी का पवित्र बंधन अब कुछ ही दिनों में टूटने लगा है। दांपत्य जीवन में कड़वाहट आने से पति पत्नी के रिश्ते की डोर कमजोर हो रही है। हर महीने पति पत्नी के ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालात यह हैं पारिवारिक न्यायालय में महीने दर महीने वैवाहिक रिश्तों से जुड़े मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले दो साल और तीन महीनों लगभग 1600 प्रकरण परिवारिक न्यायालय में पहुंचे। जिनमें देहज, तलाक से लेकर भरण पोषण के मामले शमिल हैं। तो वहीं इस अवधि में 2000 के आसपास प्रकरणों का निस्तारण किया गया।

साल बढ़ रहे अलगाव के मामले

समय के साथ पति-पत्नि के दाम्पत्य जीवन में कडुवाहट आती जा रही है। जिसका ही नतीजा है कि धौलपुर के पारिवारिक न्यायालय में साल दर साल अलगाव के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले दो साल और तीन माह में 1600 प्रकरण आए। जिनमें 2023 में 300,2024में 1000 तो इस 2025 में 25मार्च तक 300 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। तो वहीं इन दिनों में2000 के आसपास प्रकरणों का आपसी सहमति से निस्तारण भी किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि आने वाले इन प्रकरणों में सबसे ज्यादा प्रकरण तलाक संबंधी हैं।

बढ़ती दूरियों की वजह

:: भौतिकवाद की अहमियत बढऩे की वजह से नई पीढ़ी रिश्तों को खत्म करने में हिचकिचाती नहीं।

: सहनशीलता कम होने की वजह से पति-पत्नी एक-दूसरे की जरा सी बात को भी बर्दाश्त नहीं कर पाते।

:: पारंपरिक सोच और आधुनिक जीवनशैली में अंतर।

:: बेवफई, धोखाधड़ी और अफेयर।

:: भावनात्मक संबंध जो शारीरिक संबंधों की ओर ले जाते हैं।संदेह और भरोसा होता खत्म

:: पति पत्नी में अविश्वास बढ़ा झगड़े बढ़े।

:: मोबाइल से बढ़ा रिश्तों में अविश्वास।

:: लडक़ी के माता पिता का दखल का बढऩा।

:: युवाओं के रिश्ते टिक नहीं रहे।

:: चरित्र संदेह घर टूटने की बड़ी वजह।

एक्सपर्ट व्यू

संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार का चलन पारिवारिक विघटन का मुख्य कारण बन रहा है। इसके अलावा समय के साथ मोबाइल का बढ़ता हुआ चलन, सोशल मीडिया का अत्यधिक दुरुपयोग और लोगों की बढ़ती हुई महत्वाकांक्षाएं पति-पत्नि के रिश्ते की डोर को कमजोर कर रही है। प्रतिदिन कोर्ट में अलगाव के कई मामले आ रहे हैं।

-अतुल कुमार भार्गव,वरिष्ठ अधिवक्ता

केस 1 शादी के चार साल और एक बच्चा होने के बाद भी पति उसको मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा देता है। पति शराबी होने के कारण उसके साथ आए दिन मारपीट करता है। उसके अवैध संबंध भी हैं। शराब छोडऩे की कहने पर वह झगड़ा करने पर उतारू रहता है। आर्थिक रूप से स्वतंत्र न होने और दो बच्चों की वजह से कभी अलग नहीं हो पाई।

केस 2 ससुरालियों के दहेज की मांग और पति का कटु व्यवहार के कारण पारिवारिक न्यायालय आई महिला तलाक लेने को आई। महिला ने काउंसलर से अपनी आप बीती का जिक्र किया। पति उससे काम का बोल कर दिल्ली जाया करता था। बाद में पता चला कि वह दूसरी महिला के साथ रहता था। ससुराल में महिला को हमेशा प्रताडि़त किया जाता था।