
kota patrika campaign Water Crisis in Hospital
तीनों अस्पतालों में से सिर्फ नए अस्पताल के जिरिएट्रिक ब्लॉक में लगा आरओ सिस्टम ठीक है। इसे छह महीने पहले एक दानदाता ने लगवाया था, लेकिन इसके बाद भी मरीजों और तीमारदारों को साफ पानी पीने को नहीं मिल रहा। वजह है अस्पताल प्रबंधन की मनमानी। जिसके चलते उन्होंने इस आरओ सिस्टम को बंद करके ताला डलवा दिया। जिसके चलते आरओ के साथ लगा वाटर कूलर भी खराब हो गया। वहीं एक आरओ को तो वाटर कूलर से जोड़ा तक नहीं गया है।
अस्पताल प्रबंधन दानदाताओं से आरओ सिस्टम और वाटर कूलर लगवाने में बिल्कुल भी पीछे नहीं रहता, लेकिन बात जब इनके रखरखाव की आती है तो पल्ला झाड़ लिया जाता है। हालत यह है कि आरओ सिस्टम और वाटर कूलर के सालाना मेंटिनेंस तक का इन अस्पतालों में कोई इंतजाम नहीं है। जिसके चलते एक बार यह चीजें खराब होते ही कबाड़ में फेंक दी जाती हैं।
जच्चा-बच्चा का तो ख्याल ही नहीं
जच्चा-बच्चा को शायद साफ पानी की जरूरत ही नहीं पड़ती। तभी तो जेके लॉन जैसे बड़े अस्पताल में एक भी आरओ सिस्टम नहीं लगा हुआ। नतीजन यहां भर्ती होने वाली महिलाओं को गंदा पानी ही पीना पड़ता है। जिसका खामियाजा भुगतते हैं यहां पैदा होने वाले बच्चे। जिन्हें जन्म से ही पीलिया जैसी घातक बीमारियां घेर लेती हैं।
Published on:
16 Apr 2017 10:52 pm
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