
सावन के तीसरे सोमवार पर करें विशिष्ट शिवलिंग की पूजा, अभीष्ट फल की होगी प्राप्ति
सावन माह में शिव पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शस्त्रों के अनुसार शिवलिंग की पूजा का बहुत महत्व माना जाता है। लेकिन शिवलिंग की पूजा कई प्रकार से की जाती है आपकी मनोकामना के अनुसार भी शिवलिंग की पूजा की जाती है। पूजा की विधि अलग-अलग प्रकार की होती है। शास्त्रों में शिवलिंग का पूजन सबसे ज्यादा पुण्यदायी और फलदायी बताया गया है। शिवलिंग की पूजा आपको भय मुक्ति और मोक्ष का माध्यम भी होती है। क्या आप जानते हैं भगवान श्री राम नें भी लंका पर विजय पाने व रावण के साथ युद्ध करने से पहले पार्थिव शिवलिंग की पूजा की थी। श्री राम द्वारा इस पूजा को करने के बाद उन्होंने लंका पर विजय प्राप्त की थी। भगवान श्री राम ही नहीं बल्कि न्याय के देवता शनिदेव ने भी सूर्य से अधिक शक्ति पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान महादेव की पूजा की थी।
ऐसे बनाए जाते हैं पार्थिव शिवलिंग
भगवान शिव की पार्थिव पूजा का विशेष महत्व माना जाता हैं क्योंकि पंचतत्वों में भगवान शिव पृथ्वी तत्व के अधिपति हैं। पार्थिव शिवलिंग एक या दो तोला शुद्ध मिट्टी लेकर बनाए जाते हैं। इस शिवलिंग को अंगूठे की नाप का बनाया जाता है। भोग और मोक्ष देने वाले इस पार्थिव शिवलिंग का पूजन को किसी भी नदी, तालाब के किनारे, शिवालय अथवा किसी भी पवित्र स्थान पर किया जा सकता है।
दो मासों में अधिक पुण्यदायी है पार्थिव पूजन
भगवान शिव को सावन माह बहुत प्रिय होता है, इसलिए शिव अराधना के लिए सावन माह सबसे उत्तम और विशेष रूप से फलदाई माना जाता हैं। इस पावन माह में पार्थिव शिवलिंग निर्माण को दूसरी पूजा के अपेक्षा विशिष्ट माना जाता है, वो इसलिए क्योंकि साधक खुद शिवलिंग का निर्माण करता है और पावन पार्थिव शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर मोक्ष का अधिकारी बनता है।
भय से मुक्ति और मोक्ष का माध्यम होते हैं पार्थिव शिवलिंग
कलयुग में मोक्ष की प्राप्ति और व्यक्ति की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पार्थिव पूजन सबसे उत्तम माना जाता है। पार्थिव पूजन से सभी प्रकार के भय दूर हो जाते हैं। हिंदू धर्म में जितने भी देवताओं की पूजन विधियां है, उसमें पार्थिव पूजन के द्वारा शिव की साधना-अराधना ही सबसे आसान और अभीष्ट फल देने वाली है।
करोड़ों यज्ञों के बराबर फलदाई होता है पार्थिव पूजन
शास्त्रों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से करोड़ों यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। भगवान शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं और उनकी साधना का यह सबसे सरल-सहज और पावन माध्यम है। जिसके पास कुछ भी नहीं वह शुद्ध मिट्टी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर महज बेल पत्र, शमी पत्र आदि अर्पित कर उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है।
Published on:
12 Aug 2018 01:35 pm
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