
पशु विक्रय का व्यापार करने वाले परेशान, कारीगर समाज को अब घर चलाना मुश्किल
देवास/चापड़ा। कोराना संकट में पशु विक्रय का व्यापार करने वाले भी परेशान हैं। पशु विक्रय व्यापार बंद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। नगर चापड़ा में वर्षों से कारीगर समाज के लगभग 15 से 20 परिवार निवास करते हैं जिनका मूल्य व्यवसाय पशु विक्रय का रहा है और इसी व्यवसाय के सहारे अपना परिवार चलाते हैं, लेकिन लाकडाउन के कारण क्षेत्र के सभी पशु बाजार बंद हो जाने के कारण सारा व्यापार ठप पड़ा है। जिसके कारण परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
कारीगर समाज के लोग इसी व्यवसाय पर निर्भर रहते हैं। सामान्य दिनों में पशु विक्रय का व्यापार अच्छा चलता रहता है जिससे परिवार चलाने में कोई परेशानी नहीं होती है और आर्थिक स्थिति भी ठीक रहती है। कारीगर समाज के अंतर सिंह कारीगर ने बताया कि चापड़ा के श्यामनगर में लगभग 15 से 20 परिवार निवास कर रहे हैं जो सभी पशु विक्रय का व्यापार अपने अपने स्तर पर करते रहते हैं। जिससे कि वह आसानी से अपने परिवार को चला सके लेकिन लाकडाउन के कारण सारे कामकाज बंद है, सभी लोग घर पर ही बैठे हैं जिसके कारण परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
गांव-गांव जाकर बेच रहे प्लास्टिक के टप, तगारी
जितेंद्र कारीगर ने बताया कि सभी लोग पशु विक्रय का व्यापार करते हैं लेकिन इन दिनों पूरा व्यापार बंद है जिसके कारण गांव-गांव पहुंचकर प्लास्टिक के टप, तगारी बेचने का काम कर रहे हैं जिससे कि दो वक्त की रोटी कमा सकें लेकिन यह काम भी ठीक से नहीं चल रहा है, आगामी कुछ ही दिनों में बारिश आने वाली है जिसमें और भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कालू कारीगर ने बताया कि पशु विक्रय कर हमारी मजदूरी हम निकाल लेते थे। लेकिन विक्रय का काम बंद होने के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर के समाज सेवकों द्वारा एक दो बार राशन उपलब्ध कराया था, लेकिन इतने लंबे समय तक परिवारों में सदस्य अधिक होने के कारण वह भी कुछ ही दिनों में खत्म होने के बाद अब बड़ी मुश्किल से परिवार का पेट भर पा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से खास मदद हमें नहीं मिल पाई है।
एक भी नेता हालाचाल पूछने नहीं आया
कारीगर समाज के सभी लोग अपने अपने घरों पर बेरोजगार बनकर बैठेने पर मजबूर हैं। महिलाएं गांव में पहुंचकर प्लास्टिक के टप तगारी बेचने जाती हैं उसी में जो थोड़ा बहुत मिल जाता है, उसी से पेट भर रहे हैं। कालू कारीगर ने बताया कि चुनाव के दिनों में सभी लोग वोट मांगने के लिए घर घर आते हैं लेकिन इस मुसीबत के दौर में एक भी नेता नजर नहीं आ रहा है सबसे बड़ी बात यह है कि इतने लंबे समय से जारी लॉकडाउन के बावजूद भी क्षेत्र के विधायक, सांसद एक बार भी गरीब लोगों की सुध लेने हमारे बीच नहीं पहुंचे हैं। कारीगर समाज के लोगों का पुश्तैनी व्यापार यही रहा है यह लोग बाजार से पशु खरीद कर किसानों को बेचते हैं एवं किसानों से खरीद कर बाजार में बेचते हैं जिससे किसानों को भी आसानी से बैल.भैंस, गाय जैसे अन्य पशु मिल जाते हैं तो उसी के माध्यम से इन्हें भी रोजगार की तरह मजदूरी मिल जाती है लेकिन वर्तमान में क्षेत्र में व आसपास के क्षेत्रों में संचालित पशु बाजार पूर्ण रूप से बंद होने के कारण पशुओं का विक्रय व्यापार बंद है जिससे आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है।
Published on:
11 May 2020 05:53 pm
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