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दन्तेवाड़ा में है पाम प्रजाति का एक ऐसा दुर्लभ पेड़ जिसकी 10 शाखाएं है, कृषि वैज्ञानिक भी है अचरज में

पाम प्रजाति के पेड़ में ऐसा होना असामान्य बातेनेटिक म्युटेशन को वजह मान रहे कृषि वैज्ञानिक

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दन्तेवाड़ा में है पाम प्रजाति का एक ऐसा दुर्लभ पेड़ जिसकी 10 शाखाएं है, कृषि वैज्ञानिक भी है अचरज में

दन्तेवाड़ा में है पाम प्रजाति का एक ऐसा दुर्लभ पेड़ जिसकी 10 शाखाएं है, कृषि वैज्ञानिक भी है अचरज में

शैलेंद्र ठाकुर/ दंतेवाड़ा. बस्तर में आदिवासियों के जनजीवन से जुड़े सल्फी को बेहद अहम माना गया है। यहां इसे सामाजिक- धार्मिक संस्कारों से जोडक़र देखा जाता रहा है। इसके रस का न सिर्फ रसास्वादन किया जाता है बल्कि इसे बेचकर वे अच्छी खासी आमदनी भी कमा लेते हैं। इसके रस को बस्तर बीयर के नाम से भी अन्य लोग पहचानते हैं।

अब तक आपने सल्फ ी की एकमात्र शाखा वाले पेड़ के बारे में सुना व इसे देखा होगा, लेकिन जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा के बालूद मंझारपारा में सल्फी का एक ऐसा दुर्लभ पेड़ है जिसमें एक- दो नहीं बल्कि 10 शाखाएं निकली हुई हैं, जो कुदरत का करिश्मा है। इस पेड़ के बारे में सुनकर कृषि वैज्ञानिक भी हैरत में पड़ गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पाम वेरायटी के पेड़ में इस तरह की शाखाओं का निकलना आश्चर्यजनक है। पत्रिका ने यह दुर्लभ पेड़ पाठकों के लिए खोज निकाला है। मंझारपारा के ग्रामीण किसान प्रेमसिंह ठाकुर के आंगन में यह पेड़ खड़ा है। प्रेमसिंह बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी बेटी ललिता ने 20 साल पहले कहीं से सल्फी का यह पौधा लाकर रोपा था। तब किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि यह पौधा आगे चलकर इस तरह का अनूठा पेड़ बनेगा। इस पेड़ से तीन बार अलग- अलग घेड़ा निकला, जिसे काटकर रस निकाला गया। इसके बाद तो पेड़ के मुख्य तने से अलग- जगहों से कुल 10 शाखाएं निकलती चली गईं। हर शाखा में फूल वाला घेड़ा निकला और बीजों से यह पेड़ लद गया। इससे घबराकर उन्होंने बाद में सल्फी रस निकालना छोड़ दिया।

कृषि वैज्ञानिक का यह कहना है
इस पेड़ के बारे में शहीद शासकीय गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय कुम्हरावंड के कृषि वैज्ञानिक डॉ आदिकांत प्रधान का कहना है कि सल्फी का पेड़ पाम फैमिली का है। इस फैमिली के पेड़ों की विशेषता यह कि इनमें शाखाएं नहीं निकलती हैं। एक ही स्टेम होता है। सल्फ ी पेड़ में शाखाएं होने का मामला पहली बार सुन रहे हैं। ऐसा होने की वजह जेनेटिक म्यूटेशन हो सकती है। इस पर शोध की जरूरत है।

पिलाहारी सल्फी के नाम से मशहूर
सल्फी के इस पेड़ को ग्रामीणों ने हल्बी बोली में पिलाहारी सल्फ ी यानि बच्चों वाली सल्फ ी पेड़ का नाम दिया है। इसे देखकर लोग आश्चर्य जताते हैं। प्रेम सिंह ठाकुर बताते हैं कि करीब 50 साल पहले उन्होंने बचपन में ऐसा ही एक पेड़ गांव के ही कुआंपारा में अपने रिश्तेदार देवचरण के घर में देखा थाए जो करीब 3 दशक पहले सूख गया।

फैक्ट फाइल
सल्फी का वानस्पतिक नाम: कैरियोटा यूरेन्स, लैटिन नाम: फि शटेल पाम, स्थानीय नाम: सल्फ ी (हिंदी) व हल्बी बोली में (गोरगा ) इसके रस में एल्कोहल की मात्रा होने की वजह से नशीला होता है। जिसकी वजह से इसे बस्तर बियर के नाम से भी जाना जाता है। एक पेड़ 18 साल की उम्र से रस देने लगता है।