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नई पहचान: द्रविड़ शैली में बनाया जाएगा दंतेवाड़ा का विशाल प्रवेश द्वार, दिखेगी दंतेश्वरी मंदिर की झलक

Grand entrance gate in Dantewada: जिले में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अब जिले में विशाल प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाएगा, जो क्षेत्र को एक नई पहचान दिलाएगा। यह विशाल प्रवेश द्वार दक्षिण भारत के द्रविड़ शैली में बनेगा। लिखा होगा मां दंतेश्वरी की पावन धरा दंतेवाड़ा में आपका हार्दिक अभिनंदन है।

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Grand entrance gate in Dantewada: जिले में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अब जिले में विशाल प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाएगा, जो क्षेत्र को एक नई पहचान दिलाएगा। यह विशाल प्रवेश द्वार दक्षिण भारत के द्रविड़ शैली में बनेगा। लिखा होगा मां दंतेश्वरी की पावन धरा दंतेवाड़ा में आपका हार्दिक अभिनंदन है।

गीदम-दंतेवाड़ा राष्ट्रीय मार्ग 163- ए पर बनने वाले प्रस्तावित प्रवेश द्वार की लंबाई 18 मीटर, चौड़ाई 3.5 मीटर, ऊंचाई 12 मीटर होगी। प्रवेश द्वारों पर लिखा होगा मां दंतेश्वरी की पावन धरा दंतेवाड़ा में आपका हार्दिक अभिनंदन है। दर्शनार्थी गीदम से आगे बढ़ते ही भक्तिमय वातावरण के बीच मां का दर्शन करेंगे।

ये होगी खासियत :
दंतेवाड़ा शहर के मुख्य द्वार पर बनने वाला यह प्रवेश द्वार दक्षिण भारत के द्रविड़ शैली में बनाया जाएगा। इस प्रस्तावित प्रवेश द्वार के मध्य टॉप पर गुम्बद बना हुआ होगा। प्रवेश द्वार के मध्य में दंतेश्वरी मां के परिसर में लगे गरुड़ स्तम्भ की प्रतिकृति वाली प्रतिमा लगाई जाएगी, जिसे काले पत्थरों से बनाया जाएगा। इसी तरह दंतेश्वरी मन्दिर में गर्भगृह के सामने पास स्थापित द्वारपाल की प्रतिकृति वाली मूर्ति भी दोनों तरफ होगी। मंदिर से प्राप्त तत्वों के माध्यम से मां दंतेश्वरी के मंदिर के सदृश बनाया गया है। मंदिर प्रेरित डिजाइन घटकों के उपयोग के माध्यम से प्रवेश द्वार का मुख्य उद्देश्य मां दंतेश्वरी को चित्रित करना है।

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लाल पत्थरों से निर्मित होगा ऊपरी हिस्सा
इस प्रवेश द्वार का ऊपरी हिस्सा लाल पत्थरों से निर्मित होगा। दोनों स्तंभों के उपर शंख की प्रतिकृति बनाई जाएगी। इसके नीचे की संरचना जालीनुमा होगी दोनो तरफ घंटी सदृश्य आकृति होगी। यानी प्रवेश द्वार से ही सैलानियों के मन में आस्था का भाव जागृत होगा और उन्हें महसूस होगा कि वे एक धर्म नगरी में प्रवेश कर रहें है।

यह प्रवेश द्वार जिले के पर्यटन, धार्मिक स्वरूप और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए जिले को एक नई पहचान देगा और इनक्रेडिबल दंतेवाड़ा के संकल्प को मजबूत करेगा।