
CG News: दंतेवाड़ा जिले में ब्लॉक स्तरीय दो दिवसीय ‘बस्तर पंडुम’ का समापन बुधवार को हुआ। समापन समारोह में जनप्रतिनिधियों ने इस आयोजन को बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर पंडुम’ पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प और आदिवासी रीति-रिवाजों को एक मंच प्रदान करता है, जिससे स्थानीय संस्कृति को नई पहचान मिलती है।
इस महोत्सव में विभिन्न जनजातीय समूहों ने अपनी कला और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया, जिससे न केवल सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ी बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिला। दंतेवाड़ा जिले के चारों ब्लॉकों में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों, जनजातीय समुदायों और सांस्कृतिक प्रेमियों का अपार उत्साह देखने को मिला।
‘बस्तर पंडुम’ न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का प्रयास है, बल्कि यह सामाजिक एकता और पारंपरिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक सशक्त मंच भी प्रदान करता है। इस उत्सव में जिले के सभी विकासखंडों से करीब 25 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
लोकगीत श्रृंखला में घोटुल पाटा, लिंगोपेन, चौतपरब, रिलो, लेजा, कोटनी, गोपल्ला, जगारगीत, धनकुल, मरमपाटा, हुलकी पाटा आदि की शानदार प्रस्तुतियां हुईं। जनजातीय नाट्य विधा में ‘माओपाटा’ और ‘भतरा नाट्य’ प्रस्तुत किए गए, जिनका मूल्यांकन लय, ताल, वाद्ययंत्र, अभिनय, पटकथा और संवाद के आधार पर किया गया।
घडवा, माटी कला, काष्ठ, पत्ता, ढोकरा, लौह प्रस्तर, गोदना, भित्तीचित्र, शीशल, कोड़ी शिल्प, बांस की कंघी, गीकी (चटाई), घास के दानों की माला आदि का प्रदर्शनी में प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में विजेताओं को पुरस्कृत कर उनकी प्रतिभा को समानित किया गया।
आगामी कार्यक्रम: ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताओं के सफल समापन के बाद अब 21 मार्च को जिला स्तरीय ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जिलेभर से चयनित प्रतिभागी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
धनकुल, ढोल, चिटकुल, तोड़ी, अकुम, बवासी, तिरडुड्डी, झाब, मांदर, मृदंग, बिरिया ढोल, सारंगी, गुदुम, मोहरी, सुलुङ, मुडाबाजा और चिकारा जैसे वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को संयोजन, पारंगता और पारंपरिकता के आधार पर अंक प्रदान किए गए।
CG News: साल्फी, ताड़ी, छिंदरस, हंडिया, पेज, कोसरा, माड़िया पेज, चापड़ा चटनी (चींटी की चटनी), अमारी शरबत और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की विशेष प्रस्तुति रही। इनके स्वाद, बनाने की विधि और प्रस्तुतीकरण के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया।
‘बस्तर पंडुम 2025’ के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें प्रमुख रूप से जनजातीय नृत्य, लोकगीत, नाट्यशैली, वाद्य यंत्र प्रदर्शन, पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण, जनजातीय शिल्प और चित्रकला, तथा पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन शामिल रहा।
लुरकी, करधन, सुतिया, पैरी, बाहूंटा, बिछिया, ऐंठी, बंधा, फुली, धमेल, नांगमोरी, खोचनी, मुंदरी, सुर्रा, सुता, पटा, पुतरी, द्वार, नकबेसर जैसे आभूषणों के प्रदर्शन में एकरूपता, आकर्षण और पारंपरिकता को महत्व दिया गया।
Published on:
20 Mar 2025 02:14 pm
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