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Nohleshwar Temple: एक हजार साल पहले बनाई गई थी शिव की अनोखी मूर्ति

Nohleshwar Temple (Nohta). 10वीं शताब्दी में चंदेलों ने बनवाई थी शिव की मूर्ति

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दमोह

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Manish Geete

Jul 17, 2022

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Nohleshwar Temple (Nohta). मप्र का इतिहास समृद्धशाली है। हर शहर का अपना गौरवमयी इतिहास है। इसी तरह का इतिहास दमोह रोड पर स्थित नोहटा का भी है। तकरीबन सीएडी 950-960 से 10वीं शताब्दी के बीच चंदेलों द्वारा निर्मित भगवान शिव के तीर्थ के लिए यह स्थान जाना जाता था। नोहटा जबलपुर से 81 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एक अन्य दृश्य निर्माण के लिए कल्चुरि राजा अवनि वर्मा का समर्थन करता है, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इस मंदिर को कलचुरी राजवंश के दौरान का बताया गया है।

शिव मंदिर है अद्वितीय

परिसर में शिवमंदिर की प्रतिमा अद्वितीय है। शिव की मोहक प्रतिमा लोगों को लुभाती है। इतिहास के जानकार हेनरी कूसेंस ने 1892-1894 के दौरान बर्बाद हुए मंदिरों की तस्वीरें लीं थीं। उनके कलेक्शन में दमोह में 13 मील दक्षिण पूर्व में अन्य पुराने मंदिरों की संख्या को भी शामिल किया गया था।

अब जर्जर स्थिति में है मंदिर

नोहटा गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में अब तक यह मंदिर ख्याति का केन्द्र माना जाता है। मंदिर का निर्माण पूरे पत्थरों से हुआ है। अब कहीं.कहीं इसकी स्थिति जर्जर हो रही है। काले रंग का यहां का शिवलिंग बहुत की आवश्यक है। सावन के दिनों और शिवरात्रि के समय यहां का दृश्य काफी मनोरम हो जाता है। शिवलिंग पर यहां चिमटे चढ़ाने की प्रथा है।