
दतिया. तमाम बद्इंतजामी के बीच रविवार को दतिया जनपद की ओर सेआयोजित सामूहिक विवाह समारोह में ५४१ जोड़ों के विवाह संपन्न हुए। शासन ने व्यवस्थाओं के लिए १६ लाख रुपए दिए थे मगर दुल्हनों को खुले में कपड़े बदलने पड़े। वर-वधु के संग आए लोग सड़क पर बैठकर भोजन करते दिखे। आयोजको ने बैठने के लिए प्लास्टिक की कुर्सियां मंगाई लेकिन वो भी कम पड़ गईं । लिहाजा कई दूल्हा-दुल्हनों को जमीन पर बैैठना पड़ा। खाने - पीने में भी बदइंतजामी हावी रही और आगंतुकों को जमीन पर धूप में बैठ कर भोजन करना पड़ा। जबकि हरेक जोड़े के लिए शासन की ओर से तीन हजार रुपए केवल व्यवस्थाओं पर खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश शासन के निर्देश पर रविवार को स्थानीय कृषि उपज मंडी परिसर में सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। इसमें ५३७ जोड़ों के विवाह एवं चार जोड़ों के निकाह कराए गए।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह बुंदेला, जनपद अध्यक्ष रीता सतीश यादव, उपाध्यक्ष कमलू चौबे, जीतू कमरिया, धीरू दांगी, भांडेर नगर परिषद अध्यक्ष बल्ले रावत आदि जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारी मौजूद रहे।
ताकत झोंकी व्यवस्थाएं फेल
समारोह के लिए कई दिनों से व्यवस्थाएं की जा रहीं थीं। अधिकारी - कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने अपनी सारी ताकत झोंक दी थी। बावजूद इसके सामूहिक विवाह में तमाम अव्ययवस्थाएं देखने को मिलीं। हालांकि गांव से आए भोले भाले लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और वे सब्जी, पूड़ी एवं बूंदी में ही खुश रहे। शासन की ओर से हरेक जोड़े के विवाह की व्यवस्था के लिए तीन हजार रुपए खर्च करने का प्रावधान है, लेकिन व्यवस्थाओं से यह लगा कि एक जोड़े पर एक हजार रुपए भी खर्च नहीं किया गया। इसकी बेहतर मिसाल यह हैकि जोड़ों को बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था नहीं हो सकी और न ही दूल्हा - दुल्हनों को एकांत में जगह दी जा सकी। हालांकि आयोजकों का दावा है कि हमने चेंजिंग रूम बनाए थे लेकिन उनमें जोड़े नहीं गए।
तेज धूप में सड़क पर खाया खाना
कृषि उपज मंडी में जगह - जगह गंदगी है। जगह - जगह पानी फैला हुआ है, गोबर पड़ा है। बावजूद इसके भोजन के दौरान जोड़ों और परिजनों के लिए पर्याप्त छाया की व्यवस्था नहीं की गई। कुछ लोगों ने भले ही टीन शेड के नीचे खाना खाया, लेकिन अधिकतर लोगों को देखा गया कि वे तेज धूप में सड़क पर बैठने को मजबूर थे। इतना ही नहीं जो खाना उन्हें दिया गया उसको न तो ढंकने की व्यवस्था थी और न ही धूल से बचाने का कोई इंतजाम। देखा गया कि जहां लोग खाना - खा रहे हैं वहीं जानवर भी बिचरण कर रहे हैं। विवाह के लिए जो पंडाल लगाया था उसमें गर्मी से बचने के लिए ३५ डिग्री सेल्सियस करीब तापमान होने के बाद भी कूलर - पंखों की व्यवस्था नहीं की गईथी। हालांकि पंखे की व्यवस्था मंचासीन अतिथियों के लिए की गई थी।
इसी माह हो चुका इन जोड़ों का विवाह
सामूहिक विवाह समारोह में पहुंची पत्रिका टीम ने पाया कि ग्वालियर निवासी अमित पटैल और पिटसूरा गांव निवासी कविता की शादी पिछले नौ मार्च को हो चुकी है। लेकिन वे शासन द्वारा दी जा रही राशि के लालच में दोबारा शादी करने पहुंच गए। दुल्हन की मांग भरी हुईथी। वहीं सेरसा निवासी बृजेश वर्माऔर खटोला गांव निवासी छाया की शादी भी छह मार्च को हो चुकी थी। यह जोड़ा भी सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुआ।
यह इंतजाम किए
वर-वधु को तैयार करने के लिए चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गईथी। अच्छा खाना दिया गया अगर कोई अव्यवस्था रह गईहो तो यह बड़ा आयोजन था थोड़ी बहुत कमी तो रह जाती है।
हर्षकुमार खरे , सीईओ जनपद दतिया
Published on:
19 Mar 2018 09:18 pm
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