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Churu History: चूरू शहर के आठ योद्धाओं को लड़ते हुए देखकर बीकानेर फौज भी हट गई थी पीछे

बीकानेर के सामने चूरू की सेना कम थी, लेकिन सिपाहियों में जोश बीकानेर की सेना के मुकाबले काफी ज्यादा था। बीकानेर की सेना ने चूरू को चारों तरफ से घेर लिया। दोनों तरफ से गोले-बारूद चल रहे थे, बाद में बीकानेर की सेना किले की तरफ आ गई थी।

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चूरू

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manish mishra

Oct 21, 2022

Churu History: चूरू शहर के आठ योद्धाओं को लड़ते हुए देखकर बीकानेर फौज भी हट गई थी पीछे

Churu History: चूरू शहर के आठ योद्धाओं को लड़ते हुए देखकर बीकानेर फौज भी हट गई थी पीछे

मनीष मिश्रा
चूरू. जब-जब किसी आक्रमणकारी ने चूरू जिले पर कब्जा करने की कोशिश की, यहां के वीर जांबाजों ने प्राणों की परवाह नहीं करते हुए अदम्य साहस के चलते दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए। आज भी नई पीढि़यां उनके किस्से सुनती है तो जोश में भर जाती है। जब कोई घर में मांगलिक कार्य होता है तो उन जांबाजों को जरूर याद किया जाता है। चूरू शहर में आज भी वीर युद्धा जिन्हें स्थानीय भाषा में झुझार महाराज कहा जाता है, जिनके थान मौजूद है। जिन्हें देखकर लोगों के श्रद्धा से शीश झुक जाया करते हैं।

किस्सा रियासत कालीन समय का है, उस समय बीकानेर रियासत बड़ी रियासतों में से थी। जिसका सैन्य बल भी बहुत ज्यादा था, बीकानेर के तत्कालीन शासक सूरतसिंह साम्राज्य का विस्तार करना चाहते थे। सन 1814 में में उन्होंने बहुत बड़ी सेना के साथ चूरू पर चढ़ाई करने के लिए भेज दिया था। बीकानेर के सामने चूरू की सेना कम थी, लेकिन सिपाहियों में जोश बीकानेर की सेना के मुकाबले काफी ज्यादा था। बीकानेर की सेना ने चूरू को चारों तरफ से घेर लिया। दोनों तरफ से गोले-बारूद चल रहे थे, बाद में बीकानेर की सेना किले की तरफ आ गई थी।

सेना को पीछे हटने पर किया मजबूर

शहर के बुजुर्ग बताते है कि उस समय चूरू के तत्कालीन शासक शिवसिंह ने किले की रक्षा के लिए तैनात आठ बेहतरीन योद्धाओं को युद्ध के लिए भेजा था। जानकार बताते है कि वीर सैनिकों ने बीकानेर की सेना के सामने अदम्य साहस से लडे़ थे। युद्ध के दौरान आठों सैनिक में से किसी का हाथ-पैर व धड़ भी अलग हो गए थे। लेकिन इसके बावजूद भी लड़ते रहे, उनके पराक्रम को देखकर बीकानेर की सेना के होश उड़ गए थे। इससे बीकानेर की सेना में एकबारगी हड़कम्प मच गया था। काफी देर तक लडते हुए वीर गति को प्राप्त हो गए। उनकी याद में चूरू शहर में थान बनाए गए, जिन्हें झुझार महाराज कहा जाता है।

पुलिसकर्मी जाते है हाथ जोड़कर

लोगों ने बताया कि शहर में अलग-अलग जगहों पर इनके थान मौजूद हैं। एक थान कोतवाली थाने में मौजूद है, आज भी किसी बड़ी वारदात होने के बाद पुलिसकर्मी जब जांच के लिए जाते हैं तो पहले झुंझार महाराज के थान पर मत्था टेकते हैं। पुलिसकर्मियों का मानना है कि झुंझार महाराज उनकी मदद करते हैं, उन्हें रास्ता मिलता है। मान्यता है कि थान पर प्रार्थना करने से कई उलझे मामले है सुलझे हैं। यहां पर अखंड ज्योत हमेशा जलती है। इसके अलावा शहर में कोई भी नवजोड़ा आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। वहीं मांगलिक कार्य में भी झुझार महाराज को याद किया जाता है। प्रतिदिन 50 से अधिक लोग थान पर दर्शनों के िलए आते हैं।