मनीष मिश्रा
चूरू. अपनी दिव्यांग बहन को शिक्षित बनाने के लिए उसके छोटे भाई ने कोई कसर नहीं छोड़ी, उससे उम्र में चार बरस छोटे भाई ने पीठ पर अपने बैग की जगह अपनी बड़ी बहन को उठाया। भाई -बहन की ये संघर्ष की कहानी सभी के लिए मिसाल है। शहर के वार्ड 26 की अफसाना नाज जन्मजात ही दिव्यांग पैदा हुई। दोनों भाई बहनों के इस परिवार को तब झटका लगा जब अचानक उनके सिर से उनके पिता का साया उठ गया। जैसे तैसे संघर्ष कर मां ने उनका पालन -पोषण किया। आस पड़ोस के बच्चों को स्कूल जाते देख अफसाना नाज के भी मन मे स्कूल जाने का ख्याल आया लेकिन दिव्यंगता उसके आड़े आई। और बेबसी के आगे उसने स्कूल जाने की तमन्ना छोड़ दी थी। लेकिन छोटे भाई सद्दाम ने बड़ी बहन की इस तमन्ना को पूरा करने के लिए अपने स्कूल बैग की जगह अपनी बड़ी बहन को पीठ पर उठाकर अपने साथ स्कूल ले जाकर दिव्यांग बहन के सपने को पूरा किया। अफसाना ने बताया कि उसे व्हील चेयर पर बैठने से डर लगता था, ऐसे में भाई ही उसे स्कूल पीठ पर बैठाकर लाता व ले जाता था।
बीमारी के कारण 13 साल नहीं की पढ़ाई
33 वर्षीय दिव्यांग अफसाना नाज बताती है कि उसने 12वीं के बाद बीमारी के चलते पढ़ाई छोड़ दी थी। लेकिन छोटे भाई सद्दाम ने वापिस उसे प्रेरित कर उसका कॉलेज का फार्म भरवाया और परीक्षा दिलाने के लिए उसे पीठ पर उठा लेकर जाता। अफसाना नाज फिलहाल बीए सेकेंड ईयर की स्वयंपाठी छात्रा है, वे आरएससी आईटी का कोर्स कर चुकी है। अफसाना अपने दोनों हाथों और पैरों से दिव्यांग है ऐसे में उसकी दैनिक दिनचर्या में भी उसकी मां और भाई साथ देते हैं। अफसाना ने बताया कि शुरुआत में कलम पकड़ने में उसे काफी परेशानी होती थी लेकिन अब वह आराम से लिख और पढ़ सकती है। बहन अफसाना नाज और भाई सद्दाम के अटूट प्रेम के चर्चे अक्सर शहर में होते हैं. लोगो ने बताया कि शादी समारोह हो या कोई कार्यक्रम सद्दाम अपनी बहन पीठ पर बैठाकर साथ में लाता है। अफसाना भी अपने भाई के साथ ही कार्यक्रमों में शरीक होती है।