
अप्रेल में सूरज की वक्र दृष्टि से पेयजल स्रोतों के जलस्तर में कमी आ गई है। इससे जिले में पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है। इसे देखते हुए कलेक्टर ने छिंदवाड़ा जिले को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है। अब नलकूप खनन से पहले एसडीएम की अनुमति लेनी होगी।
कलेक्टर ने जारी आदेश में कहा कि इस वर्ष वर्षाकाल में जिले में सामान्य वर्षा हुई है। जिले के पेयजल स्रोतों के जलस्तर में कमी आई है। पेयजल स्रोतों के जलस्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। पेयजल संकट की स्थिति को देखते हुए सार्वजनिक जल स्रोतों के समीप निर्माण किए जा रहे निजी जल स्रोतों जैसे नलकूप खनन, कुआं आदि पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। जनहित में पेयजल एवं अन्य निस्तार समस्याओं को देखते हुए छिंदवाड़ा जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
कलेक्टर ने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के जल अभाव ग्रस्त क्षेत्र में किसी भी शासकीय भूमि पर स्थित जल स्रोतों में पेयजल तथा घरेलू प्रयोजनों को छोडकऱ अन्य किसी प्रयोजन में जल उपयोग नहीं करेगा। छिंदवाड़ा जिले के नदी, नालों, स्टॉपडैम, सार्वजनिक कुओं तथा अन्य जल स्रोतों का उपयोग केवल पेयजल एवं घरेलू प्रयोजन करने तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया गया है। शासकीय नलकूप से 150 मीटर के दायरे के अंतर्गत किसी नवीन नलकूप खनन पूर्णत: प्रतिबंधित है। निजी नलकूप खनन की गहराई खनित शासकीय नलकूप से कम रहेगी।
छिंदवाड़ा जिले के जल अभाव ग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा निजी ठेकेदार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पूर्व अनुज्ञा प्राप्त किए बिना नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेगा। जल अभाव ग्रस्त क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को प्राधिकृत किया गया है। एसडीएम से अनुमति लेने से पूर्व संबंधित क्षेत्र के सहायक यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से अभिमत/अनुशंसा प्राप्त करेंगे।
जल अभावग्रस्त क्षेत्र में वैकल्पिक रूप से दूसरा कोई सार्वजनिक पेयजल स्रोत उपलब्ध नहीं है तो एसडीएम उस क्षेत्र के निजी पेयजल स्रोत को पेयजल परिरक्षण संशोधित अधिनियम 2002" के सेक्शन 4 (ए) तथा 4 (बी) के प्रावधानों के अधीन अधिग्रहण निश्चित अवधि में कर सकेंगे। इसका उल्लंघन पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी।
Published on:
05 Apr 2025 11:16 am
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