16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तमिलनाडु में मद्रास आई के मामलों में आठ गुना वृद्धि, रोजाना आ रहे 4000 मामले

चेन्नई में रोजाना 80-100 लोग इसके चपेट में आ रहे है। रोजाना मामलों में वृद्धि को देखते हुए तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं।

2 min read
Google source verification
तमिलनाडु में मद्रास आई के मामलों में आठ गुना वृद्धि, रोजाना आ रहे 4000 मामले

तमिलनाडु में मद्रास आई के मामलों में आठ गुना वृद्धि, रोजाना आ रहे 4000 मामले

चेन्नई.

तमिलनाडु के चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री एमए सुब्रमण्यन ने सोमवार को कहा कि मानसून शुरू होने के साथ ही नेत्रश्लेष्मलाशोथ या मद्रास आई के मामलों में आठ गुना वृद्धि हो गई है। मंत्री सुब्रमण्यन ने कहा कि राज्यभर में प्रतिदिन 4000-4500 लोग नेत्रश्लेष्मलाशोथ या मद्रास आई से प्रभावित हो रहे है। वहीं चेन्नई में रोजाना 80-100 लोग इसके चपेट में आ रहे है। रोजाना मामलों में वृद्धि को देखते हुए तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं।

सोमवार को क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान और सरकारी नेत्र चिकित्सा अस्पताल में नेत्रश्लेष्मलाशोथ उपचार वार्ड का निरीक्षण करने के बाद मंत्री ने कहा, पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत के बाद से मद्रास आई से पीडि़त लगभग 1.50 लाख लोगों का राज्य में नेत्रश्लेष्मलाशोथ के लिए इलाज किया गया। नेत्रश्लेष्मलाशोथ के लिए इलाज किए गए किसी भी व्यक्ति को अब तक जटिलताएं नहीं हुई हैं।

पहले 10 अब 100 मरीज आते है
एगमोर में क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान में नवम्बर के पहले सप्ताह में आउट पेशेंट वार्ड में कम से कम दस मरीज आते थे, अब एक दिन में 80-100 मामले आ रहे हैं। महानगर के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इसी तरह के लक्षणों वाले लोग आते हैं। नेत्रश्लेष्मलाशोथ में खुजली और किरकिरा एहसास के साथ लाल आंख की स्थिति होती है। कंजंक्टिवाइटिस का पता चलने पर आंखों से डिस्चार्ज भी हो जाता है। कंजंक्टिवा में सूजन के कारण आंखें लाल दिखाई देती हैं और कंजंक्टिवा में छोटी रक्त वाहिकाओं के कारण आंख का सफेद भाग लाल हो जाता है।

सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें
सरकारी नेत्र अस्पताल का दौरा करने के बाद सुब्रमण्यन ने कहा कि अस्पतालों को संक्रमण रोकने के लिए सामाजिक दूरी के मानदंडों को बनाए रखने के लिए कहा गया। राज्य के सभी अस्पतालों को बीमारी के बारे में जागरूकता संदेश प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। यह बीमारी अत्यधिक संक्रामक है और इसके प्रसार को रोकने का एकमात्र तरीका संक्रमित लोगों को अलग-थलग करना है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से दृष्टि प्रभावित नहीं होगी। संक्रमित बच्चों को निर्देश दिया जाता है कि वे स्कूल न जाएं और ऑफिस जाने वाले लोग काम से छुट्टी ले लें।

क्या कहते है डॉक्टर-
डॉक्टरों का कहना है कि माध्यमिक संक्रमण वाले लोगों को एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं, ज्यादातर मामलों में डॉक्टर चाहते हैं कि मरीज अलग-थलग रहें और पर्याप्त आराम करें। संक्रमित होने पर आंख को बार बार छूना या रगडऩे से बचें।