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नौ साल से ट्रैफिक पार्क का इंतजार,फाइलों में घूम रही योजना

पर्यटन नगरी बूंदी को नौ साल से ट्रैफिक पार्क का इंतजार बना हुआ है। अधिकारियों की उदासीनता के चलते योजना फाइलों में घुम रही है। हालांकि भूमि चिह्नित है, चारदीवारी भी हो गई है, लेकिन विद्युत व पानी का कनेक्शन एवं गेट नहीं लगने से मामला अटका पड़ा है।

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नौ साल से ट्रैफिक पार्क का इंतजार,फाइलों में घूम रही योजना

बूंदी. ट्रैफिक पार्क के लिए चिह्नित भूमि। 

बूंदी.पर्यटन नगरी बूंदी को नौ साल से ट्रैफिक पार्क का इंतजार बना हुआ है। अधिकारियों की उदासीनता के चलते योजना फाइलों में घुम रही है। हालांकि भूमि चिह्नित है, चारदीवारी भी हो गई है, लेकिन विद्युत व पानी का कनेक्शन एवं गेट नहीं लगने से मामला अटका पड़ा है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में लोगों को ट्रैफिक पार्क की सौगात मिल चुकी है, लेकिन बूंदी इससे अछूता नजर आ रहा है। जबकि अधिकारियों द्वारा चार बार भूमि बदलने के बाद यहां बीबनवा रोड पर तीन साल पूर्व जगह चिह्नित की गई थी,लेकिन अब तक निर्माण नहीं होने से शहरवासी यातायात नियमों से अंजान है।

इस पार्क के निर्माण पर करीब 20 से 25 लाख बजट खर्च होना था। राज्य सरकार ने करीब नौ साल पहले प्रदेश के सभी जिलों में ट्रैफिक पार्क बनाने की योजना शुरू की थी। योजना के तहत कई जिलों में तो पार्क बन गए। परिवहन विभाग ने करीब तीन साल पहले बीबनवा रोड पर शराब गौदाम के आगे पार्क बनाने के लिए चयन किया था। इस पार्क को आरएसआरडीसी ने भी स्वीकृत कर दिया था। उसके बाद पार्क को ट्रैफिक पार्क के रूप में विकसित करना था,लेकिन इस बीच जिले में आए परिवहन अधिकारियों की उदासीनता के चलते वे योजना को ही भूल गए, जिसका नतीजा यह है कि बूंदी के लोग यातायात नियमों से अनजान बने हुए है। इधर,विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भूमि चिह्नित होने के बाद ट्रैफिक पार्क बनाने की ²ष्टि से अवलोकन भी किया। इसमें लोगों की आवाजाही के साथ ग्रिनरी एवं ट्रैफिक सिग्नल बनाने के लिए उपयुक्त स्थानों की जांच की गई।

पांचवी बार में तय हुई भूमि
ट्रैफिक पार्क के लिए परिवहन विभाग ने जिला मुख्यायल समेत उपखंड मुख्यालयों में भी जगह देखी। यहां शहर में चार से पांच जगह देखने के बाद अधिकारियों ने यहां बीबनवां रोड शराब गौदाम के आगे खाली पड़ी भूमि को ट्रैफिक पार्क के लिए उपयुक्त माना। हालांकि पूर्व में दो जगह फाइनल भी हुई,लेकिन किसी कारणवश नगर परिषद ने निरस्त कर दिया। उपखंड मुख्यालय पर केशवरायपाटन में एक जगह पंसद भी आई,लेकिन तत्कालीन कलक्टर द्वारा जिला मुख्यालय पर ही ट्रैफिक पार्क के लिए भूमि तलाशने के निर्देश दिए गए। तब जाकर तीन साल पूर्व यहां पार्क के लिए फाइनल हुई,लेकिन वो भी अधिकारियों की सुस्त रवैये के चलते खटाई में जाती दिख रही है।

इसलिए जरूरी है
यातायात नियमों को लेकर ट्रैफिक पार्क आवश्यक है। इस पार्क में ट्रैफिक पार्क में जेब्रा क्रॉङ्क्षसग, ट्रैफिक सिग्नल्स,रिफ्लेक्टर,साइन बोर्ड, रोड ट्रेक,येलो लाइन,यू-टर्न सहित ट्रैफिक नियम से जुड़ी सभी जानकारी देने वाले मार्क बनाए जाने थे। पार्क में नीली,हरी एवं लाल बत्ती का मॉडल भी बनाया जाना था। इसके साथ ही सडक़ सुरक्षा संबंधी संदेश दर्शाए जाने थे। यातायात नियमों की बेहतर जानकारी मिलती।

यह मिलती जानकारी
कम उम्र में वाहन चलाने पर कार्रवाई को लेकर जागरूक।
वाहन को मोड़ते समय कैसे इंडिकेटर देना आदि।
स्कूली बच्चों को टू-व्हीलर चलाने के लिए लाइसेंस और वाहन संचालन नियमों की जानकारी।
वाहन कीतनी गति से चलाया जाए, जानकारी मिलेगी।
यातायात नियमों से जुड़ी हर चिजों की जानकारी मिलेगी।

बूंदी में ट्रैफिक पार्क नहीं होने के कारण छोटे बच्चे जो 18 साल से कम उम्र के हैं उनको यातायात नियमों की जानकारी नहीं मिल पाती। इसके अभाव में वह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते है और दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है। बूंदी में ट्रैफिक पार्क की अति आवश्यकता है।
नितेश शर्मा, अध्यक्ष, सडक़ सुरक्षा समिति, बूंदी