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संजय दत्त कोई क्रिमिनल नहीं था बस वो फंस गया था : सुभाष घई

सुभाष घई ने कहा कि संजय दत्त 'क्रिमिनल नहीं थे' और कहा कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था, तब भी उन्हें बात बिल्कुल मालूम थी कि ये बेकसूर लड़का है। फिल्म निर्माता सुभाष घई ने कहा कि वह अभिनेता संजय दत्त को करीब से जानते थे और जानते थे कि 1993 में उनकी गिरफ्तारी के समय वह 'निर्दोष' थे। उनकी फिल्म, खलनायक, लगभग उसी समय रिलीज़ हुई और फिल्म ने बड़ी सफलता हांसिल कि थी।

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Archana Keshri

Jan 18, 2022

संजय दत्त कोई क्रिमिनल नहीं था बस वो फंस गया था : सुभाष घई

संजय दत्त कोई क्रिमिनल नहीं था बस वो फंस गया था : सुभाष घई

सुभाष ने कहा कि संजय के कठिन समय को भुनाना उनकी नैतिकता के खिलाफ था और उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने खलनायक के प्रचार पर एक भी रुपया खर्च नहीं किया। संजय ने फिल्म में एक वांछित अपराधी की भूमिका निभाई थी। उनसे जब बॉलीवुड हंगामा में दिए गए इंटरव्यु में खलनाय फिल्म के प्रमोशन को लेकर सवाल किया गया तो सुभाष ने कहा कि उन्होंने कभी भी खलनायक को बढ़ावा देने के लिए संजय के कानूनी विवाद का इस्तेमाल नहीं किया।

बॉलीवुड हंगामा ने सवाल किया कि, "बहुत से चर्चे हुए जब खलनायक रिलीज हुई, उस समय संजय था एक नया चेहरा भी थे, तो डायरेक्टर होने के नाते आपका क्या अपरोच था। जिस तरीके से पूरा मूल्क देख रहा है उन्हें आज के टाइम में और वहीं फिल्म में भी। तो मैं इसकी किस तरह से मार्केटिंग करुं कि तकलिफ भी न हो किसी को और जो सही पोजिशनिंग है फिल्म की वो भी कर पाऊं?"

सुभाष घई ने बताया, "मैं सजय दत्त को तब से जानता था जब से वो बच्चा था। मैंने उनकी दूसरी फिल्म विधाता का निर्देशन किया। फिर 10 साल बाद मैंने उसे खलनायक में कास्ट किया। मैं उसे बहुत करीब से जानता था। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो मुझे पता था कि ये बेकसूर लड़का है। ये अपने भोलेपन में किसी जगह में ट्रेप हो गया है टेक्निकली, और अब ये फंस जाएगा। क्यों कि वो बेसिकली कोई क्रिमिनल नहीं था। किसी एक बच्चे की उड़ान होती है और वो गलत होती है तो वो फंस भी जाता है। तो मैं उस दृष्टि से ही उसको देखता था। और खलनाय के टाइम में जैसे कोई हादसा हुआ, या फिर मैं परेशान हुआ होंगा, ऐसा नहीं हुआ था मेरे साथ। बल्कि हुआ भी तो तब हुआ, जो लास्ट कलाइमेक्स है जो एंड में सीन है जेल का खलनायक फिल्म में। वो उसके अरेस्ट के बाद जब छुट्टी में आया तब उसने शूट किया। शूट के अंदर एक त्रिमूर्ती फिल्म हम शूट करने वाले थे उसका भी एक पार्ट वो शूट कर के गया था। इसके बाद उसको लम्बी सजा हो गई। लेकिन मैंने इस चीज को कभी कैश नहीं किया। ये मेरे वसूलों के खिलाफ था। ये एक बड़ी दर्दरी बात है कि आपका एक एक्टर है जो इस तरह से फंस जाए मूसीबत में और आप उसको कैश करें। आप सहीं मानेंगे कि खलनायक के प्रमोशन में मैंने एक रुपया भी खर्च नहीं किया। खामोश बैठ गया। चौली के पीछे गानें की इतनी कॉन्ट्रोनर्सी चली, 32 पॉलिटिक्ल यूनिट्स मेरे खिलाफ हो गए, कोर्ट केस हो गए। लेकिन मैं खामोश रहा। मुझे मालूम था कि मैंने फिल्म क्या बनाई है। मुझे मालूम था कि संजय दत्त क्या है, मुझे मालूम था कि चोली के पीछे गाने में क्या है। आप नहीं मानेंगे कि खलनायक फिल्म के प्रमोशन का मेरी जिंदगी का मीनिम्म बजट है प्रमोशन में। सबसे कम प्रमोशन इस फिल्म के लिए की, क्योकि ये फिल्म खलनायक अपने आप में प्रमोशन थी। उसकी सब जगह बात चल रही थी। मैंने बस इतना किया था कि इंफॉर्म कर दूं कि ये फिल्म थिएटर में लग रही है। इस दिन लग रही है और ये शो हो रहा है। इसका अलावा कुछ नहीं किया हमनें। इसके लिए हमने बहुत ही शांति से अप्रोच किया।"

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आपको बता दें अप्रैल 1993 में, संजय को टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटी (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। जबकि एक महीने बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया, 1994 में उनकी जमानत रद्द कर दी गई और उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। अक्टूबर 1995 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।

संजय को 2006 में TADA अदालत द्वारा आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था, जब उन्हें 9 मिमी पिस्तौल और एके-56 राइफल रखने का दोषी पाया गया था, लेकिन अधिक गंभीर TADA आरोपों से बरी कर दिया गया था। उन्होंने 2007 में कुछ दिन जेल में बिताए लेकिन तीन सप्ताह से भी कम समय में उन्हें जमानत मिल गई। उन्होंने 2013 से 2016 तक जेल में भी समय बिताया।

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