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बड़े ही रियलिस्टिक एक्टर हैं माधवन: राजकुमार हिरानी

फिल्म को रियलिस्टिक बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने वाले राजकुमार हिरानी से साला खड़ूस को लेकर हाल ही में हुई एक खास मुलाकात

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Kamal Singh Rajpoot

Jan 19, 2016

Rajkumar Hirani

Rajkumar Hirani

रोहित तिवारी

मुंबई। बालीवुड को अलग-अलग तरह के फ्लेवर परोस चुके निर्देशक/निर्माता
राजकुमार हिरानी
की हमेशा ही कुछ नया और अलग करने की चाहत रहती है। फिल्म को रियलिस्टिक बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने वाले हिरानी से साला खड़ूस को लेकर हाल ही में हुई एक
खास मुलाकात
में उन्होंने
राजस्थान पत्रिका
से करीब 25 मिनट तक विस्तार से बातचीत की, जिनके पेश हैं अंश-


साला... पर काम कैसे शुरू हुआ?

आर. माधवन हमारे काफी अच्छे मित्र हैं। काफी समय पहले उन्होंने मुझे इसकी विस्तार से स्क्रिप्ट सुनाई थी। बस वहीं से मन बना लिया था कि इसे करना ही है। इससे पहले माधवन मणिरत्नम को असिस्ट कर चुकीं निर्देशक सुधा कोंगारा को सुनाई, चेन्नई की रहने वाली जरूर हैं, लेकिन निर्देशन में उन्होंने जरा भी फील नहीं होने दिया कि वे साउथ से रिलेट करती हैं। यही सारी बातों को जहन में रखते हुए काम शुरू हो गया और इसके लिए हमारी पूरी टीम सफल भी रही।


माधवन आपसे काफी समय से जुड़े हैं, उनकी क्या खासियत है?

दरअसल, मेरी उनसे पहली मुलाकात 90 के दशक में हुई थी, जब मैंने मुन्ना भाई... को एक सीरियल के तौर पर बनाने के लिए लिखा था। उस दौरान माधवन टीवी की दुनिया में बड़े स्टार थे। वहीं से मैंने ही उनसे अप्रोच की थी कि मैं थ्री ईडियट्स में उन्हें काम देना चाहता हूं। बस, वहीं से करीब और करीब आते गए...। रही बात खासियत की तो पहली खास चीज उनके चेहरे पर इनोसेंटपन झलकता है और दूसरी अन्य बात वे बड़े ही रियलिस्टिक एक्टर हैं।


फिल्म में ऐसा क्या खास है, जिसे जनता-जनार्दन देखने के लिए आए?

साला... एक यूनिट स्टोरी है, जो मार्केट के लिहाज से बिल्कुल नई और ताजा है। वैसे भी अभी तक मैंने वैसे ही फिल्में की हैं, जिनमें कुछ नया जरूर हो...। हालांकि इसके लिए मुझे एक से दूसरी फिल्म के बीच 2 से 3 साल बीत जाते हैं। लेकिन मेरी हमेशा ही कोशिश रहती है कि मैं ऑडिसंय को कुछ नया दे सकूं, जिसमें मैं सफल भी रहा हूं। इसकी कहानी एक महिला बॉक्सर पर आधारित है। इसमें कोच और बॉक्सर के रिलेशनशिप को बहुत ही निराले अंदाज में दर्शाया गया है, जिसकी लोग सराहना भी करेंगे।


संजय दत्त की बायोपिक की असल स्थित क्या है?

(कुछ सोचते हुए...) बायोपिक की स्क्रिप्ट लगभग तैयार हो चुकी है, हालांकि अभी उसमें कुछ और करना बाकी है। लीड रोल में संजय दत्त की बायोपिक है। यह फिल्म खत्म होते ही हम उस पर लग जाएंगे। इसके लिए रणबीर को साइन भी कर लिया गया है। इसके लिए हमने पहले ही मन बना लिया था कि उन्हें ही संजय दत्त की बायोपिक की कास्ट करना है, क्योंकि रणबीर पहले संजय के साथ काफी समय बिता भी चुके हैं। रणबीर ने हमेशा ही बेहतरीन काम किया है। इसमें भी कम से कम दो साल लगने वाले हैं।


बदलते सिनेमा के अंदाज के बारे में आप क्या कहना चाहेेंगे?

मुझे बहुत खुशी है कि आज हम तरक्की कर रहे हैं। आए दिन नए प्रयोग के साथ दर्शकों को एंटरटेन करना भी आज के माहौल में काफी चैलेंजिंग हो गया है। लोगों के सामने आज वरायटी आ गई है। हर जोनर की फिल्में आ रही हैं, जिसकी अपनी अलग ऑडियंस है।


कोई ऐसा सब्जेक्ट, जिस पर काम करने की इच्छा हो?

ऐसे तो मेरे पास कई सारे सब्जेक्ट्स हैं, जिन पर काम करना है। लेकिन समय की वजह से संभव नहीं हो पाता मुन्ना भाई... समेत कई प्रोजेक्ट हैं। वैसे भी अब जिंदगी तो यहीं बितानी है, इसके लिए हमेशा कुछ नया करने ही पड़ेगा। इसके अलावा मेरे पास अगर सब्जेक्ट रेडी हो जाते हैं तो मैं सलमान और शाहरुख के साथ भी काम करना चाहूंगा।


न्यूकमर रितिका के बारे में क्या अनुभव रहा?

वे एक बॉक्सर हैं और इस फिल्म में कई बार बॉक्सिंग को दिखाया गया है। उसमें जान लाने के लिए ही उन्हें लिया गया, ताकि फिल्म को रियलिस्टिक बनाया जा सके। इसके लिए उन्होंने खुद को प्रूव करके भी दिखाया है। उन्होंने फिल्म में अपना शत-प्रतिशत दिया है। हालांकि इसके लिए पहले मैं पक्ष में नहीं था, लेकिन माधवन के कहने पर मैं भी राजी हो गया। वाकई में इसमें बॉक्सिंग के मैचेज़ में वास्तविकता झलकती है।


निर्देशिका सुधा कोंगारा के साथ काम का एक्सपीरिएंस शेयर करना चाहेंगे?

पहली मुलाकात मेरी मैडी के साथ ही हुई थी। मैंने उसके जैसा हार्ड वर्किंग और कभी नहीं देखा। वे दिन से लेकर रात तक हर समय फ्रेश मूड में रहती हैं। यानी रात को बात करो या सुबह, वे हमेशा ही सामने वाले की बात को समझने की कोशिश करती हैं। उन्हें किसी भी तरह का कोई इगो भी नहीं है। इस तरह से वे इस प्रोजेक्ट को लेकर बहुत ही ईमानदार हैं।


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