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पिता को खो चुका पारस… मूक है, पर चीखती है उसकी चुप्पी

19 मार्च को देशनोक हादसे में पारस के पिता अशोक की मौत हो गई थी। तब से वह अपने दादा जगन्नाथ के साथ धरने पर बैठा है। पारस मानसिक रूप से कमजोर है और मूकबधिर भी।

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बीकानेर. जिला कलेक्ट्री के सामने गर्मी से झुलसते टेंट में बैठा है 10 साल का पारस। न कुछ बोलता है, न समझा पाता है। हालांकि, उसकी मासूम आंखें बोल देती हैं कि वह क्या महसूस कर रहा है। उसके चेहरे पर एक मासूमियत है। उस मासूमियत के पीछे एक असहनीय शोक भी महसूस किया जा सकता है। वह तीन दिन से धरने पर बैठा है। देशनोक हादसा संघर्ष समिति के बैनर तले, जहां उसकी आंखें हर आने-जाने वाले को उम्मीद से ताकती हैं।

हर बार वही सवाल...क्या कोई उसके पापा को वापस ला सकता है?

19 मार्च को देशनोक हादसे में पारस के पिता अशोक की मौत हो गई थी। तब से वह अपने दादा जगन्नाथ के साथ धरने पर बैठा है। पारस मानसिक रूप से कमजोर है और मूकबधिर भी। लेकिन जब गुरुवार को पत्रिका संवाददाता धरनास्थल पर पहुंचा, तो यह बच्चा माइक उठा कर कुछ कहने की कोशिश करता नजर आया। गले से टूटे-फूटे शब्द निकल रहे थे, जिसमें सबने ‘पापा’ की करुण पुकार ही सुनाई दी। पल भर को पूरा धरना स्थल सन्न रह गया। भावनाएं गले में अटक गईं।

दुनिया वहीं सिमट गई

थोड़ी देर बाद पारस ने पेन और कागज उठाया। कुछ लिखने की कोशिश की। कभी अपने दादा की ओर इशारा करता, कभी टेंट में टंगी पिता अशोक की तस्वीर की ओर। शायद वह यह समझाने की कोशिश कर रहा था कि अब उसकी दुनिया वहीं सिमट गई है। पिता की यादें और मां की बेबसी उसे झकझोर रही थी। धरना स्थल पर बैठे लोगों की आंखें नम थीं। संघर्ष समिति के सदस्य यह देख बोल उठे, "इस परिवार पर जो बीती है, वह किसी के साथ न हो। सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। कम से कम इतना तो हो कि पारस और उसकी मां की जिंदगी सम्मान से गुजर सके।"

कॉल-टू-एक्शन

पारस की चुप्पी को नज़रअंदाज़ मत कीजिए। यह सवाल आपसे भी है। क्या हम एक मासूम की जिंदगी में थोड़ा उजाला नहीं ला सकते? यह धरना अब सिर्फ मुआवजे की मांग नहीं कर रहा। यह एक मासूम की खामोश पुकार भी बन गया है। पारस कुछ बोल नहीं सकता, पर उसकी चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है। शायद उतना, जितना हजार शब्द और तस्वीरें भी नहीं बता सकते।

21 को बीकानेर बंद का ऐलान

बीकानेर. देशनोक पुल हादसा संघर्ष समिति के बैनर तले कलक्ट्रेट के बाहर धरनास्थल पर गुरुवार को संघर्ष समिति ने पत्रकार वार्ता की। इसमें बताया कि शहर के व्यापारिक संगठनों से सम्पर्क कर सहयोग मांगा है। तीन दिन में पीडि़त परिवारों को आर्थिक मदद की मांग पूरी नहीं की गई, तो सोमवार को बीकानेर बंद रखा जाएगा।वरिष्ठ कांग्रेसी गोविन्दराम मेघवाल ने कहा कि देशनोक में बने पुल का डिजाइन ठीक नहीं है। इसी वजह से 12 हादसों में 13 लागों की जान जा चुकी है। इनमें 16 लोग घायल भी हुए हैं। अभी भी पुल ज्यों का त्यों है। कितने और लोगों के जान गंवाने पर सरकार और प्रशासन इसे ठीक कराएगा। कांग्रेस नेता महेन्द्र गहलोत और रामनिवास कुकणा ने कहा कि 19 मार्च को कार पर ट्रक पलटने के हादसे में नोखा के छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों के परिजन पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं थे, तब प्रशासन ने आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया। अब तक कोई मदद नहीं दी है। इसलिए सर्वसमाज धरने पर बैठा है।