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उच्च शिक्षा संस्थानों की मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, NAAC अब ग्रेडिंग देने की जगह तय करेगी लेवल

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों कॉलेज और विश्वविद्यालयों की मूल्यांकन प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब पहले की तरह ग्रेडिंग नहीं देगी NAAC। इसकी जगह शिक्षण संस्थानों के लेवल तय किए जाएंगे।

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बीकानेर। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों कॉलेज और विश्वविद्यालयों की मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को नवाचार, अनुसंधान, रिसर्च, ग्रीन एक्टिविटीज की दिशा में काम करना होगा।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) लागू होने से अब नैक ने इसी के अनुरूप शिक्षण संस्थानों के काम का मूल्यांकन करने पैरामीटर तय किए है। नई व्यवस्था के तहत नैक अब पहले की तरह ग्रेडिंग नहीं देगी। इसकी जगह शिक्षण संस्थानों के लेवल तय किए जाएंगे। टॉप संस्थानों को सेंटर फॉर एक्सीलेंस का दर्जा मिलेगा।

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की गुणवत्ता को परखने के लिए हर संस्थान का पांच साल में एक बार नैक का दल निरिक्षण करता है। इसके आधार पर उच्च शिक्षा संस्थान को ग्रेडिंग दी जाती थी। इस ग्रेडिंग को देखकर विद्यार्थी संस्थानों में प्रवेश लेते है। ग्रेडिंग के आधार पर यूजीसी ग्रांट देती है।

कॉलेज शिक्षा से जुड़े जानकारों ने बताया कि नैक ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को केन्द्र में रखकर प्रत्यानन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में मूलभूत परिवर्तन किए हैं। नई प्रक्रिया को इसी साल दिसंबर तक लागू कर दिया जाएगा। इसके तहत नैक प्रत्यानन दो चरणों में होगा।

प्रथम चरण के दो स्वरूप होंगें। संस्थान में शिक्षण गुणवत्ता, सुविधाएं, परिणाम, इंफ्रास्ट्रक्चर, शैक्षणिक माहौल आदि के हिसाब से लेवल तय किया जाएगा। प्रथम चरण मे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के घटको को सफलता पूर्वक लागू करवाने वाले संस्थानों को अच्छा माना जाएगा।

नैक मूल्यांकन के दूसरे चरण में पांच श्रेणियों में व्यवस्थाओं को देखेगा। उच्च शिक्षा संस्थान को उत्तरोतर क्रम लेवल 1 से लेवल 5 का स्तर दिया जाएगा। लेवल 5 वाला संस्थान सेंटर फाॅर एक्सीलेंस का दर्जा प्राप्त करेगा। यह सर्वोच्चच श्रेणी होगी। इसे वर्तमान ग्रेडिंग ए प्लस-प्लस (A ) के समकक्ष माना जा रहा हैं।

नैक ने अभी तक सात पैरामीटर (क्राइटेरिया) तय कर रखे थे। इनमें प्रत्येक पैरामीटर को इनपुट, प्रोसेस, आउटकम एवं इम्पैक्ट के आधार पर देखा जाएगा। दस पैरामीटर में पाठ्यक्रम, फैकल्टी संसाधान, टीचिंग-लर्निंग एक्सीलेंस, रिसर्च व इनोवेशन, सह शैक्षणिक एवं इतर शैक्षणिक, समाज व सामुदायिक गतिविधियां, ग्रीन एक्टीविटीज, शैक्षणिक प्रबंधन, मूलभूत संसाधन विकास एवं वित्तीय संसाधन प्रबंधन शामिल है।

क्या हैं एक्सपर्ट की राय :

विद्यार्थी केन्द्रित शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा : डाॅ. नरेन्द्र भोजक, एनईपी 2020 विशेषज्ञ व बीआईआरसी फांउडर का मानना है, 'NAAC की ओर से प्रत्यानन एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया में बड़ा परिवर्तन करने का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को गति देना है। नए पैरामीटर में प्रोजेक्ट सेमिनार, प्रयोगशाला, नवाचार के साथ-साथ रिसर्च को महत्व दिया गया है।

इससे विद्यार्थी केन्द्रित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। स्किल डवलपमेन्ट से शिक्षा रोजगारोन्मुखी होगी। प्रथम वर्ष से ही शोध करवाने होंगे। इससे प्रेक्टिकल/व्यावहारिक ज्ञान में भी इटर्नशिप के माध्यम से वृद्धि होगी। कुल मिलाकर नैक का नया स्वरूप एनईपी - 2020 का अमृत काल साबित होगा।'


टीचिंग लर्निंग डेटा होगा सार्वजनिक : नैक विशेषज्ञ डॉ. दिव्या जोशी के अनुसार अभी कॉलेज या विश्वविद्यालय को साल में एक बार एक्यूएआर की रिपोर्ट एवं पांच साल में एक बार एसएसआर की रिपोर्ट देनी होती है। जिन संस्थानों में प्रभावी माॅनिटरिंग होती है वहां डेटा प्रबन्धन व्यवस्थित रहता है।

उन्होंने कहा कि नई प्रक्रिया में रोजाना या साप्ताहिक रूप से डेटा प्रबन्धन के साथ-साथ टींचिंग लर्निंग का डेटा भी सार्वजनिक करना होगा। संस्थान के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के सामाजिक व सामुदायिक योगदान का रिकॉर्ड भी रहेगा।

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