
संभाग के कृषि अधिकारियों की मंगलवार को हुई कार्यशाला में सरसों, तारामीरा, मैथी एवं जीरे में मोयला (चेपा) नियंत्रण और चने की फसल में जड़ गलन के नियंत्रण का परामर्श दिया गया। क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक की अध्यक्षता में कृषि समस्याओं को लेकर कृषि अनुसंधान केन्द्र, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय सभागार में हुई कार्यशाला में कई सुझाव भी आए।
कार्यशाला में कृषि अधिकारियों ने कहा कि किसानों को बारीक दाने और मोटी दाने वाली यूरिया में भेद बता कर भ्रमित किया जा रहा है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। उन्होंने किसानों से कहा कि दोनों प्रकार की यूरिया खाद में कोई फर्क नहीें है। दोनों नीम कोटेड हैं, जो धीरे-धीरे पौधों को उपलब्ध्ध होती हैं।
दोनों में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। दोनों में से किसी का भी प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यूरिया का प्रयोग करते समय पत्ते पर पानी की बून्दें नहीं होनी चाहिए। यूरिया का उपयोग शाम के समय करना अधिक कारगर है।
25 कृषि अधिकारी शामिल हुए
कार्यशाला की अध्यक्षता क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. पीएस शेखावत ने की। इसमें संयुक्त निदेशक (विस्तार) आनन्द स्वरूप छिपा सहित बीकानेर , चूरू एवं जैसलमेर के 25 कृषि अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उपनिदेशको एवं सह निदेशकों ने समबन्धित जिलों की कृषि समबन्धित प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कृषि अधिकारियों ने अपने इलाके की कृषि समस्याएं बताई।
'मिलावटी खाद्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक'
अखिल भारतीय ग्राहक सुरक्षा एवं कार्रवाई समिति की बैठक मुरलीधर व्यास नगर में हुई। संस्था के जिला प्रमुख शंकर लाल सोनी ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है। आमजन को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो इसके लिए संस्था की ओर से खाद्य पदार्थो और घी के नमूने लिए जाएंगे।
आमजन को मिलावटी खाद्य पदार्थो से बचाने के लिए कार्य किया जाएगा। संस्था अभियान चलाएगी ताकि आमजन को शुद्ध खाद्य पदार्थ ही विक्रय के लिए उपलब्ध हो। बैठक में संस्था पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित थे।
Published on:
27 Dec 2017 01:25 pm
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