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Bijapur Protest: शराब दुकान हटाने की मांग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर किया प्रदर्शन

Liquor Shop Controversy: बीजापुर में शराब दुकान के विरोध में महिलाओं और बच्चों ने उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग पार कर दुकान का गेट तोड़ दिया, जबकि कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने भी आंदोलन का समर्थन किया।
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बीजापुर

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Shradha Jaiswal

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Updated: 7 Aug 2026, 2:11 PM IST

Bijapur Protest

Bijapur Protest: पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर किया प्रदर्शन(photo-patrika)

Bijapur Protest: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड अंतर्गत ग्राम संगमपल्ली (मद्देड) में प्रस्तावित सरकारी अंग्रेजी शराब दुकान के विरोध में महिलाओं और बच्चों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की घेराबंदी पार करते हुए शराब दुकान के गेट को तोड़ दिया। इस प्रदर्शन को कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी का भी समर्थन मिला, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मांग का समर्थन किया और राज्य सरकार पर निशाना साधा।

Liquor Shop Protest: ग्राम सभा की सहमति के बिना दुकान खोलने का आरोप

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सरकारी अंग्रेजी शराब दुकान स्थानीय लोगों और ग्राम सभा की सहमति के बिना खोली जा रही है। उनका कहना है कि इससे गांव में नशाखोरी बढ़ेगी और सामाजिक माहौल प्रभावित होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की।

महिलाओं और बच्चों ने किया जोरदार विरोध

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देने के बजाय सरकार शराब की दुकानें खोल रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि दुकान नहीं हटाई गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

विधायक विक्रम मंडावी ने दिया समर्थन

ग्रामीणों के समर्थन में कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी भी प्रदर्शन स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोलना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनका कहना था कि सरकार को युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाने चाहिए, न कि नशे को बढ़ावा देने वाले फैसले लेने चाहिए।

भाजपा सरकार पर साधा निशाना

विक्रम मंडावी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आदिवासी युवाओं के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां स्कूल, कॉलेज और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है, वहां शराब की दुकानें खोली जा रही हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

ग्रामीणों ने जताई सामाजिक चिंताएं

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शराब दुकान खुलने से घरेलू हिंसा, आपसी विवाद और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। महिलाओं ने कहा कि इसका सीधा असर परिवारों की शांति और खेती-किसानी पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए शराब दुकान खोलने का प्रस्ताव तत्काल निरस्त किया जाए।