भोपाल

ज्यादा चाय पीने वाले हो जाएं सावधानः आप पर मंडरा रहा है कैंसर या ह्रदय रोग का खतरा

अधिक मात्रा में चाय या काफी का सेवन करने वालों को सतर्क हो जाने की ज़रूरत है। क्योंकि, इनके अधिक सेवन से दिल की समस्या या कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। आइये जानते हैं ज्यादा चाय या कॉफी पीने से किन किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

भोपालSep 08, 2019 / 06:01 pm

Faiz

ज्यादा चाय पीने वाले हो जाएं सावधानः आप पर मंडरा रहा है कैंसर या ह्रदय रोग का खतरा

भोपाल/ अंग्रेजों से मिली चाय की आदत आज भारत के कई लोगों की लत बन चुकी है। राजधानी भोपाल की तो पहचान ही चाय और पान से की जाती है। कई लोगों का जीवन चाय के बिना मानो अधूरा है। कई लोग तो ऐसे भी हैं, जिनका चाय पिये बिना दिन ही शुरु नहीं होता। कई चाय के शौकीनों को चाय इतनी पसंद होती है कि, वो दिनभर में 8 से 10 कप तक पी लेते हैं। हालांकि, ऐसा करने वालों को सतर्क होने की ज़रूरत है। क्योंकि, ज्यादा चाय पीने वालों के लिए दिल की समस्या या कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। आइये जानते हैं ज्यादा चाय पीने से किन किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

 

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चाय का हेवी डोज़ बना सकता है इन बीमारियों का शिकार

-स्लीप डिसऑर्डर

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि, चाय पीने से सुस्ती दूर होती है। लेकिन ये तो आप मानेंगे कि, ऐसा सिर्फ थोड़ी देर के लिए होता है। अब कर लेते हैं मेडिकल पर आधारित बात, चाय में कैफीन नामक एक पदार्थ होता है, जिसकी ज्यादा मात्रा शरीर के लिए हानिकारक होती है। अधिक मात्रा में चाय या कॉफी पीने से शरीर में ज्यादा मात्रा में कैफीन चला जाता है। कैफीन के असर से थोड़ी देर के लिए तो दिमाग चुस्तहो जाता है, लेकिन बाद में इसका प्रभाव कम होने पर दौबारा सुस्ती आने लगती है, जिसके कारण हमें फिर से चाय या कॉफी पीने की इच्छा होती है। एक स्टडी के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति एक कप चाय या कॉफी पीता है तो ऐसा करने से उसकी नींद आने के समय में करीब 15 मिनट की देरी आ जाती है, यानी उसकी नींद उसके तय समय से पंद्रह मिनट लेट लगेगी और वो इसका कारण समझ भी नहीं पाता। ज़रा सोचिये कि, जो शख्स दिन में 8 से 10 कप चाय पीता है, आगामी समय में उसका क्या होगा।


-आंत को नुकसान

चाय के कारण होने वाली ब्लोटिंग की समस्या बहुत आम है, हालांकि लोग इसका मूल कारण नहीं समझ पाते। लेकिन ऐसा बार-बार होना पेट की आंतों को नुकसान पहुंचाता है। ब्लोटिंग के लिए जिम्मेदार पेट में ज्यादा सीक्रीड होने वाला ऐसिड होता है, ये एसिड शरीर में पहुंचने वाले भारी मात्रा में कैफीन के कारण बनता है, जिसे आमतौर पर हर किसी का पेनक्रियाज नष्ट नहीं कर पाता। एक समय ऐसा भी आता है, जिसके चलते आंतें डैमेज होने लगती हैं, जिसका समय पर उपचार ना किया जाए, तो एक गंभीर समस्या बन सकती है।

 

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-डिहाइड्रेशन और एसिडिटी

ज्यादा चाय पीने पर शरीर की उस प्रणाली पर असर पड़ता है जो उसे हाइड्रेट बनाए रखती है। इसमें मौजूद कैफीन ट्यूब्यूल की सोखने की क्षमता में बाधा डालती है जिससे शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है, साथ ही कई लोगों को इसके कारण ऐसिडिटी भी होने लगती है, जिससे पेट में गैस बनने जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है।


-गर्भपात

कुछ स्टडीज में तो यहां तक दावा किया जा चुका है कि, कैफीन गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर भी असर डालता है। अगर शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाए तो ये गर्भपात का कारण भी बन सकता है। यही वजह है कि, कई डॉक्टर तो गर्भवती महिलाओं को चाय या कॉफी से दूर रहने की सलाह देते हुए उसके स्थान पर हेल्दी ड्रिंक्स लेने की सलाह देते हैं।

 

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-दिल की बीमारी

चाय में मौजूद कैफीन बहुत तेजी से शरीर में मौजूद तरल में घुल जाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर भी तेजी से प्रभावित होता है। ऐसा होना दिल की सेहत के लिए बहुत घातक हो सकता है। बीपी का लगातार बिगड़ना हार्ट के वर्किंग प्रोसेस पर असर डालते हुए उसे डैमेज कर सकता है, जिसके चलते ह्रदय रोग की समस्या शुरु हो सकती है।


-प्रोस्टेट कैंसर

एक रिसर्च में सामने आया कि, जो पुरुष अपनी दिनचर्या में चाय या कॉफी का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, उन्हें एक अन्य व्यक्ति के मुकाबले प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है।

 

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-डॉइबिटीज

डाइबिटीज़ आज एक बीमारी है। बुजुर्ग ही नहीं नौजवान भी आज बड़ी आबादी में इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। चाय या कॉफी के अधिक सेवन से शरीर में कैफीन ज्यादा मात्रा में पहुंचने लगता है, जो पेनक्रियाज (लब्बा) पर अटैक करता है। पेनक्रियाज़ का मुख्य कार्य शरीर में खाने से निकलने वाले अनावश्यक ग्लूकोज को निश्क्रिये करके शरीर को पर्याप्त ग्लूकोज प्रदान करना है। लेकिन, शरीर में अधिक मात्रा में कैफीन पहुंचने से ये उसे लंबे समय तक निश्क्रिये करने में असफल रहता है औरर धीरे धीरे कमजोर हो जाता है। पेनक्रियाज़ कमजोर होने पर वो शरीर को मिलने वाले अनावश्यक ग्लूकोज़ को नष्ट नहीं कर पाता। ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ने पर हम डाइबिटीज़ जैसी आजीवन साथ रहने वाली बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं।

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