उज्जैन। सिंहस्थ को स्नान करने, भगवान के दर्शन करने, पूजा करने के साथ-साथ आहुतियों के लिए भी खास मान्यता दी गई है। यहां आने वाले साधु-संत औऱ बाकी भक्त यज्ञों को एक विशेष स्थान देते हैं। ये यज्ञ सिंहस्थ की एक महत्तवपूर्ण कड़ी मानी जाती है। इन यज्ञ के लिए विशेष कुंड बनाए जाते हैं। आईये जानते हैं इन कुंड के विशेषताओं को… 1. चतुरस्त्र कुंड: माना जाता है कि इस कुंड में यज्ञ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। simhastha-2016/index.php ” target=”_blank”>कुंभ 2016 की ख़बरों को पढ़ने के लिए यहां CLICK करें 2. योनि कुंड: यह कुंड विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है। कहा जाता है कि अगर कोई दंपति इस कुंड में यज्ञ करता है तो उसे पुत्र की प्राप्ति होती है। 3. आचार्य कुंड: इस कुंड की अपने नाम की तरह विशेषता है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्ती के लिए इस कुंड में यज्ञ किया जाता है। यह भी पढ़ें…@KUMBH: हठयोगियों को देनी होती है परीक्षा, गलती पर मिलती है सजा 4. त्रिकोण कुंड: अपने जीवन के शत्रुओं से छुटकारा पाने से लिए इस कुंड में यज्ञ किया जाता है। कहा जाता है कि इस कुंड में यज्ञ करने से शत्रु का नाश होता है। 5. वृत्त कुंड: अगर आपको व्यापार में तरक्की चाहिए तो आप इस कुंड में यज्ञ कर सकते हैं। मान्यता है कि इस कुंड में यज्ञ करने से व्यापार में वृद्धि होती है। 6. अर्द्धचंद्र कुंड: अगर आपका मन बहुत ही अशांत है तो आप इस कुंड में यज्ञ करें। कहा जाता है कि इस कुंड में यज्ञ करने से मन को शांति मिलती है। यह भी पढ़ें…कमांडो से कम नहीं होता नागा साधु का जीवन, दीक्षा देने से पहले होता है वैरीफिकेशन 7. समअष्टास्त्र कुंड: इस कुंड में यज्ञ करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है। 8. विषम अष्टास्त्र कुंड: अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं तो इस कुंड में यज्ञ आपके लिए फलदायी हो सकता है। 9. विषम षडास्त्र कुंड: यह कुंड लक्ष्मी के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस कुंड में यज्ञ करने से धन की प्राप्ति होती है।