भोपाल में योजना की समीक्षा में रीवा जिले की प्रगति कमजोर पाई गई है। जिसके चलते दो जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। आवास योजना को किस्त हितग्राहियों को नहीं मिल पा रही है, जिसकी वजह से मकान अधूरे हैं। जबकि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि स्वीकृत मकानों का निर्माण पूरा कराया जाए और हितग्राहियों का हर महीने गृह प्रवेश का कार्यक्रम निर्धारित किया जाए। इसी के तहत सभी जनपदों के सीइओ को टारगेट दिया गया था।
समीक्षा के दौरान रीवा जिले के रायपुर कर्चुलियान के जनपद सीइओ प्रदीप दुबे और गंगेव के प्रमोद कुमार ओझा की प्रगति काफी कम रही। द्वितीय किस्त की तो कोई भी राशि इन्होंने आवंटित नहीं कराई। इस लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रमुख सचिव ने दोनों को निलंबित कर दिया। इसके पहले भी लगातार होने वाली समीक्षा बैठकों में इन दोनों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। कई बार यह वीडियो काफ्रेंसिंग में उपस्थित भी नहीं होते थे।
प्रमुख सचिव द्वारा निलंबित दोनों जनपद सीइओ लगातार विवादों में रहे हैं। इनकी शिकायतें होती रहीं लेकिन राजनीतिक लोगों से संपर्क होने से शिकायतों पर पर्दा डाला जाता रहा है। प्रदीप दुबे एक दशक से जिले में ही पदस्थ रहे हैं। रीवा जनपद में लंबे समय तक सीइओ रहे और कुछ नेताओं के लिए काम करने का आरोप लगता रहा। तमाम शिकायतों के बाद भी वह यहीं जमे रहे। इसी तरह प्रमोद कुमार ओझा पर करोड़ों रुपए के कराधान घोटले में लीपापोती का आरोप रहा है। भौतिक सत्यापन में इनके कहने पर भी फर्जीवाड़ा कराया गया। नेताओं की पसंद होने से दोबारा गंगेव में पोस्टिंग दी गई।