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भोपाल। इस बात को हर कोई जानता है कि सभी धार्मिक कार्यो में भगवान को पान का पत्ता चढ़ाया जाता है। पान को संस्कृत में तांबूल भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा बताते है कि हिन्दू धर्म में पूजा की सारी विधि एवं सामग्री उपलब्ध होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पान हवन पूजा की एक अहम सामग्री है। देवताओं द्वारा समुद्र मंथन के समय पान के पत्ते का प्रयोग किया गया था। यहां से पान के पत्ते का इस्तेमाल रोशनी में आया।
क्यों किया जाता है इस्तेमाल
पंडित जी बताते है कि पान के पत्ते के ठीक भपरी हिस्से में इन्द्र एवं शुक्र देव विराजमान हैं। वहीं मध्य के हिस्से में सरस्वती मां का वास होता है। साथ ही पान के पत्ते में सबसे निचले स्थान पर मां महालक्ष्मी जी का वास होता है। पत्ता इसी जगह पर तिकोना आकार लिए हुए रहता है। पान के पत्ते के दो छोर जिस जगह पर जुड़े हुए होते हैं उस जगह पर ज्येष्ठा लक्ष्मी का वास होता है। विश्व के पालनहार भगवान शिव पान के पत्ते के भीतर वास करते हैं। भगवान शिव एवं कामदेव जी का स्थान इस पत्ते के बाहरी हिस्से पर है। मां पार्वती एवं मंगल्या देवी पान के पत्ते के बाईं ओर रहती हैं तथा भूमि देवी पत्ते के दाहिनी ओर विराजमान हैं। अंत में भगवान सूर्य नारायण पान के पत्ते के सभी जगह पर उपस्थित होते हैं। सारे देवताओं का वास होने के कारण ही पान के पत्ते का प्रयोग हर पूजा में जरूर किया जाता है।
पूरी हो जाती हैं सारी मनोकामनाएं
पंडित जी बताते है कि देवो के देव महादेव को पान अर्पित करने से मांगी गई सारी मुरादें पूरी हो जाती है। महादेव के पूजन में इस विशेष पान में केवल गुलकंद, खोपरे का बुरा, कत्था, सौंफ और सुमन कतरी डली हुई होती है। महादेव का पूजन कर उनको यह पान अर्पण करने से घर में सदैव सुख-शांति बनी रहती है साथ ही आर्थिक रुप से भी संपन्नता आती है। मंगलवार तथा शनिवार को हनुमान जी को एक डंठल वाला पान का पत्ता तथा लड्डू चढ़ाने से आपके लंबे समय से अटके कार्य पूरे होते हैं।
Published on:
15 May 2019 01:04 pm
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