27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शर्मनाक- नर्मदा का पानी अब पीने या भोजन बनाने लायक तक नहीं बचा

- मुंबई की लैब में करवाई नमूनों की जांच - बड़वानी में चौंकाने वाली तस्वीर  

2 min read
Google source verification
narmada_river_status.png

भोपाल। मोक्षदायिनी नर्मदा का पानी अत्यधिक कठोर हो गया है। शैवाल बढ़ गए हैं। कोलीफॉर्म और ई-कोलाई बैक्टीरिया भी पाए गए हैं। इनके असर से पानी का रंग, स्वाद भी बदल गया है। यानी नर्मदा का पानी पीने और भोजन बनाने लायक भी नहीं बचा है। यह हाल हैं बड़वानी से पांच किमी दूर राजघाट के कुकरा गांव में नर्मदा के।

खुलासा हुआ है आइएस-10500 मानकों के तहत की गई जांच में। जांच मुंबई की निजी लैब में की गई। पानी के नमूने कुकरा के रहवासी कमला यादव ने लिए थे। रिपोर्ट बताती है कि यहां के पानी से खेती में सिंचाई भी कुछ फसलों में की जा सकती है, सभी में नहीं।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रणेता मेधा पाटकर, देवेंद्र सोलंकी, कैलाश अवास्या का कहना है कि विश्व नदी दिवस पर 26 सितंबर से जनजागरण यात्रा शुरू होगी। यह मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में होगी।

मानपुर (इंदौर संभाग) की अजनार नदी जो कारम नदी से होते हुए नर्मदा में मिलती है, उसके परीक्षण में भी प्रदूषण का पता चला था। मुख्य दोषी पर आज तक कार्रवाई नहीं हो पाई। नर्मदा पट्टी के शहरों में अस्पताल बढ़ रहे हैं, लेकिन नर्मदा की स्थिति सुधारने की कवायद नहीं हो रही।
- मेधा पाटकर, प्रणेता, नर्मदा बचाओ आंदोलन

पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा बढऩे पर पथरी की समस्या हो सकती है। कई बार किडनी पर भी इसका असर होता है। नाइट्रेट 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा मात्रा होने पर थायराइड, श्वसन तंत्र संबंधी रोग, गर्भपात, पेट या मूत्रपिंड के कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा पैदा होता है।
- डॉ. आदर्श वाजपेयी, एमडी, भोपाल

ऐसे समझें : क्या मिला जांच में -
- कैल्शियम: अधिकतम मात्रा 200 मिलीग्राम/लीटर होनी चाहिए। यह 306 मिलीग्राम/लीटर पाई गई। ऐसे पानी के सेवन से किडनी पर असर और पथरी की स्थिति बनती है।
- नाइट्रेट: अधिकतम 45 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है। शैवाल बढऩे से जल शुद्धि करने वाले जीव खत्म हो रहे हैं। ऐसे पानी को पीने से खून में ऑक्सीजन की क्षमता कम होती है। बच्चों की सेहत पर असर पड़ता है।
- अमोनिया की अधिकतम सहनीय मात्रा 0.5 मिलीग्राम/लीटर तक पहुंच गई है। इसका असर मानव और मछलियों पर होता है। अमोनिया औद्योगिक अवशिष्ट पदार्थों और मानवीय मल-मूत्र से भी बढ़ता है।

80 नदियों में लगा रहे प्रदूषण मापक यंत्र
नर्मदा सहित 80 नदियों में प्रदूषण मापक यंत्र लगाए जा रहे हैं। यदि बड़वानी में नर्मदा के प्रदूषण को लेकर कोई शिकायत है तो परीक्षण करवाएंगे। जनता से भी अपील है कि वे नदियों और जलस्रोतों के शुद्धिकरण के लिए आगे आएं।
- हरदीप सिंह डंग, मंत्री, पर्यावरण विभाग