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कैदियों के बनाए इस प्रोडक्ट की मुंबई में डिमांड, जेल के अंदर रहकर कमा रहे रुपये

Sagar News:केंद्रीय जेल (central jail)में कैदियों के बनाए दीपकों की मुंबई में भारी डिमांड है।जेल में कैदियों की मन:स्थिति सुधारने के लिए गायत्री शक्तिपीठ के द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होते रहते है। जिसमें ,108 कुंडली गायत्री महायज्ञ शामिल है।

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भोपाल

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Puja Roy

Feb 24, 2024

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महीने के भीतर 50,000 दीपक मुंबई भेजे गए
एक महीने के भीतर 50,000 दीपक मुंबई भेजे गए। यहां कैदी शुद्ध गाय के गोबर से दीपक बनाते हैं। इन दीपकों का उपयोग मुंबई में चल रहे अश्वमेध यज्ञ के हिस्से के रूप में छोटे हवन के लिए किया जाता है। जेल के अंदर एक बड़ी गौशाला है जहां कैदी न केवल गायों की सेवा करते हैं बल्कि गाय के गोबर का उपयोग भी करते हैं। ये दीये गायत्री परिवार की ओर से मुंबई भेजे जा रहा है।

बौद्धिक नीति के लिए धार्मिक कार्यक्रम
जेल में कैदियों की मन:स्थिति सुधारने के लिए गायत्री शक्तिपीठ के द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होते रहते है। जिसमें ,108 कुंडली गायत्री महायज्ञ शामिल है।।इसके अलावा कैदियों को दो महीने तक संस्कृत भी सिखाई गई थी।सा्थ ही उनसे गायत्री मंत्र लेखन भी कराया जाता है।सभी कैदियों को शाम को बैरक में प्रवेश करने के बाद 10 मिनट तक गायत्री मंत्र का जाप करना अनिवार्य होता है।प्रतिदिन 1500 दीपक तैयार होते हैं। जिसके लिए 12 से 15 कैदी लगे हुए हैं।

महीने के भीतर 50,000 दीपक मुंबई भेजे गए
एक महीने के भीतर 50,000 दीपक मुंबई भेजे गए। यहां कैदी शुद्ध गाय के गोबर से दीपक बनाते हैं। इन दीपकों का उपयोग मुंबई में चल रहे अश्वमेध यज्ञ के हिस्से के रूप में छोटे हवन के लिए किया जाता है। जेल के अंदर एक बड़ी गौशाला है जहां कैदी न केवल गायों की सेवा करते हैं बल्कि गाय के गोबर का उपयोग भी करते हैं। ये दीये गायत्री परिवार की ओर से मुंबई भेजे जा रहा है।

कैदी कमा रहे है पैसे
जंहा इस तरह के दीपक बनाने से पर्यावरण संरक्षण में कारगर साबित हो रहा है, कैदी जेल में हुनर सीख कर पैसे कमा रहे हैं। इस तरह के अच्छे काम करने से उनकी सकारात्मकता में भी सुधार आता है। डिप्रेशन और तनाव से छुटकारा मिलता है, जिस वजह से मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते है। गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा दीपक बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया था। भविष्य में और भी पूजा सामग्री बनाने की योजना है।

अपना काम शुरू कर सकेंगे
जेल में यह हुनर सीखने से जब कैदी सजा काटने के बाद जेल से रिहा होंगे तो वे नए जोश के साथ अपना काम कर सकेंगे। क्योंकि जेल से छूटे व्यक्ति को समाज तुरंत स्वीकार नहीं करता। ऐसे में उनके लिए अपना जीवन यापन करना मुश्किल होता है, लेकिन एक बार हुनर हासिल कर लेने के बाद वह किसी दूसरे के सामने रोजी-रोटी के लिए निर्भर नही रहगें ।