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जानिए कैसे रानी पद्मावती की खूबसूरती बनी थी विशाल साम्राज्य के विनाश का कारण

चित्तौड़ की रानी पद्मावती की खूबसूरती बनीं थी साम्राज्य के विनाश का कारण...

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rani padmavati

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भोपाल। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। पद्मावती पर खूनी विरोध की एक तस्‍वीर सामने आई है। अगर कोई संगठन या व्‍यक्‍ति विरोध का यह तरीका अपना रहा है तो यह काफी खौफनाक है। जयपुर में स्थित नाहरगढ़ किले की प्राचीर पर एक व्यक्ति का लटका हुआ शव मिलने से हड़कम्प मच गया है, जिसके साथ एक धमकी भी दी गई है। किले की दीवारों पर लिखा गया है कि पद्मावती का विरोध, हम पुतले नहीं जलाते, लटकाते हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर बीते दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने फिल्म ‘पद्मावती’ को रिलीज करने से बैन कर दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पद्मावती को ‘राष्ट्रमाता’ की पदवी देते हुए कहा कि रानी पद्मावती के बलिदान का अपमान प्रदेश स्वीकार नहीं करेगा। भले ही सेंसर बोर्ड अनुमति दे दे लेकिन मप्र में फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भोपाल में पद्मावती की शौर्य गाथा को प्रदर्शित करने स्मारक बनाने और महिलाओं के सम्मान के लिए कार्य करने वाले व्यक्ति को ‘राष्ट्रमाता पद्मावती पुरस्कार’से सम्मानित करने की भी घोषणा भी की।

फिल्म कई महीनों से विवादों में छाई हुई है लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि पद्मावती की खूबसूरती ही विशाल साम्राज्य के विनाश का कारण बनी थीं। चित्तौड़ की महरानी रानी पद्मावती अपनी सुदरंता के लिए पूरे भारत में जानी जाती थीं। जानिए कैसे बनीं विशाल साम्राज्य के विनाश का कारण...

छवि भुलाए नहीं भूलती थी

उस दौरान चित्तौड़ की वीर भूमि पर महाराणा रावल रतन सिंह का शासन था। उनकी रानी पद्मावती इतनी रूपवती थी की एक बार अगर कोई देख ले तो उनकी छवि भुलाए नहीं भूलती थी। ऐसा भी कहा जाता है कि जब रानी पद्मावती पानी पीती थी तो उनकी सुंदरता के कारण पानी अंदर जाते हुए ऐसा का ऐसा नजर आता था। रानी पद्मावती की सुंदरता के ये चर्चे किसी तरह दिल्ली में बादशाह अलाउद्दीन खिलजी के कानों तक पहुंच गई। जिसके बाद बादशाह से रहा नहीं गया और वो सेना लेकर पद्मावती को हासिल करने चित्तौड़ पहुंच गए। उसने राणा से अपील की कि वो बहन की हैसियत से एक बार रानी पद्मावती से मिलना चाहता है। राणा ने राज्य को बचाने के लिए उनके इस प्रस्ताव को मान गया। रानी पद्मावती भी आईने में एक जलक दिखाने के लिए मान गई, लेकिन जब बादशाह ने रानी की सुंदरता को आईने में देखा तो वह रह नहीं पाया और उसकी रानी पद्मावती को पाने की इच्छा और प्रबल हो गई। यहीं से शुरू हुआ था विशाल साम्राज्य के विनाश होने का सफर।

अलाउद्दीन ने किया था किले में आक्रमण

पद्मावती की खूबसूरती में मर-मिट चुके बादशाह अलाउद्दीन खिलजी ने किले पर आक्रमण बोल दिया और लगभग सात महीने के घेरे के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने 25 अगस्त 1303 ईस्वी को चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया और राणा रतन सिंह को बंदी बना दिया लेकिन गोरा व बदल नामक दो वीर योद्धाओं ने अपनी समझ व शौर्य से राणा रतन सिंह को कैद से छुड़ा लिया। परन्तु अंत में राणा रतन सिंह सहित सभी योद्धाओं ने लड़ते-लड़ते अपने प्राणों का बलिदान दे दिया और रानी पद्मावती ने दुश्मनों के हाथ लगने से बचने के लिए अन्य महिलाओं के साथ हंसते-हंसते अपने प्राण जलते हुए कुंड में छलांग लगा कर न्योछावर कर दिए और जोहर कर अपनी रक्षा की। इस विनाश के बाद अलाउद्दीन खिलजी को पद्मावती तो नहीं लेकिन लाशों के साथ साम्राज्य का विनाश देखना पड़ा।

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