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भोपाल

बिजली के खम्भों में लटके पोस्टर-बैनर निकायों की स्वच्छता रैंकिंग में लगा सकते हैं बट्टा

– रैंकिंग बढ़ाने शहर को सजाने-संवारने पर भी करना होगा फोकस
– सर्वे की रैंकिंग ठीक करने सरकार ने मुख्यालय स्तर से उतरी सौ अधिकारियों की टीम
– आवारा पशु भी निकायों की मुश्किलें खडी कर सकते हैं।

भोपालMar 06, 2022 / 07:19 pm

Ashok gautam

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भोपाल। राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए सरकार ने मुख्यालय स्तर से सौ से अधिक अधिकारियों की टीम ३७८ निकायों में अभी से उतार दी है। यह अधिकारी अकले शहरों की साफ-सफाई और स्वच्छता ही नहीं देखेंगे, बल्कि इस बात का भी आकलन करेंगे कि शहर को सजाने-संवारने के लिए कितने तरह से प्रयास किए गए हैं। शहर को सुव्यवस्थित रखने के लिए अधिकारियों ने किस-किस तरह के जतन किए हैं। बिजली के खम्भों, तार और पेड़ों पर फटे-पुरानेे और टूट कर लटकी होर्डिंग और पोस्टर-बैनर निकायों की स्वच्छता रैंकिंग में बट्टा लगा सकते हैं। आवारा पशु भी निकायों की मुश्किलें खडी कर सकते हैं।
यह टीम शहरों का भ्रमण कर करीब१०० बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार करेगी। इनका फोकस स्वच्छता के अलावा शहर को सुव्यववस्थित करने के प्रयास को भी देखना होगा। जैसे कि शौचालय और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए नल की टोंटी से पानी तो नहीं टपक रहा है, सार्वजनिक शौचालयों में मिरर है या नहीं। गंदी, मलीन, झुग्गी बस्ती की बाउंड्री वाल, पुराने शहरों की दीवारों और फ्लाईओवर पर पेंटिंग तथा सौदर्यीकरण का कार्य किराया जाना है, जिससे शहर आकर्षक दिखाई दे सके। धार्मिक स्थल, पार्क, और पर्यटन स्थल के स्वच्छता सफाई में विशेष फोकस किया जाएगा। बाजार में हर ५० से सौ मीटर पर डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा। अच्छी रैंकिंग के लिए शहर के नाले और नालियों को भी ढकना अथवा उसकी दीवार पर पेंटिंग करना आवश्यक होगा।


अधिकारियों को दो बार करना होगा शहर का भ्रमण
प्रदेश स्तर से दौरे पर जाने वाले अधिकारियों को एक से डेढ़ हफ्ते तक शहरों में ही रहना होगा। ये टीम एक माह के अंदर दो बार शहर का भ्रमण करेगी। अधिकारी शहर की स्वच्छता के संबंध में स्थानीय अधिकारियों के बैठक ले सकेंगे और उन्हें सुझाव भी दे सकेंगे। शहर में कचरा प्रबंधन, कचरा कलेक्शन और उसके निपटान के साथ ही वायु प्रदूषण का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों में मशीन के जरिए झाडू लगाने की व्यवस्था पर निगरानी की जाएगी। जिन क्षेत्रों में निर्माण कार्य चल रहे हैं वहां हवा में धूल के कड़ न मिले, इसके लिए निर्माण एजेंसी को पानी का छिड़काव भी करना होगा।

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