
patrika special interview
जितेंद्र चौरसिया
भोपाल। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ( vd sharma ) ने कहा कि भाजपा के विधायकों को खरीदने की कोशिश कांग्रेस पहले भी कर चुकी है, लेकिन भाजपा का कोई भी विधायक बिकने वाला नहीं है। उपचुनाव के नतीजे के बाद भी कांग्रेस यदि ऐसी कोशिश करती है, तो उसके हाथ कुछ नहीं आने वाला। कमलनाथ कितने भी बड़े उद्योगपति हो, लेकिन भाजपा का एक भी विधायक बिकने वाला नहीं।
यह बात वीडी शर्मा ( BJP state president vd sharma ) ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कही। पढि़ए, उनसे बातचीत के प्रमुख अंश....
उपचुनाव में भाजपा में ऐसी क्या रणनीति है कि सभी 28 सीटें जीतने का दावा है ?
यह मध्यप्रदेश को बचाने वाला उपचुनाव है। भाजपा का हर बूथ तक तंत्र है, पंद्रह साल का हमारा विकास और संवेदनशील नेतृत्व और कार्यकर्ता के बल पर सभी 28 सीटों पर चुनाव जीतेंगे। हमारा संगठन बूथ स्तर तक काम कर रहा है। हमारा कार्यकर्ता ही जीत का आधार है।
कांग्रेस के लिए 28 सीट मुश्किल है, ऐसे में यदि कांग्रेस आपके विधायक तोड़ती है तो.?
कांग्रेस इससे पहले भी कोशिश कर चुकी है। सत्ता परिवर्तन के पहले विधायक शरद कौल को कांग्रेस ने सबसे पहले ऑफर दिया था। हमने किसी को नहीं खरीदा, लेकिन कांग्रेस की गद्दारी से उनके विधायक हमारे पास आए। हमने तो सरकार बनाकर हमारी जिम्मेदारी निभाई। मध्यप्रदेश को बचाया है। उपचुनावों के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आना नहीं है, उस पर यदि वह भाजपा के विधायकों को खरीदने की कोशिश करती है, तब भी एक भी विधायक नहीं तोड़ सकती है।
भाजपा का चुनाव में चेहरा कौन है, सिंधिया या शिवराज या दोनों ?
भाजपा सामूहिक नेतृत्व पर यकीन रखती है। यह कॉडर-बेस संगठन हैं। शिवराज सिंह चौहान हमारे मुख्यमंत्री हैं, वे ही हमारा चेहरा है। संगठन उनको ताकत देने का काम करता है। भाजपा में सबसे महत्वपूर्ण हमारा संगठन और कार्यकर्ता हैं। पीएम, सीएम और हम सब कार्यकर्ता ही हैं। इसलिए हम चेहरों में नहीं पड़ते।
मोदी-शाह स्टार प्रचारकों में नहीं हैं, सिंधिया दसवें नंबर पर क्यों?
उपचुनाव में पीएम और गृह मंत्री नहीं रहते, जहां तक सिंधियाजी की बात है। हमारे यहां नंबर का चक्कर नहीं है कि कौन किस नंबर पर है, मैं तो किसी नंबर पर नहीं था। पिछली बार सबसे नीचे मेरा नाम था। आज पहले नंबर पर हैं, तो प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर है। हमारे यहां सीएम हो, केंद्रीय मंत्री हो या कोई दूसरा व्यक्ति हो। सभी संगठन के हिसाब से चलते हैं। भाजपा में जो तय होता है, उस पर काम होता है। यह कार्यकर्ता आधारित दल है। यहां सबसे महत्वपूर्ण यदि कोई तो कार्यकर्ता है।
कुछ सीटों पर असंतोष है। अब भी पूर्व मंत्री सहित कुछ नेता रूठे हुए हैं, कैसे पार पाएंगे?
भाजपा बड़़ा दल है। कार्यकर्ता को कहने का अधिकार है। एक स्थान है, जहां वो अपनी बात कहता है और हम सुनते हैं। सभी 28 सीटों पर लगभग सभी संतुष्ट हैं। लेकिन, मनुष्यों का संगठन है। किसी के मन-भाव में कोई बात हो सकती है। हो सकती है कुछ बातें, लेकिन हम उनका समाधान निकालते हैं। कांग्रेस में तो उनके बड़े नेता गोविंद सिंह कह चुके हैं कि कांग्रेस में लोकतंत्र खत्म हो गया है।
पहले लायक-नालायक, फिर टिकाऊ-बिकाऊ और अब नंगे-भूखे, अब कांग्रेस कह रही कि शिवराज अमीर है, ये कैसी सियासत है?
भाजपा ने 15 साल में मध्यप्रदेश को स्वर्णिम बनाया, 15 महीने में कमलनाथ ने बर्बाद कर दिया। वो विकास नहीं, नंगे-भूखे की बात करते हैं। उनको गरीब का दर्द नहीं पता। वो कहते शिवराज भूखे-नंगे। अब अमीर कह रहे, वो मुद्दों से भटकाते हैं। यहां गरीब के बेटे को भी कमाने का अधिकार है। कोई ये काूनन थोड़े ही है कि गरीब व्यक्ति जीवनभर गरीब रहेगा। ये कानून तो नेहरूजी बना गए थे, जम्मू-कश्मीर में। शिवराज को गरीब, नंगा-भूखा कहना गरीब का अपमान है। कमलनाथ-दिग्विजय अपने झूठ में उलझ गए हैं। हमेशा झूठ बोलते हैं। कमलनाथ को झूठ बोलने और छल के अलावा कोई काम नहीं। कमलनाथ सच में उद्योगपति हैं, इसलिए उन्होंने इसलिए सरकार में आकर गरीब कल्याण की योजनाओं को बंद कर दिया था। शिवराज ने इन योजनाओं को फिर शुरू किया। कैटरीना को नचाने के लिए पैसा इकठ्ठा कर रहे थे और पीएम आवास के गरीबों को मकान दिलाने के पैसे नहीं कह रहे थे। इस कारण ढाई लाख आवास सरेंडर कर दिए थे।
चुनाव का घोषणा-पत्र कब घोषित करेंगे, क्या 2018 के घोषणा-पत्र को अमल में लाएंगे?
सभी विधानसभा का संकल्प-पत्र तय हो गया है। जल्द ही जारी करेंगे। इसमें स्थानीय मुद्दों को रखा गया है। कुछ राज्य स्तर के संकल्प भी होंगे, जिन्हें घोषित करेंगे। जहां तक 2018 के घोषणा-पत्र की बात है, तो उसको अभी एकजाई करना है। उस पर अलग से बात होगी।
पहले कांग्रेस में सिंधिया कांग्रेस थी, अब क्या भाजपा में भी सिंधिया भाजपा है?
भाजपा कार्यकर्ता आधारित दल है। पद्धति पर काम होता है। यहां व्यक्तिवाद नहीं चलता। नेता प्रमुख व प्रभावी होता है, लेकिन इसके समर्थक उसके समर्थक नहीं होता। सामूहिक नेतृत्व से काम होता है। कौन बड़ा नेता कहां जाएगा, ये तक सामूहिकता से तय होता है। कोई व्यक्ति कोई निर्णय नहीं लेता। न ऐसा अभी है, और न कभी ऐसा होगा। हमेशा सामूहिकता से ही काम होगा।
राजमाता सिंधिया पर सिक्का जारी करना क्या सियासी कदम है, कितना और क्या फायदा होगा?
राजमाता सिंधिया भाजपा का एक आदर्श है। राजमाता ने जनसंघ को सींचा। विहिप को राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए मदद का वादा किया था, लेकिन पहले ही आपातकाल में जेल चली गई। जब लौटी, तो विहिप को हीरे की अंगूठी दी। संगठन के लिए इतना कमिटमेंट सामान्य तौर पर होता नहीं है। पीएम ने सम्मान दिया राजमाता को। ये सियासत के लिए नहीं है, बल्कि भाजपा का पूरा नेतृत्व राजमाता को नमन करता है।
ग्वालियर-चंबल में 16 सीटें हैं। आप कहते वहां विकास नहीं, तो जिम्मेदार कौन 15 साल या 15 महीने?
ग्वालियर-चंबल से कांग्रेस को बहुमत मिला, लेकिन 15 महीने में एक पैसा दिग्विजय के इशारे पर कमलनाथ ने नहीं दिया। विकास केवल छिंदवाड़ा का किया, बाकी प्रदेश को बर्बाद कर रहे थे। ग्वालियर-चंबल सहित प्रदेश की जनता गुस्से में बैठी है। पंद्रह महीने में ग्वालियर-चंबल को बर्बाद कर दिया। जिन मित्रों ने कांग्रेस छोड़ी, उन्होंने इन्हीं मुद्दों पर की है। कमलनाथ ने ग्वालियर-चंबल और प्रदेश की जनता के साथ गद्दारी की। प्रदेश का बंटाधार कर दिया।
भाजपा के निशाने पर कौन है, दिग्विजय चुनाव प्रचार में नहीं है, पर भाजपा के निशाने पर है?
कांग्रेस और कमलनाथ का यह घोर अपराध है कि कमलनाथ ने दिग्विजय के इशारे पर सरकार चलाई। अब भी उनके इशारे पर काम करते हैं, लेकिन उनको चुनाव में पर्दे के पीछे रख रखा है। जनता के साथ छल कर रहे हैं। दोहरा चरित्र है। अब भी काम उनके इशारे पर करते हैं। दिग्विजय और कमलनाथ ने मिलकर इस प्रदेश का बंटाधार कर दिया है।
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Published on:
16 Oct 2020 07:25 am
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