
भोपाल। संग्रहालय के 42 वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सिक्किम सांस्कृतिक उत्सव के अंतर्गत हिस्टारिसिटी लाइव्लीहुड़ एवं ईमर्जिंग सोशियों कल्चरल रियालिटी आफ सिक्किम विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन के सत्र में आज अध्येताओं द्वारा सिक्किम की संस्कृति पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
सत्र की अध्यक्षता प्रख्यात समाज वैज्ञानिक प्रो. ए.सी. सिन्हा ने की। संगोष्ठी में सिक्किम विश्वविद्यालय के मानव शास्त्र विभाग के डा. जेम्स हाओकिप ने संगोष्ठी के विषय पर, डा. उत्तम लाल ने सिक्किम के याक पालकों एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर उन्हें होने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला।
करिश्मा लेपचा ने द चेंजिंग रिलीजियस लैंडस्केप ऑफ सिक्किम विषय पर बोलते हुए कहा कि, सिक्किीम में बौद्ध धर्म का आगमन 17 वीं शताब्दी से प्रारंभ होता है और स्थानीय निवासी लेपचा समुदायों द्वारा अपनाया गया और कंचनजंगा पर्वत को संरक्षक देवता के रूप में स्वीकार किया गया। लेकिन वर्तमान में सिक्किम का पवित्र भूगोल धीरे धीरे परिवर्तित होता जा रहा है।
14वां वार्षिक व्याख्यान
प्रो. टी.बी. सुब्बा, (मानवशास्त्र विभाग, पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, शिलाँग) ने आज 14वां वार्षिक इगांरामासं व्याख्यान दिया एवं प्रो. टी.बी. सुब्बा ने मिडिल क्लास एडं म्यूजियम्स इन इंडिया विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा, भारत में मध्यम वर्ग की संख्या अधिक है लेकिन संग्रहालय इस मध्यम वर्ग को आकर्षित करने में असफल रहा है।
इसके प्रमुख कारण एक तरफ मध्यम वर्ग का आजिविका के लिए व्यस्त रहना और अपनी जिज्ञासा को शांत करने के तरिकों में संग्रहालय को न सम्मिलित करना तो है ही तो दूसरी तरफ संग्रहालयों में दर्षकों के अनुरूप प्रदर्शनियों का अभाव, उसमें जिज्ञासा जगाने का अभाव, स्टाफ में कमी, नवीन विषयों की प्रस्तुति, दर्षकों हेतु सुविधाओं का अभाव आदि भी शामिल है।
संग्रहालय तक मध्यम वर्ग को लाने के लिए यह आवष्यक है कि संग्रहालय सामाजिक विविधता और विरोधों को भी अपनी प्रदर्षनी में शामिल करें और साथ ही वर्षों से प्रदर्षित प्रदर्षनियों और वस्तुओं को बदलकर संग्रहालय में नयापन लायें।
छायाचित्र प्रदर्शनी
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल के 42वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आज दिनांक 22 मार्च को संग्रहालय के वीथि संकुल अंतरंग प्रदर्शनी भवन में “सुखिमः लैंड, पीपुल एंड कल्चर ऑफ सिक्किम” नामक छायाचित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रोफेसर पी.के. मिश्रा, मानव शास्त्री, मैसूर, डॉ. उत्तम लाल एवं डॉ. करिश्मा लेपचा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस अवसर पर संग्रहालय के निदेशक प्रो. सरित कुमार चैधुरी, डॉ. टी. बी. सुब्बा, (मानवशास्त्री, नार्थ-ईस्ट हिल यूनिवर्सिटी, शिलोंग) एवं अन्य महत्वपूर्ण लोग उपस्थित थे।
दर्शकों को पसंद आयी सिक्किम की पाककला
पहाड़ी राज्य सिक्किम अपने विशिष्ट प्रकार के व्यंजनों के लिए जाना जाता है। इन व्यंजनों में मोमोज, टमाटर का अचार, थुकपा, काइनेमा कढी, सिंकी सूप, गुन्द्रुक का अचार, छुरपी सूप, छुरपी का अचार, सेल रोटी, पक्कू करी, मेसू अचार (किण्वित बांस की कली) इत्यादि शामिल होता हैं। यह व्यंजन में अन्य देशों के विविध व्यंजनों की छाप भी सामान्य रूप से मिलती है।
संग्रहालय में सिक्किम के पारंपरिक व्यंजन में दम आलू, खुरी रोटी, सेल रोटी, वेज और नाॅन वेज मोमोस लाल मिर्च से तैयार चटपटी चाटनी के साथ परोसी गयी जिसे उपस्थित दर्शकों सराहा एवं व्यंजन पैक करवाकर घर भी ले गए। यह पारंपरिक भोजन उचित मुल्य पर दर्शकों के लिए 23 मार्च को भी उपलब्ध रहेगा।
शिल्प मेला
इसके साथ ही दर्शकगण संग्रहालय के वीथि संकुल, अंतरंग भवन परिसर में सिक्किम की पारंपरिक कला एवं शिल्प का प्रदर्शन-सह-विक्रय का अवलोकन किया एवं खरीददारी की। यह 23 मार्च को भी जारी रहेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
सांयकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुवात सिक्किम से आये पारंपरिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ने भूटिया नृत्य - डेन्जोंग नेय के प्रस्तुति के साथ हुई। तत्पश्चात राइ नृत्य - भुरुवा सिल्ली,, नेवार नृत्य - बज्रयोगिनी, शास्त्रीय चरिया नृत्य, तमांग नृत्य- डीम संग भारी, गुरुंग नृत्य - किने दुई सिला दाई, लिम्बू नृत्य - चाबरौंग, लेपचा नृत्य - त्यांगरे नाप एवं नेपाली फ्यूजन लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई।
इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के दुसरे भाग में सिक्कीम के प्रख्यात फ्यूजन बैंड - सोफियम ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।
Published on:
23 Mar 2018 08:12 am
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