एमपी के सिंघम नाम से चर्चित IPS ऑफिसर गौरव तिवारी के कारनामों की फेहरिस्त काफी लंबी है। मध्यप्रदेश के कटनी में 500 करोड़ के हवाला कारोबार का पर्दाफाश करने वाले तिवारी 35 लाख के इनामी नक्सली दिलीप गुहा को भी अरेस्ट करने के लिए जाने जाते हैं। इस नक्सली पर 19 कत्ल का आरोप था। इस नक्सली को मध्यप्रदेश ही नहीं, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की पुलिस भी ढूंढ रही थी। इसके अलावा वे अपने स्टाफ और स्थानीय लोगों से ऐसा व्यवहार करते हैं कि जब भी उनका तबादला होता है तो लोग भावुक हो जाते हैं। यहां तक कि कटनी में तो उनका तबादला रुकवाने के लिए धरना प्रदर्शन तक हो चुके हैं।
ट्रांसफर हुआ तो पूरा स्टाफ रोने लगा
गौरव तिवारी जब छिंदवाड़ा में एसपी थे। उनका जब ट्रांसफर रतलाम हुआ तो पुलिस महकमा ही नहीं पूरा शहर ही उदास हो गया था। कई लोग उनके दफ्तर पहुंच गए और फूट-फूटकर रोने लगे थ। छिंदवाड़ा में एसपी गौरव तिवारी को लोग सिंघम मानने लगे थे। गौरव की जब विदाई हुई तो लोगों को फूट-फूटकर रोता देख एसपी साहब भी भावुक हो गए थे और उनकी भी आंखें छलक आई थीं।
विवादों से भी है नाता
2017 में छिंदवाड़ा एसपी रहते हुए गौरव तिवारी उस समय विवादों में आ गए थे जब उन्होंने एक आदेश अपने जिले के सभी थाना प्रभारियों के लिए निकाला था। इस आदेश में कहा गया था कि समस्त थाना प्रभारियों को निर्देशित किया जाता है कि अगर आपके स्टाफ और चौकी के किसी अधिकारी/कर्मचारी को लोकायुक्त द्वारा ट्रेप किया जाता है, तो संबंधित थाना प्रभारी की संलिप्तता मानकर तत्काल संबंधित थाना प्रभारी को भी निलंबित करके कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद तत्कालीन गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने ऐसे आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई थी और पुलिस के बड़े अधिकारियों से चर्चा की बात कही थी।
जानिए यूथ में क्यों लोकप्रिय हैं गौरव तिवारी
0-एमपी कैडर के आइपीएस गौरव तिवारी उस समय सुर्खियों में आ गए थे, जब कटनी के एसपी रहते हुए उन्होंने 500 करोड़ के हवाला कारोबार का पर्दाफाश किया था। इसके बाद उनका तबादला हो गया था। उनका ट्रांसफर होने पर कई लोग सड़क पर उतर आए थे और वे रातों रात आम जनता के हीरो बन गए थे।
0- गौरव तिवारी उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे थे। गांव में ही अपनी स्कूलिंग करने के बाद वे आईआईटी की परीक्षा पास करके इंजीनियर बन गए थे। कुछ समय उन्होंने टाटा कंपनी में नौकरी की, लेकिन मन में आइपीएस बनने की चाह थी।
0- नौकरी छोड़ वे दिल्ली चले गए और यूपीएससी की तैयारी में लग गए। वे अपने रहने, खाने और पढ़ाई का खर्च सिर्फ 7 हजार रुपए में चला लेते थे।
0- गौरव की पोस्टिंग 2015 में एमपी के नक्सली क्षेत्र बालाघाट में थी। उसी समय उनकी पत्नी आभा तिवारी गर्भवती थी। डिलीवरी के लिए जैसे ही अस्पताल में भर्ती किया गया, गौरव को नक्सलियों से जुड़े सीक्रेट मिशन पर जाने का आदेश मिल गया। उसी रात उनके घर बेटी का जन्म हुआ और वे अपने मिशन पर भी चले गए।
0- गौरव तिवारी पर एक फिल्म भी बन रही है। उसकी शूटिंग आधी हो गई थी, हालांकि गौरव तिवारी ने इस फिल्म की शूटिंग यह कहते हुए रुकवा दी थी कि इसकी परमिशन नहीं ली गई है। यह फिल्म छिंदवाड़ा के ही राकेश नागले बना रहे थे।
जहां रहते हैं बच्चों को भी देते हैं सीख
गौरव तिवारी जहां भी रहते हैं वे बच्चों को और युवाओं को प्रोत्साहित करते हैं। वे कहते हैं कि युवाओं ने आईएएस, आईपीएस की पढ़ाई के साथ अच्छे इंसान और दूसरे की मदद करने की पढ़ाई भी करनी चाहिए। क्योंकि जितनी जरूरत अच्छे अधिकारियों की है। उतनी ही अच्छे इंसान की भी है। इंसान सुपर मैन होता है। वह कुछ भी कर सकता है।