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बिजली कंपनियों ने कहा- 4 साल में 24 हजार करोड़ का घाटा, अतिरिक्त दाम बढ़ाएं

- पेश किया दावा : विद्युत नियामक आयोग सात दिसंबर को करेगा सुनवाई

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The power center, which started 4 months ago due to the negligence of BMO, has not been able to get electricity so far

ग्राम परसाटोला के नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्र भवन का मामला

- बिजली कंपनियों ने इतना घाटा बताया

वर्ष - घाटा
2014-15 - 5156.88
2015-16 - 7156.94
2016-17 - 7247.55
2017-18 - 5327.54
(घाटा करोड़ रुपए में।)
भोपाल. बिजली कंपनियों के पुराने घाटे का खामियाजा प्रदेश के 1.20 करोड़ उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ सकता है। तीनों कंपनियों ने बीते चार सालों में 24 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा बताया है। इसी के साथ बिजली के अतिरिक्त दाम बढ़ाने की मांग विद्युत नियामक आयोग से की है। जबकि, इनमें से तीन सालों में बिजली के दाम बढ़ाए गए थे। चौथे साल की प्रतिपूर्ति इस बार अगस्त में दाम बढ़ाकर की जा चुकी है। आयोग इस मामले में सात दिसंबर को सुनवाई करेगा।
- ट्रू-अप का खेल ऐसा
बिजली कंपनियां आगामी साल के खर्च व वसूली के अनुमान के आधार पर दर वृद्धि का प्रस्ताव आयोग को पेश करती है। आयोग से मंजूर दर से दाम वसूले जाते हैं। जब पूरा साल बीत जाता है तो वह वसूली और खर्च का ट्रू-अप प्लान पेश करती हैं। खर्च व वसूली में अंतर आने पर ट्रू-अप प्लान में पुराने घाटे की रिकवरी के लिए अतिरिक्त दर बढ़ाने की मांग करती हैं। बिजली कंपनियों ने इस बार भी इसी ट्रू-अप नियम का सहारा लिया है
- तीन तरफ से दर वृद्धि
बिजली कंपनियों ने पहले पिछले चार सालों का 24 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा बताकर दर वृद्धि मांग की। उस पर वित्तीय वर्ष 2020-21 की दर वृद्धि का प्रस्ताव अलग पेश करना है। इसकी अंतिम तारीख 30 नवंबर है। यह वृद्धि 1 अप्रेल 2020 से होना है। इसके अलावा फ्यूल कास्ट एडजस्टमेंट (एफसीए) मॉडल पर तिमाही दर वृद्धि एक जनवरी 2020 से होना है। इसका चार्ट लगभग फाइनल हो चुका है। इस मॉडल में हर तीन महीने में दर वृद्धि की जाती है।

- विद्युत नियामक आयोग भी हैरान
24 हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे का दावा आने से आयोग भी हैरान है। सूत्रों के मुताबिक आयोग इस उलझन में है कि आधा घाटा भी मंजूर किया, तो दर वृद्धि रिकॉर्ड तोड़ देगी। यानी 12 हजार करोड़ भी घाटा माना, तो दर वृद्धि 21 से 24 फीसदी तक पहुंच जाएगी। उस पर सालाना दर वृद्धि का प्रस्ताव अलग रहेगा।
- कभी न भरने वाली खाई
बिजली कंपनियां हर साल औसत चार हजार करोड़ रुपए का घाटा बताकर दर वृद्धि मांगती है। विद्युत अधिनियम 2003 के तहत 2008 तक घाटा रिकवर होना था। लेकिन, घाटे की खाई भर नहीं रही है। आयोग औसतन 15 फीसदी घाटा मंजूर करता है। लेकिन, नए ट्रू-अप प्लान के हिसाब से कंपनियां 40 फीसदी घाटे से ऊपर जा रही हैं।
- चुनावी दरियादिली सबसे भारी
विधानसभा चुनाव 2018 के समय बिजली के दाम नहीं बढ़ाए गए थे। कांग्रेस सरकार के आने पर अगस्त 2019 में सात फीसदी दाम बढ़े थे। इसके बाद चार साल का घाटा और नया वित्तीय वर्ष पुराने घाटों को पूरा करके उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ाएगा। बिजली के दाम सौ यूनिट के बाद बेहद ज्यादा हो जाएंगे। अभी सरकार सौ यूनिट तक सौ रुपए में बिजली देकर खुद की ब्रांडिंग कर रही है। इस ब्रांडिंग के फेल होने का खतरा इस दाम बढ़ोतरी से उत्पन्न हो गया है।

पिछली भाजपा सरकार ने बिजली के नाम पर जनता को खूब लूटा। बिजली कंपनियों को 15 सालों में घाटे में पहुंचा दिया। हम इनको घाटे से उबारने के प्रयास कर रहे हैं। बिजली की दरों में वृद्धि तो नियामक आयोग के स्तर पर होती है। हमने बिजली बिलों को कम किया है। ऐसा भाजपा राज में कभी नहीं हुआ। हम इस मामले को भी दिखवाएंगे।
- प्रियव्रत सिंह, ऊर्जा मंत्री