
भोपाल। सरकार से नाराज बर्खास्त आईएएस शशि कर्णावत ने आखिरकार कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्होंने मंगलवार की सुबह कमलनाथ से मुलाकात कर कांग्रेस की सदस्यता ली।
इससे पहले भी सरकार के खिलाफ सड़क पर मोर्चा खोल चुकी शशि कर्णावत शनिवार को कांग्रेस के मंच पर नजर आ चुकी हैं, तभी से उनके कांग्रेस के साथ आने की अटकले लगनी शुरू हो गईं थी। इस दौरान कर्णावत ने अपने उपर लगे आरोपों पर कहा था कि आज का शासकीय परिवेश प्रताडि़त कर रहा है।
लंबे समय से लगाए जा रहे थे कयास...
बर्खास्तगी के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि कर्णावत राजनीति में उतरेंगी। वहीं पूर्व में उन्होंने यह भी कहा था कि अगले विधानसभा चुनाव में वह चुनाव मैदान में शिवराज सरकार के खिलाफ मैदान में उतरेगी। उन्होंंने कहा कि मुझे पद से हटाया गया है तो मैं अब इनकी सत्ता छीन लूंगी।
बेबाक हूं इसलिए हो रही हूं प्रताडि़त
पूर्व में कांग्रेस मंच पर आईं आईएएस शशि कर्णावत ने उस दौरान कहा था कि मुझे इसलिए प्रताडि़त किया गया क्योंकि मैं बेबाक हूं। बाबा साहब ने शिक्षा, संगठन और संघर्ष का आव्हान किया था, पर आज मेरे जैसे लोग शिक्षित होने के बाद भी लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
प्रताडि़त किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, मैं अन्याय के खिलाफ संघर्ष करती रहीं हूं और आगे भी करती रहूंगी। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, जिला कांग्रेस अध्यक्ष पीसी शर्मा, रिटायर आईएएस अधिकारी सरदार सिंह डंगस, सागर भंते ने भी विचार व्यक्त किए थे।
अंधेरे में पैर छूना और ...यही सिस्टम है?
यहां कर्णावत के साथ आईएएस रमेश थेटे भी कांग्रेस की सामाजिक न्याय एवं सामाजिक समरसता में बाबा साहब का योगदान संगोष्ठी में बतौर वक्ता शामिल हुए थे।
थेटे ने कहा कि सीनियर कहते हैं कि तुम अफसर अच्छे हो, लेकिन सिस्टम से नहीं चलते। किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि अंधेरे में जाकर पैर छूना और कहना कि आप विकास पुरुष हो, क्या यही सिस्टम है? वे एेसा नहीं कर सकते।
शशि कर्णावत पर ये आरोप...
इससे पहले प्रिंटिंग घोटाले की दोषी एमपी कैडर 1999 बैच की आईएएस अफसर शशि कर्णावत को बर्खास्त कर दिया गया है। 1999-2000 में मंडला जिला पंचायत सीईओ रहते हुए 33 लाख के प्रिंटिंग घोटाले के आरोप में ईआेडब्ल्यू ने कर्णावत के खिलाफ केस दर्ज किया था। स्पेशल कोर्ट ने कर्णावत को 5 साल की सजा सुनाई थी।
-सितंबर 2013 में वहीं के स्पेशल कोर्ट ने कर्णावत को 5 साल जेल और 50 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।
-इसके अगले माह ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। तब से निलंबन आदेश बढ़ाया जा रहा था।
-इससे पहले एमपी कैडर के आईएएस अधिकारी दंपती अरविंद जोशी और टीनू जोशी को भी भ्रष्टाचार के चलते बर्खास्त किया जा चुका है।
नोटिस भेजकर मांगे जवाब, नहीं देने पर कार्रवाई
-मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक भ्रष्टाचार की दोषी पाए जाने के बाद कर्णावत को अक्टूबर 2014 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
-इसमें पूछा गया था कि क्यों न उन्हें सेवा से हटा दिया जाए। उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया।
-इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें बर्खास्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।
-प्रस्ताव पर संघ लोक सेवा आयोग की सहमति के बाद कर्णावत से दाेबारा जवाब मांगा गया, लेकिन वे सरकार के सवालों के पूर्ण उत्तर और तर्क प्रस्तुत नहीं कर पाईं।
इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग के सहमति व्यक्त करने पर कर्णावत के बर्खास्तगी आदेश जारी कर दिए गए।
Published on:
08 May 2018 01:32 pm
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