
हरे-भरे पेड़ों का गला घोंटने जड़ों को मलबे-पत्थरों से पाट दिया, जिंदा दफन करने की तैयारी
भोपाल. स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कॉर्पोरेशन के एरिया बेस्ड डवलपमेंट (एबीडी) प्रोजेक्ट के तहत साउथ टीटी नगर के हरे-भरे क्षेत्र में काम शुरू कर दिया गया है। बुलेवार्ड स्ट्रीट से आगे साउथ टीटी नगर में ४५ मीटर चौड़ी सडक़ के लिए डक्ट बनाई जा रही है। इससे यहां लगे बरसों पुराने आम, नीम, पीपल व बरगद जैसे बड़े पेड़ों के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है। प्रोजेक्ट के नाम पर जल्द ही यहां के तीन हजार से अधिक पेड़ों पर आरी चलाई जाएगी।
मालूम हो कि एबीडी प्रोजेक्ट में लिंक रोड दो और एक के बीच वाले हिस्से में काम की रफ्तार कम होने से हरियाली बची हुई थी। क्षेत्र में कई सरकारी आवास तोड़े जा चुके हैं। ये पेड़ इन्हीं आवासों के आंगनों, सर्विस रोड किनारे और गलियों में लगे हैं। सभी पेड़ भारतीय प्रजाति के हैं। सडक़ का काम शुरू होने के साथ ही इन पेड़ों पर आरी चलना शुरू होगी। यहां कई पेड़ ४० से ५० साल पुराने तो कई १०० साल पुराने हैं, जो अपनी छांव और हरियाली से पर्यावरण को सहेजे हुए हैं।
बड़ा हिस्सा होगा हरियाली से महरूम
स्मार्ट सिटी के एबीडी प्रोजेक्ट में साउथ टीटी नगर शामिल नहीं था। बाद में यहां की ६२ एकड़ भूमि को जोड़ा गया। इस बदलाव से राजधानी का हरियाली से आच्छादित बड़ा हिस्सा उजड़ जाएगा। पेड़ों को कटने से बचने के लिए पत्रिका ने लगातार खबरें प्रकाशित की हंै। इसके बाद सीएम कमलनाथ ने प्रोजेक्ट के रिव्यू की बात कही थी। स्मार्ट सिटी डवलपमेट कॉर्पोरेशन में तारीख भी तय हुई, लेकिन ऐन वक्त पर कार्यक्रम रद्द हो गया। हालांकि राजधानीवासियों को उम्मीद है कि ग्रीन लंग्स में शामिल इस क्षेत्र के पेड़ों को बचाने के लिए सरकार प्रभावी कदम उठाएगी।
सडक़ के लिए खुदाई का काम शुरू
विरोध के देखते हुए साउथ टीटी नगर में पेड़ों की कटाई का काम बड़े स्तर पर नहीं किया है। सडक़ बनाने के लिए की जा रही खुदाई से निकली मिट्टी और पत्थरों को पेड़ों की जड़ों पर डाला जा रहा है। पेड़ों के तने इनमें दब गए हैं। इन पेड़ों को जिंदा ही दफन किया जा रहा है।
मैं मरना नहीं चाहता मुझे बचा लो...
अ लसुबह से देर रात तक मशीनों और ट्रक-डम्परों की कर्कश आवाज डराती है। क्विंटलों पत्थर और मलबा जड़ों में पटककर मुझे और मेरे जैसे अन्य पेड़ों को बेदर्दी से दफन किया जा रहा है। हर दिन यही डर रहता है कि कल का सूरज देखना नसीब होगा कि नहीं। ४० बरस से हमने लोगों को कभी तेज धूप की तपन से तो कभी तेज बारिश से बचाया। हजारों पंछियों को आसरा दिया, लेकिन हमारी सुध लेने की फिक्र किसी को नहीं है। डेढ़ बरस पहले तक हमारे आसपास कई परिवार बसते थे। बच्चे इर्द-गिर्द खेला करते थे... इन्हें देखकर सुकून मिलता था, पर अब यहां कोई नहीं आता। डम्परों-ट्रकों और विशालकाय मशीनों को पास आता देख दिल सहम जाता है, कहीं ये हमें रौंद न दें। पता नहीं हमें कब काट दिया जाए या पत्थरों और मलबों के नीचे दबा दिया जाए। मेरे जैसे कई हरे-भरे पेड़ों पर पहले ही बेदर्दी से आरी चला दी गई है। ...सुना है कि प्लेटिनम प्लाजा के पास टनल बनाने के कारण रोड बंद की है, अब वाहनों की आवाजाही के लिए पेड़ों के बीच से सामानांतर रोड बनाई जाना है। शहरवासियों से बस यही विनती है कि हम जीना चाहते हैं, हमारी हर सांस आप सभी को जीवन देती है। तिल-तिल मारने के लिए जड़ों पर डाले गए मलबे को हटाएं ताकि हम भी खुली हवा में सांस ले सकें।
Published on:
16 Oct 2019 04:04 am
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